श्री नृसिंह भगवान की आरती – सार (भावार्थ)
श्री नरसिंह भगवान की आरती में भगवान नृसिंह को ऐसे दिव्य रक्षक के रूप में नमन किया गया है, जो संकट में पड़े भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। जब भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार बढ़ा और अधर्म अपने चरम पर पहुँचा, तब भगवान ने स्तम्भ को फाड़कर प्रकट होकर यह सिद्ध किया कि वे अपने भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करते। उनका यह प्राकट्य अन्याय, भय और अहंकार के अंत का प्रतीक है।
आरती में भगवान नृसिंह को दीन-दयालु और भक्तन हितकारी कहा गया है। उनका स्वरूप भले ही उग्र है, पर उनका हृदय करुणा से भरा हुआ है। वे अधर्मियों के लिए प्रलय समान हैं, लेकिन सच्चे भक्तों के लिए कृपा और सुरक्षा का सागर हैं। उनका अद्भुत और विलक्षण रूप यह संदेश देता है कि जब धर्म की रक्षा का प्रश्न आता है, तब ईश्वर स्वयं असाधारण रूप धारण करते हैं।
इस आरती में यह भी बताया गया है कि भगवान नृसिंह भक्त और शत्रु के हृदय की वास्तविक भावना को पहचानते हैं। वे अन्यायी और दुष्ट प्रवृत्ति का नाश करते हैं, वहीं अपने दास को अपनाकर उसे भय, कष्ट और दुखों से मुक्त करते हैं। यह भाव भक्त और भगवान के बीच गहरे विश्वास और आत्मीय संबंध को दर्शाता है।
अंत में, आरती यह संकेत देती है कि भगवान नृसिंह की महिमा केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है। ब्रह्मा, शिव और समस्त देवगण भी उनकी आरती करते हैं, पुष्प वर्षा करते हैं और उनकी विजय का जयघोष करते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि भगवान नृसिंह सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रक्षक हैं और उनका स्मरण मात्र ही भय, पाप और संकटों का नाश कर देता है।
संक्षेप में, यह आरती हमें यह शिक्षा देती है कि सच्ची भक्ति, अडिग विश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने वाले की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। श्री नृसिंह भगवान का स्मरण भय को दूर करता है, आत्मबल बढ़ाता है और जीवन में धर्म व सत्य की स्थापना करता है।
श्री नरसिंह भगवान की आरती – Narsingh Bhagwan Ki Aarti
ॐ जय नरसिंह हरे,
प्रभु जय नरसिंह हरे ।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
जनका ताप हरे ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
तुम हो दिन दयाला,
भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी ।
अद्भुत रूप बनाकर,
अद्भुत रूप बनाकर,
प्रकटे भय हारी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
सबके ह्रदय विदारण,
दुस्यु जियो मारी,
प्रभु दुस्यु जियो मारी ।
दास जान आपनायो,
दास जान आपनायो,
जनपर कृपा करी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
ब्रह्मा करत आरती,
माला पहिनावे,
प्रभु माला पहिनावे ।
शिवजी जय जय कहकर,
पुष्पन बरसावे ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
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ॐ जय नरसिंह हरे! 🦁🙏