आरती “गजबदन विनायक की” का सार (भावार्थ)
यह आरती भगवान श्री गणेश की दिव्यता, करुणा और सर्वशक्तिमान स्वरूप का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन करती है। इसमें गणपति जी को गजबदन विनायक, अर्थात् विशाल मस्तक और हाथीमुख वाले उस देव के रूप में नमन किया गया है, जिन्हें सभी देवता (सुर) और ऋषि-मुनि पूजते हैं। यह आरती हमें यह स्मरण कराती है कि भगवान गणेश समस्त गणों के नायक, सृष्टि के कार्यों के आरंभकर्ता और विघ्नों के विनाशक हैं।
आरती के अनुसार भगवान गणेश एकदन्त, शशिभाल (चंद्रमा के समान शीतल मस्तक वाले) और गजानन हैं। वे हर प्रकार की बाधाओं और संकटों को दूर करने वाले, शुभ गुणों के भंडार और भक्तों के जीवन में मंगल लाने वाले हैं। शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जी की वंदना स्वयं ब्रह्मा (चतुरानन) तक करते हैं। वे भक्तों के दुःखों का नाश कर उन्हें सुख, शांति और संतोष प्रदान करते हैं।
इस आरती में गणपति जी को ऋद्धि और सिद्धि का स्वामी बताया गया है, अर्थात् वे सांसारिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक सिद्धि भी प्रदान करते हैं। वे शुद्ध और निर्मल बुद्धि के दाता हैं, जो मनुष्य को सही और गलत का विवेक सिखाते हैं। भगवान गणेश पापों के वन को अग्नि की तरह भस्म कर देते हैं और अपनी अदृश्य, निर्मल और दिव्य गति से साधक को सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। वे विद्या, विनय, वैभव और उत्तम संस्कारों के मूल स्रोत हैं।
आरती में उनके स्वरूप का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन मिलता है। उनके कमल जैसे नेत्र, विशाल सूंड, धूम्रवर्ण शरीर और हाथों में धारण अंकुश व वज्र उनके सामर्थ्य और नियंत्रण शक्ति के प्रतीक हैं। लंबोदर गणपति अपने विशाल उदर से यह संदेश देते हैं कि वे समस्त ब्रह्मांड को धारण करने की क्षमता रखते हैं। वे हर प्रकार की बाधा, विपत्ति और संकट को हरने वाले हैं तथा सभी देवताओं द्वारा हर विधि से पूजनीय हैं।
समग्र रूप से यह आरती हमें यह सिखाती है कि भगवान गणेश की सच्चे मन से की गई उपासना जीवन के विघ्नों को दूर करती है, बुद्धि को निर्मल बनाती है और भौतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। “गजबदन विनायक की आरती” भक्त के मन में श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है तथा उसे धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर दृढ़ बनाती है। 🙏
आरती गजबदन विनायक की – Aarti Gajabadan Vinayak Ki
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
एकदन्त शशिभाल गजानन,
विघ्नविनाशक शुभगुण कानन।
शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,
दुःखविनाशक सुखदायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति।
अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति,
विद्या-विनय-विभव-दायककी॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर,
धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर।
लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
प्रसिद्ध “ आरती गजबदन विनायक की ” – वीडियो :
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🌼 गणपति बप्पा मोरया | जय श्री गणेश 🌼