हर हर महादेव आरती – सत्य, सनातन, सुंदर – Har Har Mahadev Aarti – Satya Sanatan Sundar

हर हर महादेव आरती – सत्य, सनातन, सुंदर – सार (भावार्थ)

“हर हर महादेव आरती” भगवान महादेव के सर्वव्यापक, अनंत, करुणामय और रहस्यमय स्वरूप का अत्यंत गहन व भावपूर्ण वर्णन करती है। यह आरती शिव को केवल संहारक नहीं, बल्कि सृष्टि के रक्षक, पालक और परम कल्याणकारी ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती है। इसके प्रत्येक पद में शिव के निर्गुण–सगुण, योगी–भोगी और सौम्य–रुद्र रूप का सुंदर संतुलन दिखाई देता है।

आरती की शुरुआत में भगवान शिव को सत्य, सनातन और सुंदर कहा गया है—वे सबके स्वामी हैं, जो अविकारी, अविनाशी और अजन्मा होकर भी हर जीव के अंतर में विराजमान हैं। शिव का यह स्वरूप बताता है कि वे समय और परिवर्तन से परे अंतर्यामी परमात्मा हैं।

आगे शिव को आदि, अनंत और निरोगी बताया गया है—जो नाम और रूप से परे, शुद्ध, अचल और पापों का नाश करने वाले हैं। उनका यह रूप दर्शाता है कि शिव अज्ञान और अधर्म के अंधकार को मिटाने वाले प्रकाश हैं।

आरती में शिव को त्रिमूर्ति स्वरूप में नमन किया गया है—वे ही ब्रह्मा (सृष्टि के कर्ता), विष्णु (पालनकर्ता) और महेश (संहारकर्ता) हैं। इसका भाव यह है कि सृष्टि का हर कार्य शिव की ही शक्ति से संचालित होता है।

शिव को रक्षक, भक्षक और प्रेरक कहा गया है—वे भक्तों की रक्षा करते हैं, अधर्म का नाश करते हैं और सबको कर्मपथ पर प्रेरित करते हैं। औढरदानी शिव बिना भेदभाव के अपने भक्तों को वरदान देते हैं, फिर भी वे साक्षी भाव में रहकर अहंकार से रहित रहते हैं।

आरती का एक सुंदर भाव यह भी है कि शिव मणिमय भवनों के स्वामी होकर भी श्मशान में रमण करते हैं। वे एक ओर योगी और वैरागी हैं, तो दूसरी ओर संसार के हर सुख-दुःख से समान रूप से जुड़े हुए हैं। यह शिव के विरक्त और करुणामय स्वरूप को दर्शाता है।

शिव के भयानक रूप का भी वर्णन आता है—कपाल, विष, मुण्डमाला, भस्म और त्रिनेत्र। यह रूप भय उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि यह दिखाने के लिए है कि शिव मृत्यु, काल और अहंकार पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।

साथ ही शिव का सौम्य और शांत स्वरूप भी प्रकट होता है—गंगा को धारण करने वाले, चंद्र को मस्तक पर धारण करने वाले, सुख देने वाले और मन को शांति प्रदान करने वाले। यही शिव का वह रूप है जो भक्तों के हृदय को आकर्षित करता है।

आरती में शिव को निर्गुण और सगुण दोनों कहा गया है—वे रूपरहित होकर भी हर रूप में विद्यमान हैं। वे काल के भी स्वामी हैं और स्वयं कालातीत हैं। यही उन्हें परमेश्वर बनाता है।

अंत में शिव को सच्चिदानंद स्वरूप, करुणा का सागर और संपूर्ण विश्व का रक्षक बताया गया है। भक्त अपने दीन भाव से शिव से प्रार्थना करता है कि वे उसे अपनी शरण में लें, उसकी बुद्धि को निर्मल करें और उसे अपना बना लें।

निष्कर्ष

श्री शिवशंकरजी की आरती भगवान शिव के विरोधाभासी प्रतीत होने वाले किंतु पूर्ण स्वरूप को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रकट करती है—जहाँ रुद्रता और करुणा, संहार और कल्याण, वैराग्य और प्रेम एक साथ विद्यमान हैं। यह आरती भक्त के मन में भक्ति, विनम्रता और आत्मिक शांति का संचार करती है और उसे महादेव की शरण में पूर्ण समर्पण की प्रेरणा देती है।

🔱 हर हर महादेव | ॐ नमः शिवाय 🔱

हर हर महादेव आरती – सत्य, सनातन, सुंदर – Har Har Mahadev Aarti – Satya Sanatan Sundar

हर हर हर महादेव !

सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी।
अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥

हर हर हर महादेव !

आदि, अनन्त, अनामय, अकल, कलाधारी।
अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी॥

हर हर हर महादेव !

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तुम त्रिमूर्तिधारी।
कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥

हर हर हर महादेव !

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औढरदानी।
साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता अभिमानी॥

हर हर हर महादेव !

मणिमय-भवन निवासी, अति भोगी रागी।
सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी॥

हर हर हर महादेव !

छाल-कपाल, गरल-गल, मुण्डमाल व्याली।
चिता भस्मतन त्रिनयन, अयनमहाकाली॥

हर हर हर महादेव !

प्रेत-पिशाच-सुसेवित, पीत जटाधारी।
विवसन विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी॥

हर हर हर महादेव !

शुभ्र-सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर, सुखकारी।
अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि मन-हारी॥

हर हर हर महादेव !

निर्गुण, सगुण, निरञ्जन, जगमय नित्य प्रभो।
कालरूप केवल हर! कालातीत विभो॥

हर हर हर महादेव !

सत्, चित्, आनन्द, रसमय, करुणामय धाता।
प्रेम-सुधा-निधि प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥

हर हर हर महादेव !

हम अतिदीन, दयामय! चरण-शरण दीजै।
सब विधि निर्मल मति कर, अपना कर लीजै॥

हर हर हर महादेव !


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