1- फुलेरा दूज क्या है? – एक परिचय
फुलेरा दूज भारतीय संस्कृति का वह अनमोल पर्व है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व होली के आगमन का प्रतीक है और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।
‘फुलेरा’ शब्द का अर्थ है – फूलों से सजा हुआ दिन। इस दिन प्रकृति अपने चरम सौंदर्य पर होती है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिले होते हैं, बाग-बगीचों में रंग-बिरंगे फूल महकते हैं, और वातावरण में उल्लास घुला होता है।
यह पर्व ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है। गांव-देहात में इस दिन से होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग उस स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से लकड़ी या उपले रख देते हैं, जहां बाद में होली जलाई जानी होती है।
महिलाएं इस दिन गोबर की गुलरियां (छोटे-छोटे गोले) बनाना शुरू करती हैं। ये गुलरियां सूखने के बाद होलिका दहन के दिन होली की अग्नि में अर्पित की जाती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।
फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है – इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरा दिन उतना ही शुभ होता है, जितना कोई सिद्ध मुहूर्त।
2- फुलेरा दूज क्यों मनाई जाती है? – पौराणिक कथा
फुलेरा दूज से जुड़ी एक अत्यंत रोचक और प्रेमपूर्ण पौराणिक कथा है। यह कथा राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम का सुंदर चित्रण है।
एक बार की बात है। श्रीकृष्ण कई दिनों तक राधा रानी से नहीं मिल पाए। इससे राधा रानी बहुत उदास और नाराज हो गईं। जब राधा रानी उदास हुईं, तो प्रकृति भी उदास हो गई। कहा जाता है कि मथुरा के सारे फूल मुरझा गए। बाग-बगीचों में हरियाली गायब हो गई। चारों ओर सन्नाटा छा गया।
जब यह बात श्रीकृष्ण को पता चली, तो वे तुरंत राधा रानी से मिलने पहुंचे। उनके आते ही प्रकृति में जान आ गई। मुरझाए फूल फिर से खिल गए। चारों ओर हरियाली छा गई। कृष्ण ने राधा को खुश करने के लिए उन पर रंग-बिरंगे फूल फेंके। राधा ने भी मुस्कुराते हुए कृष्ण पर फूलों की वर्षा कर दी। दोनों फूलों से होली खेलने लगे।
यह दृश्य इतना मनमोहक था कि ग्वाल-बाल और गोपियां भी उनके साथ जुड़ गईं। सबने मिलकर कृष्ण और राधा पर फूलों की बौछार कर दी। तभी से फुलेरा दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई।
यह कथा हमें सिखाती है कि प्रेम और समर्पण से हर नाराजगी दूर हो सकती है। जहां प्रेम होता है, वहां फूल खिलते हैं और खुशियां बरसती हैं।
3- फुलेरा दूज 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
फुलेरा दूज हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। आइए जानते हैं 2026 में फुलेरा दूज की सटीक तिथि और समय।
📅 फुलेरा दूज 2026 तिथि:
| तिथि | दिन | तारीख |
|---|---|---|
| द्वितीया तिथि आरंभ | बुधवार | 18 फरवरी 2026, शाम 04:57 बजे से |
| द्वितीया तिथि समाप्त | गुरुवार | 19 फरवरी 2026, दोपहर 03:58 बजे तक |
🪔 उदया तिथि के अनुसार:
चूंकि सूर्योदय के समय 19 फरवरी 2026 को द्वितीया तिथि मिल रही है, इसलिए फुलेरा दूज का पर्व 19 फरवरी 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा।
✨ शुभ मुहूर्त:
इस दिन संपूर्ण दिन ही शुभ है। फिर भी यदि आप विशेष समय पर पूजा करना चाहते हैं, तो प्रातः 06:30 से 08:30 बजे का समय सर्वोत्तम रहेगा।
4- क्यों नहीं देखा जाता इस दिन शादी का मुहूर्त? – अबूझ मुहूर्त का रहस्य
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, विशेषकर विवाह के लिए, ग्रहों-नक्षत्रों की स्थिति देखी जाती है। परंतु फुलेरा दूज इस नियम का अपवाद है। इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है।
अबूझ मुहूर्त का अर्थ:
अबूझ का अर्थ है – जिसे समझना कठिन हो। अबूझ मुहूर्त का अर्थ है – वह समय जो स्वतः ही शुभ हो, जिसके लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता न हो।

फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त क्यों माना गया?
1. दोषमुक्त दिन:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि पूरा दिन सभी प्रकार के दोषों से मुक्त रहता है। न तो कोई ग्रह दोष होता है, न ही काल सर्प या अन्य बाधाएं।
2. श्रीकृष्ण का आशीर्वाद:
पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली थी। इस घटना ने इस दिन को इतना पवित्र और शुभ बना दिया कि अब इस दिन हर कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है।
3. विवाह के लिए वरदान:
जिन जोड़ों की कुंडली में ग्रहों का मेल नहीं बैठ रहा हो, या जिन्हें विवाह के लिए कोई शुभ तिथि नहीं मिल रही हो, उनके लिए फुलेरा दूज वरदान है। इस दिन किए गए विवाह पर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा रहती है।
5- फुलेरा दूज की संपूर्ण पूजा विधि (Phulera Dooj Puja Vidhi)
फुलेरा दूज पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं सरल और संपूर्ण पूजा विधि:
🪔 पूर्व तैयारी:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूजा स्थल की स्वच्छता करें और गंगाजल से शुद्धीकरण करें।
- मालती, पलाश, कुमुद, गेंदा, गुलाब, हरश्रृंगार आदि विभिन्न रंग-बिरंगे फूल एकत्रित कर लें।
📿 पूजा विधि – 10 सरल चरण:
- राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर को एक चौकी पर स्थापित करें।
- उन्हें रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाकर वातावरण को पवित्र करें।
- अब राधा-कृष्ण को सुगंधित फूल अर्पित करें। ध्यान रखें, फूल ताजे और सुगंधित हों।
- उन्हें अबीर-गुलाल अर्पित करें। यह दिन फूलों और गुलाल से होली खेलने का है।
- भगवान को पीले फल, सफेद मिठाई, पंचामृत और मिश्री का भोग लगाएं।
- अब राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करें। (मंत्र अगले सेक्शन में दिए गए हैं।)
- शाम के समय फिर से स्नान कर रंगीन वस्त्र धारण कर राधा-कृष्ण का पुनः पूजन करें। शाम का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।
- आरती करें और उन्हें श्रृंगार की वस्तुएं (बिंदी, चूड़ी, महावर, चुनरी आदि) अर्पित करें।
- पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और सात्विक भोजन करें।
6- फुलेरा दूज – श्रीकृष्ण और राधारानी के शुभ मंत्र
मंत्र जाप से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। फुलेरा दूज के दिन इन मंत्रों का जाप अवश्य करें:
🕉️ श्रीकृष्ण मंत्र:
“ॐ नमः भगवते वासुदेवाय कृष्णाय क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।”
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीकृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा।”
“कृं कृष्णाय नमः”
“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।”
“ॐ कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण सर्वज्ञ त्वं प्रसीद मे। रमारमण विद्येश विद्यामाशु प्रयच्छ मे॥”
🕉️ महामंत्र (हरे कृष्ण महामंत्र):
“हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे॥”
🕉️ राधा रानी के 8 प्रमुख नाम मंत्र:
“नित्य सुखकरणी राधा! राधा!!”
“जगत स्वामिनी राधा! राधा!!”
“आनंद कन्दिनी राधा! राधा!!”
“कृष्ण संगिनी राधा! राधा!!”
“परम् अनूपा राधा! राधा!!”
“सिंधु स्वरूपा राधा! राधा!!”
“स्वयं परमेश्वरी राधा! राधा!!”
“परम् पुनीता राधा! राधा!!”
7- फुलेरा दूज का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
फुलेरा दूज का महत्व केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं है। इसके कई आयाम हैं:
🌸 प्राकृतिक महत्व:
यह पर्व बसंत ऋतु के चरम का प्रतीक है। जब प्रकृति पूरी तरह खिली होती है, फूल महकते हैं और वातावरण में उल्लास घुला होता है।
💞 प्रेम का प्रतीक:
यह दिन राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम हर बाधा को पार कर सकता है।
🪔 अबूझ मुहूर्त:
धर्मशास्त्रों में फुलेरा दूज को मंगलकारी माना गया है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, संपत्ति क्रय और अन्य मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं।
🏵️ ब्रज का उत्सव:
मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र में यह दिन धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है।
🚀 नई शुरुआत के लिए उत्तम:
यदि आप कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, तो फुलेरा दूज से बेहतर दिन नहीं हो सकता। इस दिन में साक्षात श्रीकृष्ण का अंश होता है।
8- फुलेरा दूज के 11 अद्भुत उपाय – कान्हा और राधा की कृपा पाने के लिए
यदि आप राधा-कृष्ण की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो फुलेरा दूज के दिन ये 11 उपाय अवश्य करें:
- गुलाल अर्पित करें : इस दिन राधा-कृष्ण को गुलाल अर्पित करें और स्वयं भी गुलाल लगाएं। यह दिन होली की शुरुआत का प्रतीक है।
- गुलाल को पैरों में न लगने दें : राधा-कृष्ण को जो गुलाल अर्पित किया गया हो, उसे पैरों में न लगने दें। यह अशुभ माना जाता है।
- रंग-बिरंगे फूल अर्पित करें : राधा-कृष्ण को विभिन्न रंगों के फूल अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है।
- राधा जी को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें : राधा रानी को चूड़ी, बिंदी, महावर, चुनरी आदि श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। इनमें से कोई एक वस्तु अपने पास संभाल कर रखें। इससे जल्दी विवाह के योग बनते हैं।
- किसी का अपमान न करें : इस दिन किसी का, विशेषकर प्रेमी या घर के वरिष्ठों का, अपमान न करें। यह अशुभ फलदायक होता है।
- गाय को भोजन कराएं : इस दिन गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाएं। इससे सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
- सात्विक भोजन करें : इस दिन मांसाहार और शराब से दूर रहें। पूजा के बाद सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
- गाय, मयूर और बछिया को आहार दें : इस दिन गाय, मोर और छोटी बछिया को आहार अवश्य दें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
- गुलाबी वस्त्र धारण करें : यदि आप अपने प्रिय को पाने के लिए पूजन कर रहे हैं, तो गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें।
- पलंग के नीचे स्वच्छता रखें : इस दिन अपने पलंग के नीचे की गंदगी साफ करें। पलंग के चारों पैरों में गुलाबी धागा बांधें और सोने के लिए एक ही तकिया का प्रयोग करें।
- शाम को पुनः पूजन करें : शाम के समय रंगीन वस्त्र धारण कर राधा-कृष्ण का पुनः पूजन करें। शाम का पूजन सबसे उत्तम माना गया है।
9- बसंत का चरमोत्कर्ष – फुलेरा दूज और होली का आगमन
फुलेरा दूज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, यह बसंत ऋतु के चरमोत्कर्ष का प्रतीक है।

🌾 खेतों में बहार:
इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल अपने चरम पर होते हैं। जहां तक नजर जाए, केसरिया क्यारियां ही दिखती हैं। उनसे उठती मनभावन महक पूरे वातावरण को सुगंधित कर देती है।
☀️ मौसम की मस्ती:
शरद की कड़ाके की ठंड के बाद सूरज की गुनगुनी धूप तन और मन दोनों को प्रफुल्लित कर देती है। खेतों की हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों को देखकर मन-मयूर नृत्य करने लगता है।
🎭 ग्रामीण परंपराएं:
उत्तर भारत के गांवों में आज भी फुलेरा दूज से ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
- शाम के समय घरों में रंगोली सजाई जाती है। इसे “घर में होली रखना” कहा जाता है।
- बच्चे खेतों से सरसों, मटर, चना और फुलवारियों के फूल तोड़कर लाते हैं।
- इन फूलों को रंगोली पर सजाया जाता है।
🔥 होली की तैयारी:
यह सिलसिला फुलेरा दूज से शुरू होकर होली के एक दिन पहले तक चलता है। होली वाले दिन इसी स्थान पर गोबर की गुलरियों से होली बनाई जाती है और गांव की मुख्य होली से लाई गई आग से उसे जलाया जाता है।
10- निष्कर्ष – फुलेरा दूज: प्रेम, फूल और उल्लास का पर्व
फुलेरा दूज केवल एक तिथि नहीं, यह एक अनुभव है।
यह वह दिन है जब प्रकृति अपने चरम सौंदर्य पर होती है।
यह वह दिन है जब राधा-कृष्ण के प्रेम की गाथा गाई जाती है।
यह वह दिन है जब होली के आगमन की खुशी मनाई जाती है।
🌸 फुलेरा दूज हमें सिखाता है:
- प्रेम में मान-मनौव्वल भी उतना ही सुंदर है, जितना मिलन।
- फूल केवल सजावट नहीं, भावनाओं की भाषा हैं।
- परंपराएं केवल रस्म नहीं, हमारी संस्कृति की जड़ें हैं।
🙏 इस फुलेरा दूज पर संकल्प लीजिए:
- अपने प्रियजनों पर प्रेम के फूल बरसाइए।
- किसी रूठे हुए को मनाइए।
- प्रकृति के इस उत्सव में शामिल होइए।
- राधा-कृष्ण की उस पावन प्रेम-लीला को अपने हृदय में बसाइए।
“फुलेरा दूज – जब फूल बरसे, प्रेम खिले, और होली आने की खुशी में पूरा ब्रज झूम उठे।”
जय श्री कृष्ण 🙏
राधे राधे 💞
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