श्री सीताराम आरती – सार (भावार्थ)
“श्री सीताराम आरती” भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य दाम्पत्य स्वरूप, सौंदर्य, मधुरता और प्रेममयी भक्ति को अत्यंत कोमल और आनंदपूर्ण भाव में प्रस्तुत करने वाली आरती है। यह आरती भक्त को अयोध्या–जनकपुर की पावन परंपरा और सीता–राम के आदर्श गृहस्थ धर्म की अनुभूति कराती है, जहाँ भक्ति, सौंदर्य और संगीत का मधुर संगम होता है।
आरती की शुरुआत में यह दृश्य उभरता है कि चारों ओर सखियाँ और सेविकाएँ आनंद में मग्न हैं। वे नवीन वस्त्रों और सुंदर श्रृंगार से सुसज्जित होकर मंगल वातावरण रच रही हैं। कोई बीन और सितार जैसे वाद्य यंत्र बजा रही है, तो कोई मधुर स्वर में गीत गाकर सीता–राम की स्तुति कर रही है। यह दर्शाता है कि जहाँ सीताराम विराजमान होते हैं, वहाँ स्वाभाविक रूप से सुख, संगीत और मंगल का वास होता है।
आगे आरती में सीता–राम के अनुपम सौंदर्य का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। दोनों राजसी रूप में एक साथ सुशोभित हैं—श्रीराम श्यामल नील वर्ण में और माता सीता पीत वस्त्रों व आभूषणों से दमक रही हैं। उनके दिव्य रूप को देखकर असंख्य कामनाएँ और सांसारिक आकर्षण भी लज्जित हो जाते हैं। भक्त के नेत्रों को उनका दर्शन पाकर पूर्ण तृप्ति और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है।
आरती में श्रीराम और माता सीता के नेत्र, मुस्कान और मुखमंडल की विशेष प्रशंसा की गई है। कमल जैसे नेत्र, चंचल किंतु करुण दृष्टि, अरुणिम होंठों की पवित्र शोभा और चंद्रमा जैसी शीतल मुस्कान—इन सबमें ऐसा माधुर्य है कि भक्त अपने नेत्र वहीं अटका लेता है। यह भाव बताता है कि सीताराम का सौंदर्य केवल देखने योग्य नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करने वाला है।
इसके बाद आरती के पूजन विधान का उल्लेख आता है। सोने की सुंदर थाली सजाई गई है, जिसमें घी और कपूर की शुभ ज्योति प्रज्वलित है। रामेश्वर (श्रीराम) की सेवा में चँवर डुलाए जा रहे हैं और देवता पुष्पवर्षा कर रहे हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि सीताराम की आरती केवल मनुष्यों द्वारा ही नहीं, बल्कि देवताओं द्वारा भी आनंदपूर्वक की जाती है।
पूरी आरती का मूल भाव यह है कि भक्तों को पूरे उल्लास और प्रेम से प्रिय–प्रियतम श्री सीताराम की आरती गानी चाहिए। यह आरती केवल स्तुति नहीं, बल्कि भक्ति, सौंदर्य और संगीत से भरा एक ऐसा अनुभव है, जो मन को संसार से हटाकर प्रभु-चरणों में स्थिर कर देता है।
निष्कर्ष
श्री सीताराम आरती हमें यह सिखाती है कि भगवान राम और माता सीता का स्मरण केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि आनंद, प्रेम और सौंदर्य से भरी भक्ति यात्रा है। जो भक्त श्रद्धा और उल्लास से इस आरती का गायन करता है, उसके जीवन में शांति, पवित्रता और गृहस्थ धर्म की मधुर मर्यादा स्वतः प्रकट हो जाती है।
🙏 जय सीताराम | जय श्रीराम 🙏
श्री सीताराम आरती – Sita Ram Ji Ki Aarti
आसपास सखियाँ सुख दैनी,सजि नव साज सिन्गार सुनैनी,
बीन सितार लिएँ पिकबैनी,गाइ सुराग सुनाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
अनुपम छबि धरि दन्पति राजत,नील पीत पट भूषन भ्राजत,
निरखत अगनित रति छबि लाजत,नैनन को फल पाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
नीरज नैन चपल चितवनमें,रुचिर अरुनिमा सुचि अधरनमें,
चन्द्रबदन की मधु मुसकनमेंनिज नयनाँ अरुझाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
कंचन थार सँवारि मनोहर,घृत कपूर सुभ बाति ज्योतिकर,
मुरछल चवँर लिएँ रामेस्वरहरषि सुमन बरसाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
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🌸 जय सीताराम | सीता-राम 🌸