श्री मनसा देवी की आरती – Shree Mansa Devi Ki Aarti

श्री मनसा देवी की आरती का – सार (भावार्थ)

मनसा देवी की यह आरती सर्प-शक्ति, करुणा और कल्याण की अधिष्ठात्री देवी श्री मनसा माता की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करती है। आरती का मूल संदेश यह है कि जो भक्त श्रद्धा और एकाग्रता से मनसा माता का ध्यान करता है, उसे मनवांछित फल प्राप्त होते हैं। माता की उपासना भय, बाधा और असुरक्षा से मुक्त कर जीवन को स्थिरता, सुरक्षा और आशीर्वाद से भर देती है।

आरती में माता की दिव्य वंशावली और पहचान स्पष्ट की गई है—वे जरत्कारु मुनि की पत्नी, नागराज वासुकि की बहन, महर्षि कश्यप की कन्या और आस्तिक की माता हैं। यह वंश परंपरा मनसा देवी को नाग-तत्त्व से जोड़ती है और बताती है कि वे सर्प-भय से रक्षा करने वाली, विष-नाशिनी और लोककल्याणकारी शक्ति हैं। इस संदर्भ से माता का संरक्षण-स्वरूप उभरकर आता है, जो अपने भक्तों को अनिष्ट से बचाती हैं।

आगे आरती में माता को “गर्व धन्वन्तरि नाशिनी” कहा गया है—अर्थात् वे अहंकार और अज्ञान का विनाश करती हैं तथा आरोग्य और संतुलन प्रदान करती हैं। उन्हें “हंसवाहिनी देवी” के रूप में स्मरण किया गया है, जो विवेक, पवित्रता और आत्मज्ञान का प्रतीक है। यही कारण है कि देव, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी उनका ध्यान करते हैं और नर-नारी समान भाव से उनकी सेवा करते हैं। यह माता के सार्वभौमिक करुणामय स्वरूप को दर्शाता है।

आरती में माता के निवास और कार्य-स्वरूप का भी सुंदर वर्णन है—वे पर्वतवासिनी, संकट-नाशिनी और अक्षय धनदात्री हैं। अर्थात् वे कठिन परिस्थितियों में आश्रय देती हैं, कष्टों का निवारण करती हैं और भक्तों को ऐसी समृद्धि प्रदान करती हैं जो स्थायी और मंगलकारी हो। साथ ही उन्हें पुत्र-पौत्रादि प्रदायिनी कहा गया है, जो परिवार, वंश और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति तथा संतति-सुख का आशीर्वाद देती हैं। इस प्रकार मनसा माता भौतिक और आध्यात्मिक—दोनों स्तरों पर मनवांछित फल देने वाली देवी के रूप में प्रतिष्ठित होती हैं।

अंतिम पंक्तियों में आरती-पाठ का फल बताया गया है—जो कोई भी भक्ति-भाव से मनसा देवी की आरती गाता है, उसे सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है। यहाँ “सुख-संपत्ति” केवल धन तक सीमित नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा, पारिवारिक शांति, भय-मुक्ति और आत्मिक संतोष का समन्वय है। लेखक (शिवानंद स्वामी) के माध्यम से यह विश्वास दृढ़ किया गया है कि नियमित उपासना से माता की कृपा अवश्य मिलती है।

श्री मनसा देवी की यह आरती सुरक्षा, करुणा, आरोग्य और समृद्धि का दिव्य संदेश देती है। यह सिखाती है कि माता की शरण में आने से सर्प-भय, संकट, अहंकार और अभाव का नाश होता है, तथा जीवन में विवेक, संतति-सुख, अक्षय ऐश्वर्य और आंतरिक शांति का उदय होता है। जो भक्त नियमित श्रद्धा और समर्पण के साथ इस आरती का पाठ करता है, वह अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ-साथ एक संतुलित, सुरक्षित और मंगलमय जीवन की ओर अग्रसर होता है।

श्री मनसा देवी की आरती – Shree Mansa Devi Ki Aarti

ॐ जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता…
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
॥ ॐ जय मनसा माता ॥

जरत्कारु मुनि पत्नी, तुम वासुकि भगिनी…
कश्यप की तुम कन्या, आस्तिक की माता ॥
॥ ॐ जय मनसा माता ॥

गर्व धन्वन्तरि नाशिनी, हंशवाहिनी देवी…
सुर-नर-मुनि-गण ध्यावत, सेवत नरनारी ॥
॥ ॐ जय मनसा माता ॥

पर्वतवासिनी संकटनाशिनी, अक्षय धनदात्री…
पुत्र पौत्रादि प्रदायिनी, मनवांछित फलदात्री ॥
ॐ जय मनसा माता…

मनसा जी की आरती, जो कोई नर गाता…
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पाता ॥
॥ ॐ जय मनसा माता ॥


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