एकादशी माता जी की आरती – Ekadashi Mata Ki Aarti

एकादशी माता जी की आरती का – सार (भावार्थ)

एकादशी माता जी की आरती सनातन धर्म में व्रत, भक्ति और मोक्ष की दिव्य परंपरा को सुंदर रूप से प्रस्तुत करती है। यह आरती भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रिय तिथि एकादशी की महिमा, उसके व्रत-फल और पूरे वर्ष आने वाली सभी एकादशियों के आध्यात्मिक महत्व को सरल और भक्तिपूर्ण शब्दों में प्रकट करती है।

आरती की शुरुआत में एकादशी माता की जय-जयकार करते हुए बताया गया है कि जो भक्त विष्णु पूजा और एकादशी व्रत को श्रद्धा से धारण करता है, उसे आत्मिक शक्ति, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि इंद्रिय संयम, भक्ति और आत्मशुद्धि का माध्यम है।

आगे माता से प्रार्थना की जाती है कि वे भक्तों को सच्ची भक्ति, यश और शास्त्रसम्मत ज्ञान प्रदान करें। शास्त्रों में एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी बताया गया है, जो साधक के जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाई देती है।

इस आरती में पूरे वर्ष आने वाली सभी एकादशियों के नाम और उनके फल का क्रमबद्ध वर्णन मिलता है, जिससे भक्तों को धर्म का पूर्ण बोध होता है:

  • मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी को विश्व का उद्धार करने वाली कहा गया है,
    वहीं शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली है।
  • पौष मास में कृष्ण पक्ष की सफला और शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी संतान सुख और आनंद देती हैं।
  • माघ मास में षटतिला और जया एकादशी पापों का नाश कर विजय प्रदान करती हैं।
  • फाल्गुन में विजया और आमलकी,
    चैत्र में पापमोचनी और कामदा—ये सभी पापों से मुक्ति और धन-धर्म की वृद्धि करने वाली मानी गई हैं।
  • वैशाख की वरूथिनी, ज्येष्ठ की मोहिनी और निर्जला,
    विशेष रूप से निर्जला एकादशी को सभी सुख देने वाली श्रेष्ठ एकादशी बताया गया है।
  • आषाढ़ की योगिनी और देवशयनी, श्रावण की कामिका और पवित्रा, भाद्रपद की अजा और परिवर्तिनी, आश्विन की इंद्रा, कार्तिक की रमा और देवोत्थानी, मार्गशीर्ष की परमा और पद्मिनी— ये सभी एकादशियाँ अलग-अलग रूप में दुख, दरिद्रता, पाप और भवसागर से पार लगाने वाली हैं।

आरती में यह भाव विशेष रूप से उभरता है कि एकादशी माता नैया पार लगाने वाली करुणामयी शक्ति हैं, जो भक्त को संसार के बंधनों से मुक्त कर प्रभु श्रीविष्णु के चरणों तक पहुँचाती हैं।

अंत में कहा गया है कि जो कोई भी श्रद्धा और भक्ति के साथ एकादशी माता की आरती करता है, वह निश्चित रूप से स्वर्गलोक और परम कल्याण को प्राप्त करता है।

सार रूप में

एकादशी माता की यह आरती व्रत, संयम, भक्ति और मोक्ष का संपूर्ण मार्गदर्शन है। यह भक्त को पूरे वर्ष की एकादशियों का स्मरण कराकर जीवन को पवित्र, अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है। एकादशी व्रत केवल आहार त्याग नहीं, बल्कि अहंकार, पाप और अज्ञान के त्याग का पवित्र साधन है।
ॐ जय एकादशी माता! 🙏✨

एकादशी माता जी की आरती – Ekadashi Mata Ki Aarti

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी…॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी…॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी…॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में, शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी…॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी…॥

शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी , अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी…॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होयपवित्रा, आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी…॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी…॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी…॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती, पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी…॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी, दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥


एकादशी माता जी की इस पावन आरती को पढ़कर यदि आपके मन को शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई हो, तो कृपया नीचे “जय एकादशी माता” लिखकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। इस आरती को अपने परिवारजनों, मित्रों और सभी विष्णु भक्तों के साथ अवश्य शेयर करें, ताकि एकादशी माता की कृपा और व्रत का पुण्य सभी तक पहुँचे। आपके मनोकामनाओं की पूर्ति हो, जीवन में सुख-शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो—
एकादशी माता जी की जय! 🌸🙏

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