बाबा रामदेव जी, जिन्हें रामदेव पीर, रामापीर या रामशाहपीर के नाम से भी जाना जाता है, को मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण (द्वारकाधीश) का दिव्य अवतार माना जाता है। वे राजस्थान के अत्यंत पूजनीय लोकदेवता हैं और उनकी भक्ति केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है—हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय उन्हें समान श्रद्धा से पूजते हैं। बाबा रामदेव जी ने मानव कल्याण और सेवा के उद्देश्य से अवतार लिया तथा अपनी अलौकिक चमत्कारी शक्तियों के माध्यम से समाज के हर वर्ग के लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनकी करुणा, न्यायप्रियता और लोकहितकारी कार्यों ने उन्हें जन-जन का आराध्य बना दिया।
श्री रामदेव जी की आरती का – सार (भावार्थ)
श्री रामदेव जी की यह आरती उनके दिव्य स्वरूप, करुणामयी शक्ति और भक्तों पर होने वाली अपार कृपा का भावपूर्ण वर्णन करती है। आरती का आरंभ उन्हें “रामादे स्वामी” के रूप में नमन करने से होता है, जहाँ उनके माता-पिता—पिता अजमल जी और माता मेनादे—का उल्लेख कर उनके पावन अवतार की महिमा को स्मरण किया गया है। यह पंक्ति बताती है कि रामदेव जी केवल एक महापुरुष नहीं, बल्कि लोककल्याण के लिए अवतरित दिव्य शक्ति हैं।
आरती में उनके मनमोहक रूप का सुंदर चित्रण मिलता है—वे घोड़े पर आरूढ़ हैं, हाथों में भाला और मस्तक पर मोतियों की आभा लिए हुए हैं। यह दृश्य उनके शौर्य, तेज और धर्मरक्षा के संकल्प को दर्शाता है। आगे उन्हें विष्णु स्वरूप और कलियुग के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जिनकी आराधना देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रामदेव जी की महिमा लोक और अलौकिक दोनों जगतों में समान रूप से प्रतिष्ठित है।
आरती का एक महत्वपूर्ण भाव यह है कि रामदेव जी दुखों का नाश करने वाले हैं। वे पल भर में कष्टों को दूर कर भक्तों को नवजीवन प्रदान करते हैं। उनके चमत्कारों का उल्लेख—जैसे दुष्टों का संहार करना, अन्याय का अंत करना और असंभव को संभव बनाना—उनकी रक्षक और न्यायकारी प्रकृति को उजागर करता है। “नाव सेठ की तारण” और “दानव का संहार” जैसे प्रसंग यह संदेश देते हैं कि जो भी शरण में आता है, उसकी रक्षा अवश्य होती है।
कुल मिलाकर, यह आरती रामदेव जी को भक्तवत्सल, धर्मरक्षक और करुणासागर के रूप में प्रस्तुत करती है। वे कलियुग में सत्य, सेवा और साहस के प्रतीक हैं। उनकी उपासना से भय दूर होता है, बाधाएँ कटती हैं और जीवन में शांति, सुरक्षा तथा समृद्धि का संचार होता है। यह आरती भक्त के हृदय में अटूट श्रद्धा जगाती है और उसे यह विश्वास दिलाती है कि श्री रामदेव जी की कृपा से हर कठिनाई पार की जा सकती है।
बाबा रामदेव जी की आरती – Aarti Shree Ramdev Ji Ki
ॐ जय श्री रामादेस्वामी जय श्री रामादे।
पिता तुम्हारे अजमलमैया मेनादे॥
ॐ जय श्री रामादे
स्वामी जय श्री रामादे॥
रूप मनोहर जिसकाघोड़े असवारी।
कर में सोहे भालामुक्तामणि धारी॥
ॐ जय श्री रामादे
स्वामी जय श्री रामादे॥
विष्णु रूप तुम स्वामीकलियुग अवतारी।
सुरनर मुनिजन ध्यावेजावे बलिहारी॥
ॐ जय श्री रामादे
स्वामी जय श्री रामादे॥
दुःख दलजी कातुमने पल भर में टारा।
सरजीवन भाण कोतुमने कर डारा॥
ॐ जय श्री रामादे
स्वामी जय श्री रामादे॥
नाव सेठ की तारीदानव को मारा।
पल में कीना तुमनेसरवर को खारा॥
ॐ जय श्री रामादे
स्वामी जय श्री रामादे॥
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