सरस्वती मां की आरती – Saraswati Mata Ki Aarti

श्री सरस्वती जी की आरती का – सार (भावार्थ)

सरस्वती मां की आरती उन्हें विद्या, ज्ञान, बुद्धि, विवेक और सद्गुणों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में नमन करती है। आरती की शुरुआत में माँ को त्रिभुवन में विख्यात, सद्गुणों से युक्त और वैभवशालिनी बताया गया है, जो अपने भक्तों के जीवन को ज्ञान और संस्कारों से प्रकाशित करती हैं।

माँ सरस्वती को चन्द्रमा के समान उज्ज्वल मुख वाली, कमल आसन पर विराजमान और शुभ हंस पर सवार बताया गया है। उनका स्वरूप मंगलकारी है और उनका तेज अतुलनीय है। हंस विवेक का प्रतीक है, जो सत्य और असत्य में भेद करना सिखाता है—यही माँ सरस्वती की मूल कृपा है।

आरती में माँ के करकमलों में वीणा और माला का वर्णन मिलता है। वीणा मधुर वाणी, कला और संगीत की प्रतीक है, जबकि माला ध्यान, साधना और एकाग्रता को दर्शाती है। उनके शीश पर सुशोभित मुकुट और गले में मोतियों की माला उनके दिव्य और सौम्य स्वरूप को और भी अलंकृत करती है।

यह आरती स्पष्ट करती है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माँ सरस्वती की शरण में आता है, उसका अज्ञान, मोह और मानसिक अंधकार दूर हो जाता है। माँ अपने भक्तों का उद्धार करती हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं। वे विद्या और ज्ञान का प्रकाश देकर जीवन को सार्थक बनाती हैं।

भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करें और उसे ज्ञानचक्षु प्रदान करें, जिससे वह संसार के बंधनों से मुक्त होकर आत्मिक उन्नति कर सके। माँ सरस्वती से यह भी विनती की जाती है कि वे पूरे जगत का कल्याण करें और अज्ञान का नाश करें।

आरती के अंत में यह फलश्रुति दी गई है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से माँ सरस्वती की आरती करता है, उसे ज्ञान, भक्ति, सुख और कल्याण की प्राप्ति होती है। माँ की कृपा से जीवन में विवेक, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।

सरस्वती मां की आरती – Saraswati Mata Ki Aarti

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

जय सरस्वती माता॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

जय सरस्वती माता॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

जय सरस्वती माता॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

जय सरस्वती माता॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

जय सरस्वती माता॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

जय सरस्वती माता॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

जय सरस्वती माता॥

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

जय सरस्वती माता॥


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🙏 जय माँ सरस्वती! माँ आपको विद्या, विवेक, बुद्धि और सद्बुद्धि का वरदान प्रदान करें।

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