भगवान कार्तिकेय की आरती – Kartikeya Ji Ki Aarti
भगवान कार्तिकेय की आरती – सार (भावार्थ) भगवान कार्तिकेय की यह आरती केवल एक देवता की स्तुति नहीं है, बल्कि …
आरती देवी-देवताओं की स्तुति और उपासना के लिए गाया जाने वाला एक पवित्र भक्ति गीत है। पूजा के समय भक्त दीपक की पवित्र ज्योति अर्पित करते हुए आरती गाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और दिव्य बन जाता है। “आरती” शब्द संस्कृत के “आरात्रिक” से निकला है, जिसका अर्थ है — अंधकार को दूर करके प्रकाश फैलाने वाली क्रिया। इसलिए आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
भगवान कार्तिकेय की आरती – सार (भावार्थ) भगवान कार्तिकेय की यह आरती केवल एक देवता की स्तुति नहीं है, बल्कि …
श्री स्वामीनारायण आरती का – सार (भावार्थ) यह आरती भगवान स्वामीनारायण के दिव्य, करुणामय और सर्वोच्च स्वरूप का भक्तिपूर्ण स्तवन …
बाबा बालक नाथ जी की आरती का सार (भावार्थ) यह आरती बाबा बालक नाथ जी के वैराग्य, करुणा और भक्त-वत्सल …
“दूलह देवा” सिंधी समाज के आराध्य देवता झूलेलाल का ही एक पावन नाम है। उन्हें वरुण देव (जल के देवता) …
बाल कृष्ण जी की आरती का सार (भावार्थ) यह आरती भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (बाल गोपाल / लड्डू गोपाल) …
उज्जैन के महाकाल की आरती का सार (भावार्थ) उज्जैन की महाकाल की आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप का भक्तिपूर्ण …
महाकाल जी की आरती का – सार (भावार्थ) महाकाल जी की आरती बाबा महाकाल के उस विराट स्वरूप का गान …
माँ महामाया की आरती का – सार (भावार्थ) यह आरती माँ महामाया के करुणामय, सर्वशक्तिमान और विश्वपालक स्वरूप का गहन …
द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, तब उनसे ठीक पहले माँ दुर्गा ने …
चिंतपूर्णी देवी की आरती का – सार (भावार्थ) चिंतपूर्णी देवी की आरती, माँ चिंतपूर्णी को “भोली माँ” कहकर उनके करुणामय, रक्षक …