बाल कृष्ण जी की आरती – Bal Krishna Ji Ki Aarti

बाल कृष्ण जी की आरती का सार (भावार्थ)

यह आरती भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (बाल गोपाल / लड्डू गोपाल) की मधुरता, करुणा और आनंदमय लीला का भक्तिपूर्ण वर्णन करती है। आरती का मूल भाव यही है कि जो भक्त प्रेम से बाल कृष्ण की आराधना करता है, वह अपने जीवन को सार्थक बना लेता है—क्योंकि उनकी भक्ति से मन निर्मल, हृदय आनंदित और जीवन मंगलमय हो जाता है।

आरती में बाल कृष्ण को माँ यशोदा का परम दुलारा और नंद बाबा की आँखों का तारा कहा गया है। वे गोपियों के प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं—अर्थात् ब्रज की हर श्वास उनके नाम से जुड़ी है। भक्त से निवेदन है कि वह अपना प्राण, मन और सर्वस्व उन्हीं को अर्पित करे, क्योंकि बाल कृष्ण का सान्निध्य ही सच्चा सुख है।

अगले भाव में कृष्ण को बलराम (बलदाऊ) के छोटे भाई और यशोदा मैया द्वारा प्यार से पुकारे जाने वाले “कनुआ” के रूप में स्मरण किया गया है। उनकी बाल-सुलभ चेष्टाएँ देखकर मैया बार-बार उन्हें बलैयाँ लेती हैं और मन से निहाल हो जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि बाल कृष्ण का रूप केवल देवत्व नहीं, बल्कि वात्सल्य, स्नेह और पारिवारिक प्रेम का अद्भुत संगम है। भक्त से कहा गया है कि वह अपना सर्वस्व इन्हीं चरणों में समर्पित कर दे।

आरती में राधावर कृष्ण कन्हैया का उल्लेख करते हुए ब्रज की प्रसिद्ध माखन-लीला की झलक मिलती है—वे ब्रजवासियों का मक्खन चुरा लेते हैं और उसी क्षण मन भी हर लेते हैं। उनकी छवि ऐसी मोहक है कि एक बार देखने पर नयन उसी में बस जाते हैं। यह भाव बताता है कि बाल कृष्ण की लीला बाहरी आनंद ही नहीं, बल्कि आत्मिक आकर्षण है, जो भक्त को संसार से उठाकर भक्ति में स्थिर कर देता है।

आगे उनकी तोतली बोली, साथियों के संग खेलना और सहज मुस्कान का वर्णन है—जो मन को शांति और हर्ष से भर देता है। कहा गया है कि जो कोई भी ध्यान और प्रेम से बाल कृष्ण का स्मरण करता है, वही सच्चे सुख का अनुभव करता है। इसलिए भक्त से आग्रह है कि अब उन्हें अपना ही मान ले—क्योंकि बाल कृष्ण के चरणों में अपनापन ही भक्ति का सार है।

आरती का निष्कर्ष पुनः उसी प्रेरक वाक्य से होता है—“आरती बाल कृष्ण की कीजै, अपना जन्म सफल कर लीजै”। अर्थात् बाल गोपाल की आराधना से जीवन में प्रेम, पवित्रता और परम आनंद की प्राप्ति होती है, और मानव-जन्म का उद्देश्य पूर्ण होता है।

“बाल कृष्ण जी की आरती” हमें सिखाती है कि ईश्वर का बाल रूप सरलता, वात्सल्य और निष्काम प्रेम का प्रतीक है। उनकी भक्ति से मन की चंचलता शांत होती है, हृदय में आनंद बसता है और जीवन में मंगल का प्रवाह आता है। जो भक्त प्रेम, समर्पण और विश्वास के साथ इस आरती का पाठ करता है, वह अपने जीवन को सार्थक, सुखमय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना लेता है।

बाल कृष्ण जी की आरती – Bal Krishna Ji Ki Aarti

आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपना जन्म सफल कर लीजै ॥

श्री यशोदा का परम दुलारा,
बाबा के अँखियन का तारा ।
गोपियन के प्राणन से प्यारा,
इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

बलदाऊ के छोटे भैया,
कनुआ कहि कहि बोले मैया ।
परम मुदित मन लेत बलैया,
अपना सरबस इनको दीजै ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

श्री राधावर कृष्ण कन्हैया,
ब्रज जन को नवनीत खवैया ।
देखत ही मन लेत चुरैया,
यह छवि नैनन में भरि लीजै ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

तोतली बोलन मधुर सुहावै,
सखन संग खेलत सुख पावै ।
सोई सुक्ति जो इनको ध्यावे,
अब इनको अपना करि लीजै ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपना जन्म सफल कर लीजै ॥


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