श्री लक्ष्मी जी की आरती का – सार (भावार्थ)
श्री लक्ष्मी माता की आरती माता लक्ष्मी की महिमा, करुणा, शक्ति और उनके सर्वव्यापी स्वरूप को अत्यंत सरल, मधुर और भक्तिभाव से प्रस्तुत करती है। इस आरती में माता को संपूर्ण जगत की जननी, धन-वैभव की अधिष्ठात्री, तथा सुख-शांति और समृद्धि की दात्री के रूप में नमन किया गया है।
आरती की शुरुआत में भक्त माता लक्ष्मी को नित्य सेवित देवी बताते हैं, जिन्हें भगवान विष्णु स्वयं भी निरंतर पूजते हैं। इससे यह भाव प्रकट होता है कि माता लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और सृष्टि-संचालन की मूल शक्ति हैं। उमा, रमा और ब्रह्माणी जैसे नामों के माध्यम से माता के विभिन्न दिव्य रूपों का स्मरण किया गया है, जिनकी स्तुति सूर्य, चंद्रमा और नारद ऋषि जैसे देव व महर्षि भी करते हैं।
आरती में माता को दुर्गा स्वरूपा कहकर यह बताया गया है कि वे केवल कोमलता ही नहीं, बल्कि शक्ति और संरक्षण की प्रतीक भी हैं। जो भक्त श्रद्धा से उनका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि, धन, वैभव और जीवन की सभी आवश्यक सफलताएँ प्राप्त होती हैं। माता लक्ष्मी को पाताल लोक में निवास करने वाली और कर्मों के प्रभाव को उजागर कर भवसागर से पार लगाने वाली देवी बताया गया है, जिससे उनका न्यायकारी और उद्धारक स्वरूप सामने आता है।
यह आरती स्पष्ट करती है कि जिस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है, वहाँ सद्गुण, शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता स्वतः आ जाती है। ऐसे घर में अभाव, भय और अशांति का स्थान नहीं रहता। माता के बिना न यज्ञ पूर्ण होते हैं, न ही जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ—जैसे वस्त्र, अन्न और भोग—संभव हो पाते हैं। अर्थात् जीवन का संपूर्ण वैभव माता लक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त होता है।
माता लक्ष्मी को शुभ गुणों का मंदिर, अत्यंत सुंदर और क्षीरसागर से प्रकट होने वाली देवी कहा गया है। चतुर्दश रत्नों का उल्लेख यह दर्शाता है कि संसार की अमूल्य निधियाँ भी माता की कृपा के बिना किसी को प्राप्त नहीं होतीं। आरती के अंत में यह भाव प्रकट होता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से महालक्ष्मी जी की आरती करता है, उसके हृदय में आनंद भर जाता है और उसके पाप स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
समग्र भाव
यह आरती हमें सिखाती है कि माता लक्ष्मी की सच्ची पूजा केवल धन के लिए नहीं, बल्कि सद्गुण, संतुलित जीवन, कर्म की शुद्धता और आत्मिक शांति के लिए करनी चाहिए। जो भक्त विनम्रता, श्रद्धा और विश्वास से माता का स्मरण करता है, उसके जीवन में स्थायी सुख, समृद्धि और मंगल का वास अवश्य होता है। 🙏
श्री लक्ष्मी माता की आरती – Laxmi Ji Ki Aarti – ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
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जय माता लक्ष्मी 🙏🌸