राधा रानी की आरती – Radha Rani Ki Aarti – आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की

राधा रानी की आरती – सार (भावार्थ)

राधा रानी की आरती श्रीवृषभानुनंदिनी राधा के उस दिव्य स्वरूप का भावपूर्ण स्तवन है, जिसमें प्रेम, करुणा, विवेक और आध्यात्मिक सौंदर्य का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यह आरती राधा रानी को केवल श्रीकृष्ण की प्रेयसी नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और शक्ति की सर्वोच्च अधिष्ठात्री के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

आरती की शुरुआत राधा रानी की मंजुल और मोहक मूर्ति के स्मरण से होती है, जो ममता और करुणा से परिपूर्ण है। वे संसार के त्रिविध ताप—आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक कष्टों का नाश करने वाली हैं। उनकी कृपा से भक्त के भीतर निर्मल विवेक और वैराग्य का विकास होता है, जिससे जीवन का वास्तविक लक्ष्य स्पष्ट होता है।

आगे राधा रानी को प्रभु श्रीकृष्ण के चरणों की पावन प्रीति को प्रकाशित करने वाली बताया गया है। उनका सौंदर्य केवल बाह्य रूप तक सीमित नहीं, बल्कि वह आत्मिक सौंदर्य है, जो मन और हृदय को शुद्ध कर देता है। उनकी छवि इतनी सुन्दरतम है कि वह स्वयं सौंदर्य की परिभाषा बन जाती है।

आरती में राधा रानी के मधुर, मनोहर और मोहक स्वरूप का वर्णन है, जो मुनियों के मन को भी आकर्षित कर लेता है। वे अविरल प्रेम के अमृत रस को निरंतर प्रदान करने वाली हैं। सखी ललिता जी के साथ उनकी निकटता यह दर्शाती है कि राधा रानी शुद्ध सख्य और निष्काम प्रेम की मूर्ति हैं, जहाँ अहंकार का कोई स्थान नहीं।

राधा रानी को संतों और सत्-मुनियों द्वारा निरंतर सेवित बताया गया है। उनके दिव्य गुण अनंत और अमित हैं। वे श्रीकृष्ण के तन-मन को भी आकृष्ट करने वाली हैं—यह संकेत है कि भक्ति में राधा तत्व सर्वोपरि है। उनकी समता और दिव्यता को अमूल्य सम्पत्ति कहा गया है, जो साधक के जीवन को धन्य बना देती है।

आरती के अंतिम भावों में राधा रानी को कृष्णात्मिका—अर्थात श्रीकृष्ण के ही आत्मस्वरूप—के रूप में नमन किया गया है। वे वृन्दावन की चिन्मय लीलाओं में विहार करने वाली, जगत्जननी और संसार के दुखों को हरने वाली हैं। वे आदि-अनादि शक्ति हैं, जिनकी विभुता से संपूर्ण सृष्टि संचालित होती है।

सार रूप में

राधा रानी की यह आरती प्रेम-भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का पावन संदेश देती है। यह भक्त को सिखाती है कि राधा तत्व के बिना कृष्ण भक्ति अपूर्ण है। इस आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से हृदय में निर्मल प्रेम, शांति और दिव्य आनंद का संचार होता है।
जय श्री राधे! 🌸🙏

राधा रानी की आरती – Radha Rani Ki Aarti

आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की।
त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की॥

आरती श्री वृषभानुसुता की …..॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि।
अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की॥

आरती श्री वृषभानुसुता की …..॥

संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी।
आकर्षिणी कृष्ण तन मन की, अति अमूल्य सम्पति समता की॥

आरती श्री वृषभानुसुता की …..॥

कृष्णात्मिका कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि।
जगज्जननि जग दुःखनिवारिणि, आदि अनादि शक्ति विभुता की॥

आरती श्री वृषभानुसुता की …..॥


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जय श्री राधे! 🌸🙏

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