भगवान नटवर जी की आरती – सार (भावार्थ)
भगवान नटवर जी की आरती भगवान श्रीकृष्ण के उस दिव्य स्वरूप का भावपूर्ण स्तवन है, जिसमें वे नंदनंदन, गोपाल, बंशीधर और गोवर्धनधारी के रूप में भक्तों के हृदय में विराजमान हैं। यह आरती श्रीकृष्ण के बाल, लीला, करुणा, पराक्रम और परम तत्व—सबका सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।
आरती की शुरुआत श्रीकृष्ण को नंद और यशोदा के लाड़ले, गोधन के रक्षक और गोपियों के प्रिय गोपाल के रूप में स्मरण करते हुए होती है। वे देवताओं के प्रिय हैं और अधर्म रूपी असुरों के संहारक हैं। मोहन स्वरूप श्रीकृष्ण सम्पूर्ण विश्व को मोहित करने वाले हैं—उनका सौंदर्य केवल बाहरी नहीं, बल्कि आत्मा को बांध लेने वाला दिव्य आकर्षण है।
आगे आरती में गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले और बंशी की मधुर धुन से सबको आकर्षित करने वाले नटवर जी की महिमा गाई गई है। वे वसुदेव और देवकी के पुत्र हैं, जिन्होंने कंस, कालियवन जैसे अत्याचारी असुरों का अंत कर धर्म की स्थापना की। सम्पूर्ण जगत को धारण करने वाले, अजेय और नित्य पूजनीय श्रीकृष्ण सदा नवीन और परम सुंदर हैं—उनका सौंदर्य समय से परे है।
इस आरती में भगवान श्रीकृष्ण को सर्वकला के अधिपति और समस्त विश्व के धारक के रूप में वर्णित किया गया है। वे करुणा के सागर हैं, भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। अजन्मा, अमर और माया से परे होते हुए भी वे माया का विनाश करने वाले हैं। निर्गुण होते हुए भी वे सगुण रूप में भक्तों के लिए सुलभ हैं—यही उनकी दिव्यता का रहस्य है।
आगे श्रीकृष्ण को पांडवों के संरक्षक और राजा परीक्षित के रक्षक के रूप में स्मरण किया गया है। वे पापों का नाश करने वाले हैं और अहंकार तथा अज्ञान रूपी विष को समाप्त करने वाले हैं। सम्पूर्ण संसार में व्याप्त होकर भी वे उससे परे रहते हैं। ब्रह्म से भी परे, परमेश्वर स्वरूप श्रीकृष्ण ही इस जगत के सच्चे नियंता हैं।
आरती के अंतिम चरणों में भगवान श्रीकृष्ण को गोलोकविहारी, नित्य सत्य और अव्यक्त तत्व के रूप में स्वीकार किया गया है। वे लीला स्वरूप हैं—उनकी हर लीला करुणा, प्रेम और आनंद से भरी हुई है। राधा रानी के प्रिय श्रीकृष्ण का मधुर, मनोहर स्वरूप भक्तों को प्रेम और भक्ति के रस में डुबो देता है।
सार रूप में, भगवान नटवर जी की यह आरती श्रीकृष्ण के बाल-लीला से लेकर परम ब्रह्म स्वरूप तक की यात्रा कराती है। इसका पाठ भक्त के मन में श्रद्धा, विश्वास और आनंद का संचार करता है तथा जीवन में धर्म, प्रेम और करुणा का मार्ग प्रशस्त करता है। यह आरती हमें सिखाती है कि भगवान श्रीकृष्ण केवल पूज्य ही नहीं, बल्कि हर भक्त के स्नेही रक्षक और मार्गदर्शक हैं। 🌸🙏
भगवान नटवर आरती – Bhagwan Natwar Aarti
नन्द-सुवन जसुमतिके लाला,गोधन गोपी प्रिय गोपाला।
देवप्रिय असुरनके काला,मोहन विश्वविमोहन वर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
जय वसुदेव-देवकी-नन्दन,कालयवन-कन्सादि-निकन्दन।
जगदाधार अजय जगवन्दन,नित्य नवीन परम सुन्दर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
अकल कलाधर सकल विश्वधर,विश्वम्भर कामद करुणाकर।
अजर, अमर, मायिक, मायाहर,निर्गुन चिन्मय गुणमन्दिर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
पाण्डव-पूत परीक्षित रक्षक,अतुलित अहि अघ मूषक-भक्षक।
जगमय जगत निरीह निरीक्षक,ब्रह्म परात्पर परमेश्वर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
नित्य सत्य गोलोकविहारी,अजाव्यक्त लीलावपुधारी।
लीलामय लीलाविस्तारी,मधुर मनोहर राधावर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की,गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की,गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
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जय श्री कृष्ण! 🌸🙏