शनिदेव आरती – जय जय श्री शनिदेव – Jai Jai Shani Dev Maharaj
शनिदेव की आरती का सार (भावार्थ) शनिदेव की यह पावन आरती न्याय, कर्म, संयम और अनुशासन के देवता भगवान शनि …
आरती देवी-देवताओं की स्तुति और उपासना के लिए गाया जाने वाला एक पवित्र भक्ति गीत है। पूजा के समय भक्त दीपक की पवित्र ज्योति अर्पित करते हुए आरती गाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और दिव्य बन जाता है। “आरती” शब्द संस्कृत के “आरात्रिक” से निकला है, जिसका अर्थ है — अंधकार को दूर करके प्रकाश फैलाने वाली क्रिया। इसलिए आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
शनिदेव की आरती का सार (भावार्थ) शनिदेव की यह पावन आरती न्याय, कर्म, संयम और अनुशासन के देवता भगवान शनि …
सूर्य देव की आरती – सार (भावार्थ) यह सूर्य देव की आरती भगवान सूर्य की महिमा, शक्ति और जीवनदायिनी भूमिका …
आरती श्री सूर्य जी – सार (भावार्थ) इस पावन श्री सूर्यदेव की आरती में भगवान सूर्य को कश्यप ऋषि और …
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती का सार (विस्तृत) श्री पुरुषोत्तम देव की आरती भगवान विष्णु के उस सर्वोच्च स्वरूप का …
श्री सत्यनारायणजी की आरती – सार (भावार्थ) श्री सत्यनारायणजी की आरती भगवान विष्णु के उस सत्यस्वरूप की महिमा का गान …
श्री बद्रीनाथजी की आरती – सार (भावार्थ) श्री बद्रीनाथजी की यह पावन आरती भगवान विष्णु के बद्री नारायण स्वरूप की …
भगवान बदरीनाथ आरती का सार (भावार्थ) भगवान बदरीनाथ जी की यह आरती उनके योगमय, तपस्वी और करुणामय स्वरूप का सुंदर …
श्री लक्ष्मीनारायण आरती का सार (भावार्थ) श्री लक्ष्मी नारायण की आरती में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त महिमा …
ॐ जय जगदीश हरे आरती का सार (भावार्थ) ॐ जय जगदीश हरे आरती सनातन धर्म की सर्वाधिक प्रचलित और भावपूर्ण …
भगवान कैलासवासी आरती का सार (भावार्थ) भगवान कैलासवासी आरती महादेव शिव के दिव्य कैलास-स्वरूप, उनकी लीलाओं, करुणा और सर्वशक्तिमत्ता को …