श्री नरसिंह कुंवर की आरती का सार (भावार्थ)
श्री नरसिंह कुंवर की आरती भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की असीम शक्ति, भक्तवत्सलता और अधर्म के विनाश का सुंदर भावात्मक वर्णन करती है। आरती में प्रभु के उन दिव्य कार्यों का स्मरण किया गया है, जिनके द्वारा उन्होंने प्रत्येक युग में अपने भक्तों की रक्षा की और पाप का अंत किया।
आरती की शुरुआत में वेदों द्वारा गाए गए भगवान नरसिंह के निर्मल यश और महिमा का गुणगान किया गया है। सबसे पहले भक्त प्रह्लाद की रक्षा का प्रसंग आता है, जहाँ भगवान ने स्तंभ से प्रकट होकर अत्याचारी हिरण्यकशिपु का वध किया और यह सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति के आगे कोई शक्ति नहीं टिकती।
दूसरे चरण में भगवान के वामन अवतार का स्मरण है, जहाँ उन्होंने बलि राजा के द्वार पर जाकर सेवा स्वीकार की और अहंकार को विनम्रता में परिवर्तित किया। यह संदेश मिलता है कि ईश्वर भक्ति से बड़ा कोई दान नहीं।
तीसरी आरती में ब्रह्मा और सहस्त्रबाहु जैसे प्रसंगों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि भगवान की शक्ति सृष्टि के हर स्तर से ऊपर है और वे अन्याय के विरुद्ध सदैव खड़े रहते हैं।
चौथी आरती में असुरों के संहार और भक्त विभीषण पर कृपा का उल्लेख है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान धर्म का साथ देने वालों को सदैव संरक्षण देते हैं, चाहे वे कहीं भी हों।
पाँचवीं आरती में कंस वध और ग्वाल-बाल, गोपियों की रक्षा का वर्णन है। यह भाग भगवान की लीलामय, करुणामयी और लोककल्याणकारी स्वरूप को प्रकट करता है।
अंत में तुलसी, कंठमणि और कबीरदास जैसे संतों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सरल भक्ति, सच्चा प्रेम और निष्कपट हृदय ही भगवान नरसिंह को प्रसन्न करने का मार्ग है।
सार संदेश
यह आरती हमें सिखाती है कि भगवान नरसिंह केवल उग्र रूप ही नहीं, बल्कि करुणा, न्याय और भक्तों के रक्षक हैं। जो श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन से भय, अन्याय और कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
भगवान नृसिंह आरती – आरती कीजै नरसिंह कुँवर की – Aarti Kijai Narsingh Kunwar Ki
आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।
वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥
पहली आरती प्रह्लाद उबारे ।
हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥
दुसरी आरती वामन सेवा ।
बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥
तीसरी आरती ब्रह्म पधारे ।
सहसबाहु के भुजा उखारे ॥
चौथी आरती असुर संहारे ।
भक्त विभीषण लंक पधारे ॥
पाँचवीं आरती कंस पछारे ।
गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले ॥
तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा ।
हरषि-निरखि गावे दास कबीरा ॥
भगवान नृसिंह की इस दिव्य आरती “आरती कीजै नरसिंह कुँवर की” से यदि आपके मन में श्रद्धा, साहस और भक्ति का संचार हुआ हो, तो इस पावन अनुभव को यहीं न रोकें। इसे Like करें, ताकि और भक्तों तक यह आरती पहुँचे। अपने परिवार और मित्रों के साथ Share करें, जिससे भगवान नृसिंह की कृपा सब पर बनी रहे। नीचे Comment में “जय नृसिंह देव” लिखकर अपनी भक्ति और अनुभव अवश्य साझा करें।
भगवान नृसिंह सभी भक्तों की रक्षा करें और आपके जीवन से भय, कष्ट और बाधाएँ दूर करें। जय श्री नृसिंह देव! 🙏