शिरडी साईं बाबा की आरती – Shirdi Sai Baba Ki Aarti

शिरडी साईं बाबा की आरती का – सार (भावार्थ)

शिरडी साईं बाबा की आरती भक्तों के लिए केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा और आत्मिक शांति का सशक्त माध्यम है। यह आरती साईं बाबा को परमानंद स्वरूप, दयालु गुरु और संकट हरने वाले अवतार के रूप में प्रस्तुत करती है, जिनकी कृपा से जीवन में सुख, समाधान और स्थिरता आती है।

आरती की शुरुआत साईं बाबा को ऐसे महान गुरु के रूप में नमन करती है, जिनकी कृपा दुःख, शोक, भय और विपत्तियों को दूर करने वाली है। यह बताती है कि बाबा की शरण में आने वाला कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता। शिरडी में अवतरित होकर उन्होंने अपने चमत्कारों और साधारण जीवन से गूढ़ सत्य को प्रकट किया, जिससे असंख्य श्रद्धालुओं का जीवन बदल गया।

इस आरती का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि भक्त जैसा भाव लेकर साईं बाबा का स्मरण करता है, वैसा ही अनुभव उसे प्राप्त होता है। सच्चे मन से की गई भक्ति आत्मा को शांति देती है। बाबा की उदी को केवल भस्म नहीं, बल्कि आध्यात्मिक औषधि माना गया है, जो मन को समाधान और जीवन को संतुलन प्रदान करती है।

आरती आगे यह स्पष्ट करती है कि जो व्यक्ति साईं नाम का नियमित जप करता है, उसे संसार में स्थायी फल, मानसिक स्थिरता और ईश्वरीय संरक्षण प्राप्त होता है। विशेष रूप से गुरुवार को की गई पूजा-सेवा बाबा की विशेष कृपा का माध्यम मानी गई है, जिससे भक्त के कार्य सिद्ध होते हैं और जीवन में शुभता का संचार होता है।

साईं बाबा को राम, कृष्ण और हनुमान जैसे दिव्य रूपों में अनुभव करने की भावना आरती में प्रकट होती है, जो उनके सार्वभौमिक स्वरूप को दर्शाती है। यही कारण है कि विभिन्न धर्मों के अनुयायी उनकी शरण में आते हैं और अपनी-अपनी आस्था के अनुसार मनचाहा फल पाते हैं। यह आरती साईं बाबा को धर्म, जाति और संप्रदाय से परे एक करुणामय सद्गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

अंत में, आरती यह संदेश देती है कि जो भक्त श्रद्धा से इस स्तुति का गान करता है, उसके घर में सुख, मंगल और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। साईं बाबा की भक्ति जीवन को सरल, शांत और ईश्वर से जुड़ा हुआ बना देती है।

शिरडी साईं बाबा की आरती – Shirdi Sai Baba Ki Aarti

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।
जा की कृपा विपुल सुखकारी,दुःख शोक, संकट, भयहारी॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।

शिरडी में अवतार रचाया,चमत्कार से तत्व दिखाया।
कितने भक्त चरण पर आये,वे सुख शान्ति चिरंतन पाये॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।

भाव धरै जो मन में जैसा,पावत अनुभव वो ही वैसा।
गुरु की उदी लगावे तन को,समाधान लाभत उस मन को॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।

साईं नाम सदा जो गावे,सो फल जग में शाश्वत पावे।
गुरुवासर करि पूजा-सेवा,उस पर कृपा करत गुरुदेवा॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।

राम, कृष्ण, हनुमान रुप में,दे दर्शन, जानत जो मन में।
विविध धर्म के सेवक आते,दर्शन कर इच्छित फल पाते॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।

जै बोलो साईं बाबा की,जै बोलो अवधूत गुरु की।
‘साईंदास’ आरती को गावै,घर में बसि सुख, मंगल पावे॥

आरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की।


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