बुध प्रदोष व्रत कथा – Budh Pradosh Vrat Katha

बुधवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर बुध प्रदोष मनाया जाता है। इस कथा में पत्नी को अनुचित समय पर विदा करने से उत्पन्न संकटों का वर्णन है और यह भी बताया गया है कि भगवान शिव की आराधना से कैसे उन संकटों से मुक्ति मिलती है। यह कथा विवेक, मर्यादा और शिव कृपा का संदेश देती है।

बुध प्रदोष व्रत कथा — हठी दामाद और उसकी नवविवाहिता पत्नी की शिक्षाप्रद कथा

मंगल प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण कराने के पश्चात श्री सूतजी ने शौनकादि ऋषियों से कहा— “हे मुनिगणों! अब मैं आपको बुध त्रयोदशी प्रदोष व्रत की कथा सुनाने जा रहा हूँ। आप सभी इसे एकाग्रचित्त होकर सुनें।”

प्राचीन काल में एक ग्राम में एक युवक निवास करता था, जिसका विवाह कुछ समय पूर्व ही सम्पन्न हुआ था। विवाह के कुछ दिनों बाद वह गौना कराने अपनी पत्नी को लेने ससुराल पहुँचा। संयोगवश वह अपनी पत्नी को बुधवार के दिन विदा कराने पहुँचा। उसके सास-ससुर और अन्य संबंधियों ने उसे समझाया कि बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराकर ले जाना अशुभ माना जाता है।

किन्तु वह दामाद अत्यंत हठी स्वभाव का था। उसने अपनी सास से कहा— “ऐसी कोई बात नहीं है। यह सब केवल अंधविश्वास है। मैं तो आज ही, बुधवार के दिन, अपनी पत्नी को घर लेकर जाऊँगा।” बार-बार समझाने पर भी जब वह नहीं माना, तो विवश होकर उसके सास-ससुर ने अपनी पुत्री को बुधवार के दिन ही विदा कर दिया।

नवविवाहित दंपति बैलगाड़ी से अपने घर की ओर चल पड़े। कुछ दूर चलने के बाद मार्ग में उसकी पत्नी को प्यास लगी। पति जल लेने के लिए एक पात्र लेकर आगे गया। जब वह लौटकर आया, तो उसने देखा कि एक अज्ञात व्यक्ति उसकी पत्नी के लिए जल लेकर आया है और उसकी पत्नी उससे हँस-बोल रही है

यह दृश्य देखकर पति को अत्यंत क्रोध आया। वह उस अजनबी की ओर बढ़ा, किंतु जैसे ही वह उसके पास पहुँचा, वह स्तब्ध रह गया। उस अज्ञात व्यक्ति का रूप, रंग और कद-काठी बिल्कुल उसी के समान थी—मानो उसका ही प्रतिबिंब हो।

दोनों में विवाद होने लगा और देखते ही देखते मार्ग पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। उसी समय वहाँ राजा के सैनिक भी आ पहुँचे। उन्होंने उस स्त्री से पूछा— “इन दोनों में से बताओ, तुम्हारा वास्तविक पति कौन है?”

दो बिल्कुल समान पुरुषों को देखकर नवविवाहिता धर्म-संकट और गहरे भ्रम में पड़ गई। वह अत्यंत व्याकुल हो उठी। अपनी पत्नी को इस संकट में देखकर पति का हृदय भी द्रवित हो गया। उसने मन ही मन भगवान शिव से प्रार्थना की— “हे महादेव! मेरी और मेरी नववधू की रक्षा करें। मुझसे भारी भूल हो गई है। बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराना अनुचित था। हे भोलेनाथ! मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूँ। भविष्य में ऐसा अपराध कभी नहीं करूँगा, कृपया मुझे क्षमा करें।”

पति की सच्ची पश्चाताप भरी प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने तुरंत कृपा की। उसी क्षण वह अज्ञात व्यक्ति वहाँ से अन्तर्धान हो गया। संकट टलते ही पति-पत्नी दोनों सकुशल अपने घर पहुँच गए। उस घटना के बाद दोनों ने संकल्प लिया कि वे श्रद्धा और विधि-विधान से बुध प्रदोष व्रत का पालन करेंगे। इस प्रकार भगवान शिव की कृपा से उनका वैवाहिक जीवन सुरक्षित और सुखमय बना।

यह कथा हमें सिखाती है कि शास्त्रीय नियमों की अवहेलना और हठ संकट का कारण बन सकते हैं, किंतु सच्ची भक्ति और पश्चाताप से भगवान शिव अवश्य रक्षा करते हैं।
हर-हर महादेव। 🙏

बुध प्रदोष व्रत करने के लाभ

बुध प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से बुद्धि, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला बताया गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया बुध प्रदोष व्रत जीवन के कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं—

1. उत्तम बुद्धि और विवेक का वरदान
बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को तीव्र बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

2. बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
इस व्रत के प्रभाव से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होता है। शारीरिक कमजोरी, बार-बार होने वाली बीमारियाँ और मानसिक अस्थिरता से राहत मिलती है।

3. मन और आत्मा की शुद्धि
बुध प्रदोष व्रत मन और आत्मा को शुद्ध करने वाला माना गया है। इससे आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति होती है। भगवान शिव की कृपा से रोगों में कमी आती है और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर कर सुख-शांति और पारिवारिक सामंजस्य को बढ़ाता है।

4. करियर और व्यापार में उन्नति
बुध प्रदोष के दिन किए गए पूजन-पाठ और उपवास के शुभ प्रभाव से करियर और व्यापार में प्रगति होती है। व्यक्ति को स्थिर आय, धन लाभ और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

5. ऋण मुक्ति और धन-धान्य की प्राप्ति
हिंदू मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से चंद्र देव का भी आशीर्वाद मिलता है। जो जातक 11 प्रदोष व्रत विधि-विधान से करता है, उसके जीवन के सभी ऋण शीघ्र समाप्त हो जाते हैं और उसे धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती।

इस प्रकार बुध प्रदोष व्रत बुद्धि, स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति प्रदान करने वाला एक अत्यंत कल्याणकारी व्रत है, जिसे सच्चे मन से करने पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
हर-हर महादेव। 🙏


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हर-हर महादेव 🙏

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