ललिता माता की आरती – Lalita Mata Ki Aarti

ललिता माता की आरती – सार (भावार्थ)

ललिता माता की आरती देवी श्री त्रिपुरेश्वरी के उस परम दिव्य स्वरूप की स्तुति है, जो संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री, करुणा की साक्षात् मूर्ति और आदि शक्ति के रूप में पूजित हैं। यह आरती भक्त के हृदय में श्रद्धा, शरणागति और आत्मिक शांति का संचार करती है तथा माँ की महिमा को सरल, भावपूर्ण शब्दों में प्रकट करती है।

आरती की शुरुआत श्री मातेश्वरी, त्रिपुरेश्वरी और राजेश्वरी के जयकार से होती है। यहाँ माँ को तीनों लोकों पर शासन करने वाली, सर्वोच्च शक्ति और सौंदर्य की अधिष्ठात्री माना गया है। भक्त बार-बार नमस्कार कर माँ के चरणों में अपना पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है।

आगे माता को करुणामयी और सकल पापों का नाश करने वाली बताया गया है। वे अमृत के समान कृपा बरसाने वाली हैं, जो भक्त के जीवन को पवित्र, शीतल और कल्याणकारी बना देती हैं। जो भी उनकी शरण में आता है, उसे माँ सहज ही स्वीकार कर अपने संरक्षण में ले लेती हैं—यही उनकी वात्सल्यपूर्ण महिमा है।

आरती में माँ ललिता को अशुभ शक्तियों का विनाश करने वाली और समस्त सुख प्रदान करने वाली कहा गया है। वे दुष्टों और अधर्मी शक्तियों के समूह का नाश कर धर्म की स्थापना करती हैं। भण्डासुर जैसे महाबली असुर का संहार करने वाली माता का यह स्वरूप उनकी शक्ति, साहस और न्यायप्रियता को दर्शाता है, वहीं उनका करुणामय रूप भक्तों के लिए सदा कोमल और दयालु बना रहता है।

अगले चरण में माता को भवसागर के भय को हरने वाली और सभी कष्टों का निवारण करने वाली बताया गया है। संसार के दुखों से त्रस्त भक्त माँ से शरण और सद्गति की याचना करता है। माँ अपने भक्तों को जीवन के कठिन मार्ग से निकालकर शांति और सुरक्षा का आश्रय प्रदान करती हैं।

आरती में माँ को शिव भामिनी कहा गया है, जो भगवान शिव की शक्ति और चेतना का स्वरूप हैं। वे साधकों के मन को हर लेने वाली, साधना में स्थिरता देने वाली और आदि शक्ति के रूप में सृष्टि के मूल कारण की प्रतीक हैं। त्रिपुर सुन्दरी के रूप में उनका सौंदर्य केवल बाहरी नहीं, बल्कि ज्ञान, शक्ति और करुणा से युक्त दिव्य सौंदर्य है।

अंत में पुनः माँ त्रिपुरेश्वरी और राजेश्वरी की वंदना की जाती है, जिससे यह भाव प्रकट होता है कि वही माँ सम्पूर्ण ब्रह्मांड की शासिका, रक्षक और पालनकर्ता हैं।

सार रूप में

ललिता माता की यह आरती करुणा, शक्ति और शरणागति का अद्भुत संगम है। यह आरती भक्त को यह विश्वास दिलाती है कि माँ की शरण में आने वाला कोई भी प्राणी दुखी नहीं रहता। इसका नियमित पाठ भय, कष्ट और नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
जय श्री ललिता त्रिपुर सुन्दरी माता! 🌸🙏

ललिता माता की आरती – Lalita Mata Ki Aarti

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥

करुणामयी सकल अघ हारिणी।
अमृत वर्षिणी नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।
खल-दल नाशिनी नमो नमः॥

भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।
करुणा कलिते नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी।
शरण गति दो नमो नमः॥

शिव भामिनी साधक मन हारिणी।
आदि शक्ति जय नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥


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जय श्री ललिता त्रिपुर सुन्दरी माता! 🌺🙏

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