श्री रघुवर जी की आरती – Aarti Shri Raghuvar Ji Ki

श्री रघुवर जी की आरती – सार (भावार्थ)

श्री रघुवर जी की आरती भगवान श्रीराम के उस आदर्श और दिव्य स्वरूप का भावपूर्ण स्तवन है, जिसमें वे सत्य, चित्त और आनंद के साकार रूप के रूप में पूजे जाते हैं। यह आरती केवल पूजा का अंग नहीं, बल्कि मर्यादा, करुणा, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।

आरती की प्रथम पंक्ति में भगवान श्रीराम को सत्-चित्-आनंद स्वरूप और अत्यंत शुभ व सुंदर बताया गया है। वे राजा दशरथ के पुत्र और माता कौशल्या के प्रिय नंदन हैं। देवताओं और ऋषि-मुनियों के रक्षक तथा अधर्म रूपी दैत्यों के संहारक श्रीराम सदा धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। वे अपने भक्तों के हृदय में चंदन की शीतलता की तरह वास करते हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में संसार को जीवन का आदर्श मार्ग दिखाते हैं।

आगे आरती में श्रीराम के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन है जो निर्गुण होकर भी सगुण रूप में प्रकट होता है। उनका सौंदर्य अनुपम है और वे सभी लोकों में विभिन्न विधियों से वंदित हैं। श्रीराम भक्तों के शोक और भय को दूर करने वाले हैं तथा जीवन को समृद्ध करने वाली नव-निधियों के दाता हैं। माया से परे रहकर भी मानव रूप में अवतरित होकर वे आदर्श मानवता का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

आरती के अगले चरण में भगवान श्रीराम को जानकी पति, देवताओं के अधिपति और संपूर्ण जगत के स्वामी के रूप में स्मरण किया गया है। वे तीनों लोकों की गति हैं और समस्त चराचर जगत का पालन करने वाले हैं। उनकी महिमा असीम और अगम है—उनके सिवा संसार में कोई अन्य अंतिम आश्रय नहीं है। हर जीव की सच्ची गति और लक्ष्य केवल श्रीराम ही हैं।

अंतिम चरण में श्रीराम की शरणागत वत्सलता और भक्तवत्सल स्वभाव को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। वे व्रत और मर्यादा का पालन करने वाले हैं तथा भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान हैं, जो हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। असुरों का नाश करने वाले श्रीराम का नाम मात्र लेने से ही संसार पवित्र हो जाता है। वानरों के सखा और दीन-दुखियों के कष्ट हरने वाले श्रीराम करुणा और प्रेम की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं।

सार रूप में, श्री रघुवर जी की यह आरती भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, दिव्यता और करुणा का सार प्रस्तुत करती है। इसका नियमित पाठ मन को शांति, जीवन को दिशा और हृदय को भक्ति से भर देता है। यह आरती हमें सिखाती है कि मर्यादा, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
जय श्री राम। 🌸🙏

श्री रघुवर जी की आरती – Aarti Shri Raghuvar Ji Ki

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत् चित् आनन्द शिव सुन्दर की।

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन।

अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोतम वर की।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की…..।

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि।

हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की…..।

जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति।

विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की…..।

शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी।

नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की…..।


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जय श्री राम! 🌸🙏

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