चामुण्डा माता की आरती का – सार (भावार्थ)
चामुण्डा माता की आरती, माँ चामुण्डा की अपार शक्ति, करुणा और रक्षक स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करती है। आरती का मूल संदेश यह है कि जो भी भक्त श्रद्धा से माँ की शरण में आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता—माता उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं, कष्टों का नाश करती हैं और जीवन में आनंद व सुरक्षा का संचार करती हैं।
आरती के प्रारंभ में माँ को शरणागतों की संरक्षिका बताया गया है—जो भी उनके चरणों में समर्पित होता है, उसे “सब कुछ” प्राप्त होता है। यह “सब कुछ” केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि साहस, शांति, विवेक और आध्यात्मिक संतोष भी है। माँ चामुण्डा की भक्ति भय को दूर करती है और मन को दृढ़ बनाती है।
आगे आरती में चण्ड और मुण्ड नामक दो अत्यंत बलशाली राक्षसों का उल्लेख है, जिन्हें माँ ने अपने क्रोध-दृष्टि और शक्ति से पराजित किया। यही कारण है कि वे “चामुण्डा” कहलाती हैं। यह प्रसंग बताता है कि माँ अधर्म और अन्याय का नाश करने वाली न्याय-शक्ति हैं, जो जब आवश्यक हो, तो उग्र रूप धारण करके भक्तों की रक्षा करती हैं।
अगली पंक्तियों में चौसठ योगिनियों और बावन भैरवों का उल्लेख है, जो माँ के साथ तांडव करते हुए विपत्तियों का नाश करते हैं। यह माँ की उपासना को एक व्यापक तांत्रिक-शक्ति परंपरा से जोड़ता है, जहाँ उनकी आराधना से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और संकट कट जाते हैं।
आरती में चामुण्डा धाम को “शक्ति धाम” कहा गया है, जहाँ शिव मंदिर समीप स्थित है। भीतर ब्रह्मा, विष्णु और नारद जैसे देव-ऋषि मंत्र-जप करते हैं। यह संकेत देता है कि माँ चामुण्डा केवल लोकदेवी नहीं, बल्कि त्रिदेवों द्वारा पूजित आदिशक्ति हैं—जिनकी उपासना से आध्यात्मिक उन्नति होती है।
इसके बाद मंदिर-परिसर का सजीव वर्णन मिलता है—सिंह वाहन, घंटियों की ध्वनि, और वंडेर नदी की निर्मल धारा। ये प्रतीक बताते हैं कि माँ का धाम शक्ति, पवित्रता और करुणा से परिपूर्ण है, जहाँ भक्तों को शांति और आश्वासन मिलता है।
आरती में माँ के दो रूपों का संतुलन दिखता है—
- क्रोध रूप: हाथ में खप्पर (कटोरा/कपाल) जो कभी खाली नहीं रहता, अर्थात् माँ दुष्टों का नाश कर न्याय करती हैं।
- शांत रूप: जो भक्त प्रेम से ध्यान करता है, उसे आनंद, संतोष और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
यह बताता है कि माँ चामुण्डा उग्र भी हैं और करुणामयी भी—परिस्थिति के अनुसार दोनों रूप धारण करती हैं।
आगे हनुमत, बाला योगी जैसे सिद्धों का उल्लेख है, जो माँ के धाम में विराजमान होकर शक्ति का संचार करते हैं। साथ ही, माँ को दुर्गा और महाकाली का स्वरूप कहा गया है—अर्थात् वे समस्त दैवी शक्तियों का एकीकृत रूप हैं और कार्य-सिद्धि कराती हैं।
आरती के अंत में माँ के कल्याणकारी फल स्पष्ट किए गए हैं—वे भक्तों को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करती हैं, पापों का हरण करती हैं और जो शरणागत होता है, उसके जीवन में आनंद का राज्य स्थापित करती हैं। “ओम्” के साथ उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे जीवन के दुःख-संकट स्वयं आकर दूर करें। अंतिम दोहराव में यह भाव फिर पुष्ट होता है कि माँ की शरण में आने वाला भक्त कभी निराश नहीं होता।
“चामुण्डा माता की आरती” हमें सिखाती है कि माँ अधर्म-नाशिनी, संकट-हरिणी और भक्त-वत्सला हैं। उनकी भक्ति से भय, बाधा, नकारात्मकता और पाप दूर होते हैं, जबकि साहस, शांति, सिद्धि और आनंद जीवन में प्रवेश करते हैं। जो भक्त नियमित श्रद्धा और समर्पण से इस आरती का पाठ करता है, वह माँ की कृपा से सुरक्षित रहता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ता है।
चामुण्डा माता की आरती – Chamunda Mata Ki Aarti
ॐ जय चामुण्डा माता, मैया जय चामुण्डा माता ।
शरण आए जो तेरे… सब कुछ पा जाता ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
चण्ड मुण्ड दो राक्षस, हुए है बलशाली ।
उनको तुमने मारा क्रोध दृष्टि डाली ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
चौसठ योगिनी आकर, तांडव नृत्य करे ।
बावन भैरो झूमे, विपदा आन हरे ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
शक्ति धाम कहाती, पीछे शिव मंदर ।
ब्रह्मा विष्णु नारद, मंत्र जपे अंदर ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
सिंहराज यहां रहते, घंटा ध्वनि बाजे ।
निर्मल धारा जल की, वंडेर नदी साजे ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
क्रोध रूप में खप्पर, खाली नहीं रहता ।
शांत रूप जो ध्यावे, आनंद भर देता ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
हनुमत बाला योगी, ठाढ़े बलशाली ।
कारज पूरण करती, दुर्गा महाकाली ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
रिद्धि सिद्धि देकर, जन के पाप हरे ।
शरणागत जो होता, आनंद राज करे ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
शुभ गुण मंदिर वाली, ‘ओम’ कृपा कीजे ।
दुख जीवन के संकट, आकर हर लीजे ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
ॐ जय चामुण्डा माता, मैया जय चामुण्डा माता ।
शरण आए जो तेरे… सब कुछ पा जाता ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…
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