श्री गोपाल की आरती – सार (भावार्थ)
श्री गोपाल की आरती मूल रूप से जुगल स्वरूप—भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी—की महिमा, सौंदर्य और दिव्य लीला का भावपूर्ण स्तवन है। यह आरती भक्त के हृदय को प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण से भर देती है। इसमें राधा-कृष्ण के अलौकिक रूप, उनके शृंगार, व्रज की दिव्यता और भक्तों की निष्काम भक्ति का सुंदर चित्रण किया गया है।
आरती का आरंभ जुगल किशोर की वंदना से होता है, जहाँ भक्त यह भाव प्रकट करता है कि राधा रानी के चरणों में तन-मन-धन न्योछावर करना ही सच्ची भक्ति है। यह पंक्ति राधा को भक्ति की सर्वोच्च शक्ति और कृष्ण प्रेम की अधिष्ठात्री मानती है।
आगे भगवान श्रीकृष्ण के मुखमंडल की शोभा का वर्णन है, जो सूर्य और चंद्रमा के करोड़ों तेज से भी अधिक दीप्तिमान है। उनके दिव्य स्वरूप को निहारते ही भक्त का मन मोहित हो जाता है और सांसारिक आकर्षण स्वतः क्षीण होने लगते हैं। गौरवर्ण राधा और श्यामवर्ण कृष्ण का युगल दर्शन आत्मा को तृप्त कर देता है।
आरती में यह भी बताया गया है कि जब भक्त प्रेमपूर्वक आरती करता है, कंचन थाल में कपूर की ज्योति जलाता है, तो प्रभु स्वयं भक्त के हृदय में पधारते हैं और उसका अंतःकरण पवित्र हो जाता है। यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति बाहरी नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता से स्वीकार होती है।
फूलों की सेज, फूलों की माला और रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान नंदलाल का वर्णन व्रज की अलौकिक शोभा को प्रकट करता है। मोर मुकुट, हाथों में मुरली और नटवर वेष में सजे श्रीकृष्ण का सौंदर्य ऐसा है कि उसे देखकर हर मन प्रेम में डूब जाता है।
नीले और पीत वस्त्रों में सजे कुंज बिहारी, गिरिवरधारी श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति भी इस आरती में समाहित है। वे केवल सौंदर्य के ही नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और संरक्षण के भी प्रतीक हैं। उनकी आरती समस्त ब्रज की गोपियाँ प्रेम और श्रद्धा से करती हैं—यह सामूहिक भक्ति और व्रजभाव का प्रतीक है।
अंत में नंदलाल और वृषभानु किशोरी की अविचल, शाश्वत जोड़ी की महिमा का गान किया गया है। यह युगल प्रेम संसार को यह सिखाता है कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग प्रेम, सेवा और समर्पण से होकर जाता है।
संक्षेप में, श्री गोपाल की यह आरती राधा-कृष्ण के दिव्य युगल स्वरूप, व्रज की भक्ति परंपरा और निष्काम प्रेम का सार है। इसका पाठ मन को शांति, हृदय को पवित्रता और जीवन को आध्यात्मिक आनंद से भर देता है। यह आरती हर भक्त को राधा-कृष्ण के चरणों में प्रेमपूर्वक समर्पित होने की प्रेरणा देती है। 🌸🙏
आरती युगलकिशोर की कीजै – Aarti Yugal Kishore Ki Kijai
आरती जुगल किशोर की कीजै,राधे धन न्यौछावर कीजै।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा,ताहि निरखि मेरा मन लोभा।
आरती जुगल किशोर की कीजै…..।
गौर श्याम मुख निरखत रीझै,प्रभु को स्वरुप नयन भर पीजै।
कंचन थार कपूर की बाती,हरि आये निर्मल भई छाती।
आरती जुगल किशोर की कीजै…..।
फूलन की सेज फूलन की माला,रतन सिंहासन बैठे नन्दलाला।
मोर मुकुट कर मुरली सोहै,नटवर वेष देखि मन मोहै।
आरती जुगल किशोर की कीजै…..।
आधा नील पीत पटसारी,कुञ्ज बिहारी गिरिवरधारी।
श्री पुरुषोत्तम गिरवरधारी,आरती करें सकल ब्रजनारी।
आरती जुगल किशोर की कीजै…..।
नन्द लाला वृषभानु किशोरी,परमानन्द स्वामी अविचल जोरी।
आरती जुगल किशोर की कीजै,राधे धन न्यौछावर कीजै।
आरती जुगल किशोर की कीजै…..।
श्री गोपाल की आरती का यह पावन भावार्थ यदि आपके हृदय को भक्ति, प्रेम और शांति से भर दे, तो इसे अपने प्रियजनों के साथ अवश्य शेयर करें। इस आरती से जुड़े अपने अनुभव, भावनाएँ और श्रद्धा के विचार नीचे कमेंट में लिखें—आपकी भक्ति दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
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