कैला माता की आरती का – सार (भावार्थ)
कैला माता की आरती माँ कैला रानी के दिव्य, करुणामय और शक्तिस्वरूप का भावपूर्ण गुणगान है। आरती की शुरुआत में माँ को अखंड ज्योति की अधिष्ठात्री और सम्पूर्ण जगत को जानने वाली देवी कहा गया है। यह भाव दर्शाता है कि माँ कैला रानी का प्रकाश कभी क्षीण नहीं होता और उनकी चेतना हर जीव के जीवन को आलोकित करती है।
आरती में माँ को शक्ति भवानी और मनवांछित फल देने वाली बताया गया है। उनका रूप अद्भुत, अलौकिक और सदानंदमय है, जो भक्तों के मन में शांति, विश्वास और आनंद भर देता है। जो भी सच्चे मन से माँ की आराधना करता है, उसकी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
माँ कैला रानी के त्रिकूट पर्वत पर चामुंडा माता के साथ विराजमान होने का उल्लेख उनके शक्तिशाली और रक्षक स्वरूप को दर्शाता है। यहाँ माँ को पापों का नाश करने वाली और भक्तों को पावन गंगा समान शुद्ध करने वाली बताया गया है। यह संकेत करता है कि माँ की शरण में आने से आत्मा निर्मल हो जाती है।
आरती में भक्त बहोरा का उल्लेख है, जो माँ के द्वार पर निवास कर उनकी सेवा और अगवानी करता है। मंदिर में फहराती लाल ध्वजा माँ के राजसी वैभव और शक्ति का प्रतीक है, जो आकाश को स्पर्श करती प्रतीत होती है। यह माँ के ऐश्वर्य और प्रभुत्व को दर्शाता है।
माँ के भवन में नौबत और शंखनाद की गूंज, तथा जोगनों का गान और नृत्य, सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय और दिव्य बना देता है। यह दृश्य दर्शाता है कि माँ कैला रानी के धाम में हर क्षण उत्सव, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
ध्वजा, नारियल, रोली, पान और सुपारी जैसे पारंपरिक पूजन-सामग्री का उल्लेख यह बताता है कि जो भक्त प्रेम और श्रद्धा से ये अर्पण लेकर आता है, माँ उसकी भक्ति स्वीकार करती हैं। माँ के दर्शन और स्पर्श (पार्श) से भक्त को मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है और उसका जीवन धन्य हो जाता है।
आरती का अंतिम भाव अत्यंत प्रेरक है—जो भक्त माँ कैला रानी की शरण में रहता है, माँ उसे अपने संरक्षण में रखती हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा से कैला माता की आरती गाता है, वह इस भवसागर से पार उतर जाता है और जीवन में शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
“कैला माता की आरती” हमें यह सिखाती है कि माँ कैला रानी अखंड ज्योति, शक्ति और करुणा का स्वरूप हैं। उनकी उपासना से पापों का क्षय, मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मिक मुक्ति प्राप्त होती है। जो भक्त प्रेम, विश्वास और नियमपूर्वक इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में माँ की कृपा से सुख, शांति और मंगल सदा बना रहता है।
कैला माता की आरती – Kaila Maiya Ki Aarti
ॐ जय कैला रानी,
मैया जय कैला रानी ।
ज्योति अखंड दिये माँ
तुम सब जगजानी ॥
तुम हो शक्ति भवानी
मन वांछित फल दाता ॥
मैया मन वांछित फल दाता ॥
अद्भुत रूप अलौकिक
सदानन्द माता ॥
ॐ जय कैला रानी।
गिरि त्रिकूट पर आप
बिराजी चामुंडा संगा ॥
मैया चामुंडा संगा ॥
भक्तन पाप नसावौं
बन पावन गंगा ॥
ॐ जय कैला रानी।
भक्त बहोरा द्वारे रहता
करता अगवानी ॥
मैया करता अगवानी ॥
लाल ध्वजा नभ चूमत
राजेश्वर रानी ॥
ॐ जय कैला रानी।
नौबत बजे भवन में
शंक नाद भारी ॥
मैया शंक नाद भारी ॥
जोगन गावत नाचत
दे दे कर तारी ॥
ॐ जय कैला रानी।
ध्वजा नारियल रोली
पान सुपारी साथा ॥
मैया पान सुपारी साथा ॥
लेकर पड़े प्रेम से
जो जन यहाँ आता ॥
ॐ जय कैला रानी ।
दर्श पार्श कर माँ के
मुक्ती जान पाता ॥
मैया मुक्ती जान पाता ॥
भक्त सरन है तेरी
रख अपने साथा ॥
ॐ जय कैला रानी ।
कैला जी की आरती
जो जन है गाता ॥
मैया जो जन है गाता ॥
भक्त कहे भव सागर
पार उतर जाता ॥
ॐ जय कैला रानी,
मैया जय कैला रानी ।
ज्योति अखंड दिये माँ
तुम सब जगजानी ॥
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