बाबा गंगाराम आरती – Baba Gangaram Aarti

राजस्थान के झुंझुनूं में स्थित श्री पंचदेव मंदिर के विष्णु-अवतार बाबा गंगाराम के प्रति लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन निरंतर बढ़ती जा रही है। बाबा गंगाराम का अवतरण श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की दशमी, सन् 1895 ईस्वी में श्री झूठारामजी और माता लक्ष्मीदेवी के वैश्य कुल में हुआ। जन्म के समय कुलपुरोहित ने भविष्यवाणी की कि यह बालक गंगा की तरह पापों का नाश करेगा और राम की भांति आत्मा को शुद्ध करेगा, इसलिए उनका नाम “गंगाराम” रखा गया, जिसे बाबा ने अपने जीवन से सार्थक कर दिखाया। बचपन से ही वे गहन आध्यात्मिक चेतना में रमे रहे और अपने ज्ञान, आचरण व वाणी से लोगों को आकर्षित करते थे। युवावस्था तक आते-आते उनकी दिव्यता प्रकट होने लगी और अनेक भक्त उनके सान्निध्य में ब्रह्मानंद का अनुभव करते थे।

पारिवारिक वैभव को त्यागकर वे कौशल प्रदेश (वर्तमान उत्तर प्रदेश) आए और बाराबंकी जिले के सफदरगंज में पवित्र कल्याणी नदी के तट को अपनी कर्मभूमि बनाया, जहाँ उनके आगमन से नदी सतत प्रवाहमान हो गई और कुछ भक्तों को जल में भगवान विष्णु के रूप में उनके दर्शन भी हुए। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने यहीं जनकल्याण हेतु लीला रची और भक्त शिरोमणि देवकीनंदन व शक्ति स्वरूपा माता गायत्री देवी को अपने कार्य का माध्यम बनाया। सन् 1938 ईस्वी में कल्याणी नदी किनारे वटवृक्ष के नीचे देह त्याग कर वे विष्णुलोक को प्रस्थान कर गए; वही वृक्ष आज “देहोत्सर्ग वट” कहलाता है और सफदरगंज एक तीर्थ बन गया। पश्चात् दिव्य संकेतों के माध्यम से देवकीनंदन को मंदिर निर्माण का आदेश मिला और झुंझुनूं में माता गायत्री के साथ उन्होंने सन् 1975 ईस्वी में वेदविधि से श्री पंचदेव मंदिर की स्थापना की, जहाँ बाबा गंगाराम सहित पंचदेवों की प्रतिष्ठा हुई और आज भी भक्त वहां अपार श्रद्धा और आनंद का अनुभव करते हैं।

बाबा गंगाराम आरती – सार (भावार्थ)

यह आरती बाबा गंगाराम जी को संकट हरने वाले, मंगल प्रदान करने वाले और सभी प्रकार के सुखों के आधार के रूप में महिमामंडित करती है। इसमें बताया गया है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से उनका ध्यान करता है, उसके कार्य स्वतः पूर्ण होते हैं और उसे धन-वैभव, शांति तथा जीवन की समृद्धि प्राप्त होती है।

प्रातःकाल बाबा का नाम लेकर वंदन करना, चंदन-पुष्प अर्पित करना और नम्र भाव से प्रणाम करना—ये सभी भक्तिभाव को गहरा करते हैं और साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।

आरती में बाबा को रोग-शोक दूर करने वाला करुणामय संत बताया गया है, जिनका धाम झुंझनूं क्षेत्र में स्थित है और जिनके मंदिर में दर्शन करने से परिवार में सुख-शांति और संतान-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। बाबा को देवतुल्य, लोककल्याणकारी और सर्वत्र पूज्य मानते हुए कहा गया है कि उनका सुमिरन करने वाले का निश्चित रूप से कल्याण होता है। सच्ची आस्था, नियमित ध्यान और निर्मल मन से की गई प्रार्थना से वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें अपनी करुणा का आश्रय देते हैं।

आरती का भाव यह भी है कि भक्त स्वयं को बाबा का बालक मानकर अपनी अल्पज्ञता स्वीकार करता है और हाथ जोड़कर विनती करता है कि जीवन की भूल-चूक क्षमा करें। बाबा गंगाराम जी को सुख-सम्पत्ति प्रदान करने वाला, दयालु और बलशाली बताया गया है, जो अपने शरणागतों पर कृपा करके उनके कष्ट दूर करते हैं और सतत कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह आरती श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के माध्यम से जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का संदेश देती है।

बाबा गंगाराम आरती – Baba Gangaram Aarti

जय हो गंगाराम बाबाजय हो गंगाराम।
कष्ट निवारण मंगल दायकहो सब सुख के धाम॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥

सच्चे मन से ध्यान धरेजो उनके सारो काम।
धन-वैभव वह सब सुख पाताजाने जगत तमाम॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥

प्रातःकाल थारी करां वन्दनालेकर थारो नाम।
चन्दन पुष्प चढ़ावा थारेऔर करां प्रणाम॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥

रोग शोक काटो थे सबकाबसो झुंझनू धाम।
आ मन्दिर जो दर्शन करसीपासी सुख सन्तान।

जय हो गंगाराम बाबा…॥

देवलोक में आप विराजो सारेजग में हो महान।
जो कोई सुमिरण करे आपकाहो निश्चय कल्याण॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥

श्रद्धा भाव जो मन में राखेधरे आपका ध्यान।
उसकी रक्षा आप करो नितहो करुणा के धाम।

जय हो गंगाराम बाबा…॥

म्हें हां बालक थारा बाबाम्हानै नही कुछ ज्ञान।
हाथ जोड़कर विनती करांम्हें हां भोला नादान॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥

सुख सम्पत्ति के देने वालेसदा करो कल्याण।
भूल-चूक म्हारी माफ करोथे देव बड़े बलवान॥

जय हो गंगाराम बाबा…॥


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