ॐ जय शिव ओंकारा आरती – सार (भावार्थ)
“ॐ जय शिव ओंकारा” भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध और अर्थपूर्ण आरतियों में से एक है। यह आरती शिव के निर्गुण–सगुण, सृष्टिकर्ता–संहारक और करुणामय स्वरूप को अत्यंत सुंदर भावों में प्रस्तुत करती है। इसमें शिव को ॐकार स्वरूप, त्रिदेवों के आधार और समस्त ब्रह्मांड के नियंता के रूप में स्मरण किया गया है।
आरती की शुरुआत में भगवान शिव को ओंकार स्वरूप कहा गया है, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव तीनों शक्तियाँ एक साथ विद्यमान हैं। वे अर्धनारीश्वर रूप में पार्वती के साथ स्थित हैं, जो शक्ति और शिव के अद्वैत भाव को दर्शाता है। यह बताता है कि सृष्टि का संतुलन शिव और शक्ति के मिलन से ही संभव है।
आगे शिव के विविध मुखों और वाहनों का वर्णन आता है—एक मुख, चार मुख और पाँच मुख के रूप में वे अलग-अलग कार्यों का संचालन करते हैं। हंस, गरुड़ और वृषभ जैसे वाहनों का उल्लेख यह दर्शाता है कि शिव ज्ञान, वैराग्य और धर्म के प्रतीक हैं और सभी लोकों में पूज्य हैं।
आरती में शिव के अनेक भुजाओं वाले रूप का वर्णन है, जो उनके त्रिगुणात्मक स्वरूप (सत्त्व, रज, तम) को प्रकट करता है। उनका यह रूप त्रिलोक के जीवों को आकर्षित करता है और यह सिखाता है कि शिव सभी गुणों से परे होकर भी सभी में व्याप्त हैं।
भगवान शिव को अक्षमाला, वनमाला और मुण्डमाला धारण करने वाला त्रिपुरारी कहा गया है, जिन्होंने त्रिपुरासुर जैसे अहंकार के प्रतीक का नाश किया। उनका यह रूप दर्शाता है कि शिव असुर प्रवृत्तियों का संहार कर भक्तों की रक्षा करते हैं।
शिव के वस्त्रों और संगत का भी सुंदर चित्रण है—कभी श्वेताम्बर, कभी पीताम्बर, तो कभी बाघम्बर धारण करने वाले शिव, सनकादि ऋषियों, गरुड़ और भूतगणों से घिरे रहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि शिव सबको समान दृष्टि से स्वीकार करने वाले महादेव हैं।
हाथों में कमण्डलु, चक्र और त्रिशूल धारण कर शिव सुख देने वाले, दुख हरने वाले और जगत का पालन करने वाले बताए गए हैं। वे केवल संहारक नहीं, बल्कि कल्याण और करुणा के साक्षात स्वरूप हैं।
आरती यह भी स्पष्ट करती है कि प्रणव “ॐ” के भीतर ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक हैं, अर्थात शिव ही परम सत्य हैं। लक्ष्मी, सावित्री और पार्वती का संग यह दर्शाता है कि शिव सभी शक्तियों के केंद्र हैं, और गंगा का उनके जटाओं में वास पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक है।
कैलास पर्वत पर पार्वती सहित निवास करने वाले शिव, भांग-धतूरा ग्रहण करने वाले और भस्म रमाने वाले योगीराज हैं। उनके गले में मुण्डमाला, जटाओं में गंगा और शरीर पर मृगछाला उनके वैराग्य और तपस्वी स्वरूप को दर्शाता है।
काशी में विराजमान विश्वनाथ के रूप में शिव नित्य दर्शन देने वाले हैं। नंदी उनके परम भक्त हैं और उनकी महिमा अपार है। अंत में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस आरती का गान करता है, उसे शिवकृपा से मनवांछित फल, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष
ॐ जय शिव ओंकारा आरती भगवान शिव के सर्वव्यापक, करुणामय और मोक्षदायक स्वरूप को सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह आरती भक्त को अहंकार, अज्ञान और दुःख से मुक्त कर आध्यात्मिक शांति, भक्ति और वैराग्य की ओर ले जाती है। शिवभक्ति के पथ पर चलने वालों के लिए यह आरती एक आत्मिक ऊर्जा और विश्वास का स्रोत है।
🙏 हर हर महादेव | ॐ नमः शिवाय 🙏
शिवजी की आरती – Om Jai Shiv Omkara Aarti – ॐ जय शिव ओंकारा आरती
ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
यदि आपको ॐ जय शिव ओंकारा आरती का यह भावार्थ और आध्यात्मिक संदेश मन को शांति देने वाला लगा हो, तो कृपया नीचे कमेंट में “ॐ नमः शिवाय” या “हर हर महादेव” अवश्य लिखें और अपनी श्रद्धा व अनुभव साझा करें।
इस पावन आरती को अपने परिवार, मित्रों और शिवभक्तों के साथ शेयर करें, ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान शिव की करुणा, वैराग्य और कल्याणकारी कृपा से जुड़ सकें। ऐसी ही आरती, भजन, कथा और शिव-भक्ति से जुड़ी आध्यात्मिक सामग्री के लिए हमारे ब्लॉग से जुड़े रहें।
🌿 हर हर महादेव | शिव शंभू 🌿