आरती श्री गणपति जी – सार (भावार्थ)
गणपति की सेवा मंगल मेवा यह श्री गणपति जी की आरती भगवान गणेश की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप, उत्पत्ति, शक्तियों और भक्तों पर उनकी असीम कृपा को भावपूर्ण रूप से प्रकट करती है। इस आरती का मूल संदेश यह है कि गणपति जी की सच्चे मन से की गई सेवा और पूजा जीवन के सभी विघ्नों को दूर कर देती है तथा मंगल, सुख और सफलता प्रदान करती है।
आरती की शुरुआत में बताया गया है कि गणपति की सेवा स्वयं में मंगलमय फल देने वाली होती है। जो भक्त श्रद्धा और समर्पण से उनकी आराधना करता है, उसके जीवन से सभी बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं। केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि तीनों लोकों के समस्त देवता भी गणपति जी के द्वार पर नित्य प्रार्थना करते हैं, क्योंकि वे विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य हैं।
आगे आरती में भगवान गणेश के साथ रिद्धि और सिद्धि के वाम-दक्षिण में विराजमान होने का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि गणपति जी के साथ समृद्धि, सफलता और सिद्धियाँ स्वयं उपस्थित रहती हैं। आनंद और उल्लास के वातावरण में भक्त धूप, दीप और आरती लेकर जयकार करते हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
आरती में गणपति जी के प्रिय गुड़ के मोदक और उनके मूषक वाहन का सुंदर वर्णन है। उनके सौम्य, करुणामय और शांत स्वरूप को देखकर सभी विघ्न भयभीत होकर दूर भाग जाते हैं। यह दर्शाता है कि केवल गणपति जी का स्मरण मात्र भी नकारात्मक शक्तियों को समाप्त कर देता है।
भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्म का वर्णन किया गया है, जब माता दुर्गा का मन आनंद से भर गया। उनके जन्म के अवसर पर देवताओं ने उत्सव मनाया, इंद्र ने दिव्य बाजे बजवाए और सभी देवगणों ने मिलकर मंगल गान किया। भगवान शिव के आनंद से संपूर्ण ब्रह्मांड में शुभता फैल गई और गणपति जी का नाम सुनते ही विघ्न नष्ट होने लगे।
आरती में ब्रह्मा, विधाता, अप्सराओं और वेदों द्वारा भी गणपति जी की महिमा का वर्णन है। ब्रह्मा जी ने उन्हें विघ्न विनाशक नाम दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गणपति जी स्वयं वेदों द्वारा पूजित और मान्य हैं।
एकदंत, गजवदन, विनायक और त्रिनयन जैसे उनके दिव्य रूपों का वर्णन उनके अद्भुत, अनूप और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाता है। उनके विशाल उदर और प्रसन्न मुख को देखकर देवता और चंद्रमा भी मुस्कुराने लगते हैं। चंद्रदेव को दिए गए शाप और उसके प्रभाव का उल्लेख यह सिखाता है कि गणपति जी न्यायप्रिय होते हुए भी करुणामय हैं।
आरती में यह भी बताया गया है कि जो भक्त प्रातःकाल उठकर गणपति जी का ध्यान और जप करता है, उसके सभी कार्य सफल होते हैं। जो व्यक्ति पूजा के समय आरती गाता है, उसे यश, सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
अंत में स्पष्ट संदेश दिया गया है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति जी की पूजा करने से सभी कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं। इसलिए सभी भक्त हाथ जोड़कर गणपति जी की स्तुति करते हैं और उनके चरणों में समर्पित हो जाते हैं।
निष्कर्ष
यह आरती हमें यह सिखाती है कि भगवान गणेश श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उनकी सेवा जीवन में सुख, शांति, सफलता और समृद्धि लाती है। जो भी भक्त सच्चे मन से गणपति जी का स्मरण करता है, उसके जीवन में कोई भी विघ्न स्थायी नहीं रह सकता।
🙏 जय श्री गणपति जी 🙏
गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती – Ganpati Ki Sewa Mangal Meva Lyrics
गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।
तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥१॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।
धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥२॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।
सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥३॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।
लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥४॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।
श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥५॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।
देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥६॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।
पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥७॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।
चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥८॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं
पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥९॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।
सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥१०॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा…..॥
प्रसिद्ध “ गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती ” – वीडियो :
भगवान श्री गणपति जी की यह पावन आरती हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से किया गया स्मरण जीवन के हर विघ्न को दूर कर देता है। यदि आपको “गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती” का यह भावार्थ प्रिय लगा हो, तो कृपया अपनी श्रद्धा, अनुभव और विचार नीचे कमेंट में अवश्य साझा करें।
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🙏 गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया 🙏