श्री नवग्रह चालीसा – Shri Navgrah Chalisa
श्री नवग्रह चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री नवग्रह चालीसा नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, …
चालीसा शब्द की उत्पत्ति “चालीस” से हुई है, जिसका अर्थ संख्या 40 होता है। यह एक पवित्र भक्ति स्तुति है, जिसमें सामान्यतः 40 चौपाइयाँ होती हैं, जिनके माध्यम से किसी देवी-देवता की महिमा, गुणों और कृपा का वर्णन किया जाता है। प्रायः चालीसा के आरंभ और अंत में दोहे भी शामिल किए जाते हैं, जो स्तुति का परिचय और समापन प्रस्तुत करते हैं।
श्री नवग्रह चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री नवग्रह चालीसा नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, …
श्री भैरव चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री भैरव चालीसा भगवान श्री भैरव के उग्र, रक्षक, कालस्वरूप …
श्री बटुक भैरव चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री बटुक भैरव चालीसा भगवान बटुक भैरव की उग्र …
श्री ब्रह्मा चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री ब्रह्मा चालीसा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी की …
श्री विष्णु चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री विष्णु चालीसा भगवान श्रीहरि विष्णु के करुणामय स्वरूप, उनकी …
श्री सूर्य देव चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री सूर्य देव चालीसा भगवान सूर्य नारायण के तेजस्वी …
श्री गोपाल चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री गोपाल चालीसा भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी अलौकिक …
श्री कृष्ण चालीसा का भावार्थ एवं सार यह पावन श्री कृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप, उनकी बाल लीलाओं, …
राम चालीसा एक अत्यंत पवित्र और भक्तिमय स्तोत्र है, जिसमें भगवान श्रीराम की महिमा, उनकी करुणा, उनके अद्भुत पराक्रम और …
शनि चालीसा समझाती है कि भगवान शनि देव न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो मनुष्य को उसके कर्मों के …