माँ ज्वाला देवी की आरती – Jwala Mata Ki Aarti

माँ ज्वाला देवी की आरती का – सार (भावार्थ)

यह आरती माँ ज्वाला देवी की करुणा, शक्ति और दिव्य ज्योति का भावपूर्ण गुणगान है। आरती का मूल संदेश यह है कि माँ का अर्चन (पूजन) और सुमिरण (स्मरण) जीवन के कष्टों का नाश करता है और मन को शांति, सुख तथा आश्वासन प्रदान करता है। माँ ज्वाला को यहाँ दुखहर्ता और सुखदायिनी के रूप में नमन किया गया है—जो अपने भक्तों को संकटों से उबारकर मंगलमय मार्ग पर ले जाती हैं।

आरती में माँ की अटल और अखंड ज्योति का वर्णन है, जो युगों से निरंतर प्रज्वलित है। यह ज्योति केवल प्रकाश नहीं, बल्कि दिव्य चेतना और संरक्षण की प्रतीक है। ऋषि-मुनि, देवता और सामान्य जन—सबको माँ अत्यंत प्रिय हैं, क्योंकि उनकी उपस्थिति में भय मिटता है और आशा जागती है।

माँ को पार्वती-स्वरूप शिवशक्ति, अम्बे, और जगदम्बा कहा गया है—अर्थात् वे शिव-शक्ति की अभिन्न अभिव्यक्ति हैं और त्रिलोक के देवता भी उनकी उपासना करते हैं। यह भाव बताता है कि ज्वाला देवी केवल एक स्थान की देवी नहीं, बल्कि सर्वव्यापी आदिशक्ति हैं, जो सृष्टि के संतुलन और धर्म की रक्षा करती हैं।

आरती में यह भी कहा गया है कि माँ की ज्योति के आगे लाखों सूरज भी फीके पड़ जाते हैं। उनके चिंतन से भव-भय (सांसारिक भय) दूर होता है। जो भक्त श्रद्धा से उनके द्वार आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता—उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह माँ की भक्तवत्सलता को उजागर करता है।

माँ ज्वाला को दुर्गति-नाशिनी चंडिका, दानव-दलनी और दीन-हीनों की रक्षक बताया गया है। वे अधर्म और अन्याय का विनाश करती हैं, साथ ही पीड़ितों को सुरक्षा और सुख देती हैं। उनके द्वार पर आठों सिद्धियाँ सुलभ हैं—अर्थात् आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों प्रकार की सिद्धियाँ उनकी कृपा से प्राप्त होती हैं। बड़े-बड़े दानवीर भी माँ से ही दान पाते हैं—यह संकेत है कि समस्त ऐश्वर्य का स्रोत वही हैं।

भक्त ध्यानु की कथा के माध्यम से आरती यह बताती है कि सच्ची भक्ति में आत्म-समर्पण सर्वोपरि है—माँ के चरण-कमलों में नतमस्तक होकर, उनकी धुन में खोकर भक्त अपने अहंकार का त्याग करता है और दिव्य रस का अनुभव करता है। माँ असंभव को संभव बनाती हैं और सुख-रत्नों से भक्तों की झोलियाँ भर देती हैं

पूजा-विधि में धूप, दीप, पुष्प से अभिषेक का उल्लेख है—जो बताता है कि माँ सरल भक्ति से प्रसन्न होती हैं। उनके दर पर रंक भी राजा बनते देखे गए हैं—अर्थात् वे भाग्य, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्रदान करती हैं। माँ को अष्टभुजी सिंह-वाहिनी रुद्राणी कहा गया है, जो शक्ति, साहस और न्याय का प्रतीक है, और भक्तों को धन, वैभव और यश का आशीर्वाद देती हैं।

आरती में उन अभिमानी राजाओं का प्रसंग भी है जो माँ की ज्योति बुझाने आए, परंतु माँ की दिव्य शक्ति के आगे हार गए। यह सिखाता है कि अहंकार टिकता नहीं; भक्ति और सत्य ही विजयी होते हैं। अंत में कहा गया है कि जो भी भक्त श्रद्धा से माँ ज्वाला की आरती गाता है, वह भव-बंधन से तर जाता है—अर्थात् जीवन के दुःख, भय और बंधनों से मुक्त होकर शांति और मोक्ष-मार्ग की ओर बढ़ता है।

माँ ज्वाला देवी की यह आरती अखंड ज्योति, करुणा, संरक्षण और शक्ति का दिव्य संदेश देती है। यह सिखाती है कि माँ की शरण में आने से कष्टों का नाश, भय से मुक्ति, सिद्धि-समृद्धि की प्राप्ति और जीवन में संतुलन मिलता है। जो भक्त नियमित श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में सुख, सुरक्षा, यश और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है।

माँ ज्वाला देवी की आरती – Jwala Mata Ki Aarti

ॐ जय ज्वाला माई, मैय्या जय ज्वाला माई ।
कष्ट हरण तेरा अर्चन, सुमिरण सुख दाई ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

मैय्या जय ज्वाला माई, मैय्या जय ज्वाला माई ।
कष्ट हरण तेरा अर्चन, सुमिरण सुख दाई ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

अटल अखंड तेरी ज्योति, युग युग से ही जगे ।
ऋषि मुनि सुर नर सबको, बड़ी प्यारी माँ लागे ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

पार्वती रूप शिव शक्ति, तू ही माँ अम्बे ।
पूजे तुम्हे त्रिभुवन के, देवता जगदम्बे ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

लाखों सूरज फीके, ज्योति तेरी आगे ।
तेरे चिंतन से माँ, भवका भय भागे ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

चरण शरण में चल के, जो तेरे द्वारे आये ।
खाली कभी न जाए, वांछित फल पाए ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

दुर्गति नाशक चंडिका, तू दानव दलनी ।
दिन हिन् की रक्षक तू ही सुख करनी ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

आठों सिद्धियाँ तेरे, द्वार भरे पानी ।
दान माँ तुझसे लेते, बड़े बड़े महादानी ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

चरण कमल तेरी धोकर, ध्यानु ने रस था पिया ।
तेरी धुन में खोकर, शीश तेरे भेंट किया ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

भक्तों के काज असंभव, संभव तू करती ।
सुख रत्नों से सबकी, झोलियाँ तू भरती ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

धुप दीप पुष्पों से, होए तेरा अभिषेक ।
तेरे दर रंक को राजा, बनते हुए देखा ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

अष्ट भुजी सिंह वाहिनी, तू माँ रुद्राणी ।
धन वैभव यश देना, हमको महारानी ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

ज्योति बुझाने आये, राजे अभिमानी ।
हार गए वो तुमसे, मूढ़ मति अज्ञानी ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

माई ज्वाला तेरी आरती, श्रद्धा से जो गाये ।
वो निर्दोष उपासक, भव से तर जाए ॥

ॐ जय ज्वाला माई…

ॐ जय ज्वाला माई, मैय्या जय ज्वाला माई ।
कष्ट हरण तेरा अर्चन, सुमिरण सुखदायी ॥

ॐ जय ज्वाला माई…


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