शाकम्भरी देवी की आरती – सार (भावार्थ)
शाकम्भरी देवी की आरती माँ शाकम्भरी के उस करुणामयी और पालनकर्त्री स्वरूप का गुणगान है, जो सृष्टि की आदि शक्ति होकर समस्त प्राणियों के जीवन का आधार हैं। इस आरती में भक्त माँ के दिव्य रूप को हृदय में धारण कर उनकी दया, कृपा और सर्वव्यापकता का अनुभव करता है।
आरती का आरंभ माँ शाकम्भरी के अद्भुत और अलौकिक स्वरूप के स्मरण से होता है। भक्त से निवेदन किया जाता है कि वह माँ के उस दिव्य रूप को अपने हृदय में बसाए और शताक्षी दयालु माता की आरती करे, जो सदा करुणा से संसार को देखती हैं और सभी के कष्टों का निवारण करती हैं।
आगे माँ को आदि भवानी और परिपूर्ण शक्ति बताया गया है। वे प्रत्येक घट में विद्यमान हैं और स्वयं ही अपनी महिमा का विस्तार करती हैं। अर्थात् यह सृष्टि, उसका पालन और संरक्षण सब कुछ माँ शाकम्भरी की ही लीला है।
आरती में स्पष्ट किया गया है कि माँ ही शाकम्भरी हैं, जो अकाल के समय साग-शाक और वनस्पति उत्पन्न कर जीवों की रक्षा करती हैं, और वही शताक्षी भी हैं—हजारों नेत्रों से संसार की पीड़ा को देखने वाली करुणामयी शक्ति। उन्हें शिव-मूर्ति माया और प्रकाश स्वरूप कहा गया है, जिससे यह संदेश मिलता है कि माँ शिव-शक्ति की अभिन्न अभिव्यक्ति हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाली हैं।
आरती का अगला भाव भक्तों के लिए अत्यंत आश्वस्तिदायक है। जो नित्य श्रद्धा से स्त्री-पुरुष माँ शाकम्भरी की आरती गाते हैं, माँ उनकी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं और उन्हें अपने दर्शन का सौभाग्य प्रदान करती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि माँ की भक्ति सरल है और उनका स्नेह सभी पर समान रूप से बरसता है।
अंत में कहा गया है कि जो व्यक्ति आरती पढ़ता, पढ़वाता, सुनता या सुनवाता है, वह माँ शाकम्भरी की विशेष कृपा प्राप्त करता है और उसे बैकुण्ठ तुल्य लोक की प्राप्ति होती है। अर्थात् यह आरती केवल सांसारिक सुख ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
सार रूप में
शाकम्भरी देवी की यह आरती माँ को जीवनदायिनी, पालनकर्त्री, करुणामयी और मोक्षदायिनी शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करती है। श्रद्धा और विश्वास से की गई इसकी आराधना से भक्त के जीवन में अन्न, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक आनंद का वास होता है।
जय श्री शाकम्भरी माता! 🌿🙏
शाकम्भरी देवी की आरती – Shaankbhari Mata Ki Aarti
हरि ॐ श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
ऐसो अद्भुत रूप हृदय धर लीजो, शताक्षी दयालु की आरती कीजो।
तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप बखानी माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
तुम्हीं हो शाकम्भरी, तुम ही हो शताक्षी माँ।
शिव मूर्ति माया, तुम ही हो प्रकाशी माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
नित जो नर-नारीअम्बे, आरती गावे माँ,
इच्छा पूरण कीजो, शाकम्भरी दर्शन पावे माँ।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ, जो नर आरती सुने सुनावे माँ।
बसे बैकुण्ठ शाकम्भर दर्शन पावे।
श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।
यदि शाकम्भरी देवी की आरती का यह सार आपको भक्ति और शांति का अनुभव कराए, तो कृपया इसे शेयर करें। माँ शाकम्भरी से जुड़ा आपका भाव या अनुभव नीचे कमेंट में लिखें। ऐसी ही पावन आरतियाँ और भक्ति सामग्री के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो/सब्सक्राइब करें। 🌿✨