भगवान बदरीनाथ आरती – जय जय श्री बदरीनाथ – Jai Jai Shri Badarinath

भगवान बदरीनाथ आरती का सार (भावार्थ)

भगवान बदरीनाथ जी की यह आरती उनके योगमय, तपस्वी और करुणामय स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। आरती में प्रभु को योग में लीन, ध्यानस्थ और ब्रह्मज्ञान से युक्त बताया गया है, जो निर्गुण होते हुए भी सगुण रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। उनका स्वरूप दिव्य, शांत और अत्यंत अनुपम है, जिसे देखकर देवता, ऋषि, ज्ञानी और विज्ञानी सभी नतमस्तक हो जाते हैं।

इस आरती में बताया गया है कि भगवान बदरीनाथ के चरणों की सेवा स्वयं देवता भी करते हैं। उनका पावन चरित्र इतना महान है कि उसका वर्णन करते हुए वाणी भी संकोच करती है। उनके मस्तक पर छत्र शोभायमान है, ललाट पर विशाल तिलक है और गले में मणि-मुक्ताओं की सुंदर माला विराजमान है, जो उनके वैकुण्ठीय ऐश्वर्य और दिव्यता का प्रतीक है।

आरती यह भाव प्रकट करती है कि भगवान बदरीनाथ शरणागत भक्तों के रक्षक और अत्यंत दयालु हैं। जो भी श्रद्धा से उनके चरणों में प्रणाम करता है, उसे सुख, शांति और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। उनका स्मरण करने मात्र से भक्तों के सांसारिक और आध्यात्मिक सभी कार्य सिद्ध होने लगते हैं।

आरती में यह भी बताया गया है कि भगवान बदरीनाथ की महिमा का गुणगान स्वयं शिव, शेषनाग, इंद्र, चंद्र और सूर्य जैसे देवता भी करते हैं। अंत में भक्त विनम्र भाव से हाथ जोड़कर प्रभु से कृपा की प्रार्थना करता है और उनके चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करता है।

निष्कर्ष

यह आरती हमें सिखाती है कि भगवान बदरीनाथ ज्ञान, योग, करुणा और वैराग्य के साक्षात स्वरूप हैं। उनका स्मरण मन को शुद्ध करता है, अहंकार को दूर करता है और जीवन को आध्यात्मिक दिशा देता है। श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ की गई उनकी आराधना से जीवन में शांति, पुण्य और मोक्ष की अनुभूति होती है।

🙏 जय जय श्री बदरीनाथ 🙏

भगवान बदरीनाथ आरती – जय जय श्री बदरीनाथ – Bhagwan Badrinath Aarti

जय जय श्री बदरीनाथजयति योग ध्यानी॥
जय जय श्री बदरीनाथजयति योग ध्यानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥

निर्गुण सगुण स्वरूप,मेधवर्ण अति अनूप।
सेवत चरण सुरभूप,ज्ञानी विज्ञानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥

झलकत है शीश छत्र,छवि अनूप अति विचित्र।
बरनत पावन चरित्रसकुचत बरबानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥

तिलक भाल अति विशाल,गल में मणि मुक्त-माल।
प्रनतपाल अति दयाल,सेवक सुखदानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥

कानन कुण्डल ललाम,मूरति सुखमा की धाम।
सुमिरत हों सिद्धि काम,कहत गुण बखानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥

गावत गुण शम्भु, शेष,इन्द्र, चन्द्र अरु दिनेश।
विनवत श्यामा हमेशजोरी जुगल पानी॥

जय जय श्री बदरीनाथ…..॥


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