खाटू श्याम जी की आरती – Khatu Shyam Ji Ki Aarti

खाटू श्याम जी की आरती का – सार (भावार्थ)

खाटू श्याम जी की आरती भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम, श्रद्धा और विश्वास का सुंदर प्रतीक है। इसमें बाबा श्याम को “श्री श्याम हरे” कहकर संबोधित किया गया है, जो संसार के सभी दुखों को हर लेने वाले, भक्तों के कष्टों का नाश करने वाले और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले देव के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आरती की शुरुआत ही खाटू धाम में विराजमान उनके अनुपम, दिव्य और मनोहर स्वरूप के स्मरण से होती है, जहाँ भक्त दूर-दूर से आकर उनके दर्शन करते हैं।

आरती में बाबा के भव्य रूप का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण है—रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान श्याम प्रभु, सिर पर चंवर ढुलते हुए, केसरिया वस्त्रों में सुसज्जित, कानों में कुंडल, गले में पुष्पों की माला और मस्तक पर मुकुट धारण किए हुए। यह वर्णन दर्शाता है कि श्याम बाबा केवल दयालु ही नहीं, बल्कि दिव्यता, वैभव और सौंदर्य के प्रतीक भी हैं। दीपक की ज्योति, धूप-अग्नि, शंख-नाद और भजन-कीर्तन के साथ की गई आरती वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

भोग के माध्यम से भक्तों की निष्काम सेवा और समर्पण का भाव झलकता है—मोदक, खीर, चूरमा और सुवर्ण थाल में सजा प्रसाद अर्पित कर भक्त अपने प्रेम और कृतज्ञता को प्रकट करते हैं। झांझ, मृदंग, शंख और घंटियों की ध्वनि के साथ गायी गई आरती यह दर्शाती है कि श्याम बाबा की उपासना केवल शब्दों से नहीं, बल्कि हृदय की भावना और कर्म की पवित्रता से होती है।

आरती का मुख्य संदेश यह है कि जो भक्त श्रद्धा से बाबा का ध्यान करता है, उसे जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। श्याम नाम का निरंतर स्मरण करने से मन को शांति, जीवन को दिशा और भक्त को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। अंत में यह विश्वास दृढ़ किया गया है कि श्याम प्रभु अपने सच्चे सेवकों के सभी कार्य पूर्ण करते हैं और उन्हें कभी निराश नहीं करते।

सार रूप में, यह आरती खाटू श्याम जी की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप, भक्तवत्सलता और कल्याणकारी शक्ति का भावपूर्ण वर्णन है। यह भक्त को यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति, निष्ठा और सेवा से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और श्याम बाबा की कृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

खाटू श्याम जी की आरती – Khatu Shyam Ji Ki Aarti

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।


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