बाबा बालक नाथ आरती – Baba Balaknath Aarti

बाबा बालक नाथ जी की आरती का सार (भावार्थ)

यह आरती बाबा बालक नाथ जी के वैराग्य, करुणा और भक्त-वत्सल स्वरूप का मधुर गुणगान करती है। उन्हें “कलाधारी” और “पौणाहारी” कहकर स्मरण किया गया है—अर्थात् वे सिद्ध योगी, तपस्वी और दाता हैं, जो भक्तों की जीवन-नैया को भवसागर से पार लगाते हैं। आरती का मूल भाव यही है कि बाबा का आश्रय मिलने पर भय, दुख और संसार के बंधन स्वतः दूर होने लगते हैं।

आरती में बाबा को बाल्यावस्था में भी महान योगी बताया गया है—उनका नाम “बालक नाथ” उनकी निष्कलंकता, सरलता और अलौकिकता का प्रतीक है। शंकर से जुड़ी अमर-कथा के उल्लेख से यह भाव प्रकट होता है कि बाबा शिव-भक्ति में लीन होकर अमरत्व की अनुभूति कराते हैं—अर्थात् वे अपने भक्तों को सांसारिक भय से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं।

उनके तपस्वी स्वरूप का सजीव चित्र मिलता है—शीश पर सुनहरे जटाजूट, गले में रुद्राक्ष माला, हाथ में झोली और चिमटा, तथा मृगछाला पर आसन। यह वैराग्य, संयम और साधना का प्रतीक है। उनके साथ वर्णित सेली-सिंगी और “वैरागन” का भाव यह दर्शाता है कि बाबा सांसारिक आकर्षण से परे रहकर भक्ति, सेवा और करुणा में रमण करते हैं।

आरती में बाबा को गऊ-पालक और रखवाला कहा गया है—अर्थात् वे करुणा, संरक्षण और लोक-कल्याण के प्रतीक हैं। “अंग भभूत रमाई” और “भय भज्जन, दुःख नाशक” जैसे भाव उनके कष्ट-हरण और संकट-निवारण स्वरूप को रेखांकित करते हैं। “भरथरी के संगी” का उल्लेख बाबा के वैराग्य और साधना परंपरा से उनके संबंध को दर्शाता है।

पूजन-विधि का भी सुंदर वर्णन है—रविवार को रोट, फल, फूल, मिश्री, मेवा, तथा धूप-दीप से की गई आराधना को आनंददायक और सिद्धिदायक बताया गया है। यह संकेत देता है कि सरल, सच्ची और श्रद्धापूर्ण भक्ति बाबा को अत्यंत प्रिय है।

आरती में यह भी कहा गया है कि बाबा ने भक्तों के हित में अवतार लिया—वे दुष्ट प्रवृत्तियों का दमन करते हैं, शत्रुओं से रक्षा करते हैं और सभी के प्रतिपालक हैं। अंत में स्पष्ट फलादेश है कि जो भक्त नित्य श्रद्धा से बाबा बालक नाथ जी की आरती करता है, उसे मनवांछित फल प्राप्त होते हैं और जीवन में शांति, सुरक्षा व मंगल का संचार होता है।

“बाबा बालक नाथ जी की आरती” हमें सिखाती है कि बाबा वैराग्य, करुणा और कृपा के साकार रूप हैं। उनकी भक्ति से भय और दुःख का नाश, संकटों से रक्षा और आध्यात्मिक शांति मिलती है। जो भक्त प्रेम, विश्वास और नियमित साधना के साथ उनकी आराधना करता है, उसकी जीवन-नैया निश्चित रूप से भवसागर से पार लगती है।

बाबा बालक नाथ आरती – Baba Balaknath Aarti

ॐ जय कलाधारी हरे,
स्वामी जय पौणाहारी हरे,
भक्त जनों की नैया,
दस जनों की नैया,
भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

बालक उमर सुहानी,
नाम बालक नाथा,
अमर हुए शंकर से,
सुन के अमर गाथा ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

शीश पे बाल सुनैहरी,
गले रुद्राक्षी माला,
हाथ में झोली चिमटा,
आसन मृगशाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

सुंदर सेली सिंगी,
वैरागन सोहे,
गऊ पालक रखवालक,
भगतन मन मोहे ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

अंग भभूत रमाई,
मूर्ति प्रभु रंगी,
भय भज्जन दुःख नाशक,
भरथरी के संगी ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

रोट चढ़त रविवार को,
फल, फूल मिश्री मेवा,
धुप दीप कुदनुं से,
आनंद सिद्ध देवा ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

भक्तन हित अवतार लियो,
प्रभु देख के कल्लू काला,
दुष्ट दमन शत्रुहन,
सबके प्रतिपाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

श्री बालक नाथ जी की आरती,
जो कोई नित गावे,
कहते है सेवक तेरे,
मन वाच्छित फल पावे ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

ॐ जय कलाधारी हरे,
स्वामी जय पौणाहारी हरे,
भक्त जनों की नैया,
भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे ॥


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