नवग्रह की आरती का – सार (भावार्थ)
नवग्रह की आरती सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—इन नौ ग्रह शक्तियों की सामूहिक उपासना है। आरती का मूल भाव यह है कि यदि नवग्रह प्रसन्न हों, तो मनुष्य के जीवन से बाधाएँ, कष्ट, रोग और नकारात्मक प्रभाव स्वतः दूर हो जाते हैं और जीवन संतुलन व शांति की ओर अग्रसर होता है।
आरती में सबसे पहले सूर्य देव की महिमा का वर्णन है, जो जीवन को तेज, ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से मनुष्य का आत्मविश्वास बना रहता है और जीवन में स्थायित्व आता है। इसके बाद चंद्र देव को शीतलता, मानसिक शांति, प्रेम और करुणा का स्रोत बताया गया है, जो मन को शांत कर भावनात्मक संतुलन प्रदान करते हैं।
मंगल ग्रह को अमंगल का नाश करने वाला कहा गया है—जो साहस, पराक्रम और शक्ति देता है तथा जीवन में आने वाले संघर्षों को जीतने की क्षमता प्रदान करता है। बुध ग्रह बुद्धि, वैभव, वाणी और व्यापार का कारक है; उसकी कृपा से सुख-सम्पत्ति और लक्ष्मी का वास होता है।
आरती में गुरु (बृहस्पति) को विद्या, ज्ञान, बुद्धि और सही मार्गदर्शन का दाता माना गया है। गुरु की कृपा से मानव जीवन में प्रगति, नैतिकता और सही निर्णय लेने की शक्ति आती है। शुक्र ग्रह कला, विज्ञान, तर्क, सौंदर्य और भौतिक सुखों का प्रतीक है—जो धर्म, सेवा और यश को बढ़ाने में सहायक होता है।
शनि देव को न्याय के अधिष्ठाता के रूप में स्मरण किया गया है। उनकी उपासना जप, तप और श्रद्धा से करने पर वे अनुशासन, धैर्य और कर्मफल में संतुलन प्रदान करते हैं। राहु को भ्रम और गलत दिशा से बचाने वाला माना गया है, जो मन को कुकर्मों से दूर रखता है। वहीं केतु उत्तम स्वास्थ्य, वैराग्य और आत्मिक चेतना को बढ़ाने वाला ग्रह है, जो मन को पराधीनता और अशांति से मुक्त करता है।
“नवग्रह की आरती” हमें यह सिखाती है कि जीवन की अनेक समस्याएँ ग्रहों के असंतुलन से उत्पन्न होती हैं, और उनकी सामूहिक उपासना से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में ग्रहदोष शांत होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवग्रह की आरती – Navgrah Ki Aarti
आरती श्री नवग्रहों की कीजै,
बाध, कष्ट,रोग,हर लीजै ।
सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर,
जाकी कृपा कबहु नहिं छीजै।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
रुप चंद्र शीतलता लायें,
शांति स्नेह सरस रसु भीजै।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
मंगल हरे अमंगल सारा,
सौम्य सुधा रस अमृत पीजै ।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
बुद्ध सदा वैभव यश लीये,
सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो,
प्रगति सदा मानव पै रीझे।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
शुक्र तर्क विज्ञान बढावै,
देश धर्म सेवा यश लीजे ।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
न्यायधीश शनि अति ज्यारे,
जप तप श्रद्धा शनि को दीजै ।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
राहु मन का भरम हरावे,
साथ न कबहु कुकर्म न दीजै ।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥
स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै,
पराधीनता मनहित खीजै ।
आरती श्री नवग्रहों की कीजै..॥