जयति मंगलागार… आरती – सार (भावार्थ)
यह पावन आरती भगवान श्री हनुमान जी के दिव्य, पराक्रमी और भक्तवत्सल स्वरूप का अत्यंत गूढ़ एवं भावपूर्ण वर्णन करती है। इसमें हनुमान जी को संसार के समस्त मंगलों का आधार, संकटों का नाश करने वाला और रामभक्ति की जीवंत प्रतिमूर्ति बताया गया है। यह आरती केवल स्तुति नहीं, बल्कि हनुमान जी के चरित्र, शक्ति और सेवा-भाव का आध्यात्मिक सार प्रस्तुत करती है।
आरती की शुरुआत में हनुमान जी को मंगल का आगार और संसार का रक्षक कहा गया है। उनका वानर रूप केवल बाहरी स्वरूप नहीं, बल्कि असीम शक्ति और दिव्य सामर्थ्य का प्रतीक है। वे अपने तेज से पृथ्वी का भार हरने वाले और शिव के अंश (पुरारी के स्वरूप) हैं। श्रीराम के प्रति उनका क्रोध अग्नि-ज्वाला के समान है, जो अधर्म, अज्ञान और असुर प्रवृत्तियों को भस्म कर देता है।
आगे उन्हें अंजनी माता के आनंदमय पुत्र और पवनदेव के अंश के रूप में स्मरण किया गया है। हनुमान जी को सुग्रीव जैसे दुखी भक्तों का एकमात्र सहारा बताया गया है, जो शरण में आए हुए की पीड़ा को हर लेते हैं। वे राक्षसों और अधर्मी शक्तियों के लिए कालाग्नि समान भयानक, जबकि सिद्ध, देवता और सज्जनों के लिए आनंद के सागर हैं।
इस आरती में हनुमान जी को रुद्रों में अग्रणी, विश्ववंदनीय और महान योद्धाओं के अधिपति के रूप में वर्णित किया गया है। वे वेदों के सामगान में निपुण, काम-वासनाओं पर विजय पाने वाले और सदैव रामहित में प्रवृत्त रहने वाले आदर्श भक्त हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति वही है, जो प्रभु की सेवा में समर्पित हो।
हनुमान जी को संग्राम में विजय प्राप्त करने वाला, श्रीराम का संदेशवाहक और कौशल, मंगल तथा कल्याण का दूत कहा गया है। श्रीराम के वियोग में संतप्त भरत सहित समस्त नर-नारियों के लिए वे शीतलता और आश्वासन देने वाले हैं। उनकी वाणी और उपस्थिति दुखी हृदयों को शांति प्रदान करती है।
आरती के अंतिम भाव में हनुमान जी को सीता-राम के सिंहासनासीन स्वरूप को देखकर आनंद से नृत्य करने वाला परम भक्त बताया गया है। वे श्रीराम के ऐश्वर्य, शोभा और राज्य में सदैव रमण करने वाले हैं। तुलसीदास रचित रामचरितमानस के आदर्श भक्त के रूप में हनुमान जी हर उस स्थान पर विहार करते हैं, जहाँ रामकथा और रामनाम का स्मरण होता है।
निष्कर्ष
यह आरती हमें सिखाती है कि हनुमान जी शक्ति, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम हैं। जो भक्त श्रद्धा से इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है तथा मन में रामभक्ति, साहस और मंगल भाव जागृत होता है।
🙏 जय श्री हनुमान | जय श्री राम 🚩
श्री पवनसुत हनुमान आरती – Shri Pavanasuta Hanuman Aarti
जयति मंगलागार, संसार, भारापहर, वानराकार विग्रह पुरारी।
राम-रोषानल, ज्वालमाला मिषध्वान्तचर-सलभ-संहारकारी॥
जयति मरुदन्जनामोद-मन्दिर, नतग्रीवसुग्रीव-दुःखैकबन्धो।
यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर, सिद्ध-सुर-सज्जनानन्दसिन्धो॥
जयति रुद्राग्रणी, विश्ववन्द्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती।
सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी, रामहित, रामभक्तानुवर्ती॥
जयति संग्रामजय, रामसन्देशहर, कौशला-कुशल-कल्याणभाषी।
राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि नर-नारि-शीतलकरणकल्पशाषी॥
जयति सिंहासनासीन सीतारमण, निरखि निर्भर हरष नृत्यकारी।
राम संभ्राज शोभा-सहित सर्वदा तुलसि-मानस-रामपुर-विहारी॥
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🙏 जय बजरंगबली | जय श्री राम 🚩