श्री गंगा जी की आरती – Shri Gangaji ki Aarti – ॐ जय गंगे माता

श्री गंगा जी की आरती का सार (भावार्थ)

श्री गंगा जी की आरती माँ गंगा की दिव्यता, करुणा और मोक्षदायिनी शक्ति का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करती है। इस आरती में माँ गंगा को समस्त पापों का नाश करने वाली, जीवन को पवित्र करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली माता के रूप में नमन किया गया है।

आरती की शुरुआत में माँ गंगा की महिमा का गुणगान करते हुए कहा गया है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माँ गंगा का ध्यान करता है, उसे अपने जीवन में इच्छित फल की प्राप्ति होती है। माँ गंगा का स्मरण मन को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

माँ गंगा की चंद्रमा के समान शीतल और उज्ज्वल ज्योति का उल्लेख यह दर्शाता है कि उनका पावन जल न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि आत्मा को भी निर्मल बनाता है। जो भी भक्त उनकी शरण में जाता है, वह संसार के दुखों और भवसागर से पार हो जाता है।

आरती में राजा सगर के पुत्रों के उद्धार का स्मरण कर यह बताया गया है कि माँ गंगा की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। उनकी करुणामयी दृष्टि से तीनों लोकों में सुख, शांति और कल्याण का विस्तार होता है। माँ गंगा को सम्पूर्ण सृष्टि का कल्याण करने वाली देवी माना गया है।

यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति एक बार भी सच्चे भाव से माँ गंगा की शरण में आ जाता है, उसके जीवन से मृत्यु का भय, यम का त्रास और पापों का भार समाप्त हो जाता है, और वह परमगति व मोक्ष को प्राप्त करता है।

आरती का समापन इस विश्वास के साथ होता है कि जो श्रद्धालु प्रतिदिन माँ गंगा की आरती करता है, वह सहज रूप से मुक्ति, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। माँ गंगा अपने भक्तों को जीवन और मृत्यु के बंधन से मुक्त कर सनातन सुख प्रदान करती हैं।

श्री गंगा जी की आरती – Shri Gangaji ki Aarti

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥


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🙏 ॐ जय गंगे माता! माँ गंगा आप सभी के जीवन को पवित्रता, शांति और मोक्ष के मार्ग से आलोकित करें।

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