गौमाता की आरती – Gau Mata Aarti

गौमाता की आरती – सार (भावार्थ)

गौमाता की आरती सनातन धर्म में गौ के उस दिव्य और मातृत्वपूर्ण स्वरूप की वंदना है, जिसे सम्पूर्ण विश्व की धैर्यधारक, पालनकर्त्री और कल्याणदायिनी माना गया है। यह आरती गौमाता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि धर्म, करुणा, पोषण और मोक्ष की सजीव प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

आरती की शुरुआत श्री गैय्या मैय्या की स्तुति से होती है, जो पूरे संसार को धैर्य और स्थिरता प्रदान करने वाली हैं। गौमाता को विश्व की आधारशिला कहा गया है, जिनकी कृपा से सृष्टि का संतुलन बना रहता है और जीवन को सहारा मिलता है।

आगे गौमाता को अर्थ, काम, धर्म और मोक्ष—चारों पुरुषार्थ प्रदान करने वाली बताया गया है। वे निष्कलंक, अविचल और मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली हैं। देवता हों या मनुष्य, सभी के सौभाग्य की विधाता गौमाता हैं। वे भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय हैं और नंद बाबा की छाया में पूज्य मानी जाती हैं—इससे उनका श्रीकृष्ण से गहरा और पावन संबंध प्रकट होता है।

आरती में गौमाता को सम्पूर्ण विश्व की पालक माता कहा गया है। वे अपने मधुर और अमृततुल्य दुग्ध से सबका पोषण करती हैं। उनका दूध केवल शरीर को नहीं, बल्कि मन और बुद्धि को भी बल देता है। रोग, शोक और संकट से रक्षा करने वाली गौमाता को भवसागर पार कराने वाली दृढ़ नैया के रूप में स्मरण किया गया है।

अगले चरण में गौमाता की आरोग्यदायिनी शक्ति का वर्णन मिलता है। वे आयु, तेज, स्वास्थ्य और शक्ति का विकास करती हैं तथा दुख, दीनता और दरिद्रता का नाश करती हैं। गौसेवा से जीवन में सुख, समृद्धि और विवेकपूर्ण बुद्धि का प्रकाश होता है, जिससे मनुष्य सही और गलत का भेद समझ पाता है।

आरती का एक अत्यंत मार्मिक भाव यह है कि चाहे कोई सेवक दुखदायी ही क्यों न हो, गौमाता फिर भी समान प्रेम से अमृत समान दूध प्रदान करती हैं। वे शत्रु और मित्र में कोई भेद नहीं करतीं, बल्कि सभी को सुख देने वाली, स्नेह से परिपूर्ण और विश्वविजयी मातृस्वभाव की प्रतीक हैं।

अंत में पुनः गौमाता की आरती गाकर यह भाव दृढ़ किया गया है कि वे सम्पूर्ण विश्व के धैर्य की रक्षा करने वाली, करुणा और सहनशीलता की जीवंत मूर्ति हैं।

सार रूप में

गौमाता की यह आरती करुणा, पोषण, धर्म और समभाव का दिव्य संदेश देती है। यह हमें सिखाती है कि गौसेवा और गौभक्ति से जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, सद्बुद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। गौमाता सनातन संस्कृति की आत्मा हैं और उनकी आराधना मानव जीवन को धर्ममय और करुणामय बनाती है।
जय गौमाता! 🐄🙏

गौमाता की आरती – Gau Mata Aarti

आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्व धैय्या की।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…..॥

अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी।
सुर मानव सौभाग्या विधायिनी, प्यारी पूज्य नन्द छैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…..॥

अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता, मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता।
रोग शोक संकट परित्राता, भवसागर हित दृढ नैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…..॥

आयु ओज आरोग्य विकाशिनी, दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी, विमल विवेक बुद्धि दैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

सेवक हो चाहे दुखदाई, सम पय सुधा पियावति माई।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी, स्नेह स्वभाव विश्व जैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…..॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्व धैय्या की।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…..॥


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जय गौमाता! 🐄🙏

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