कामाख्या देवी की आरती – Kamakhya Devi Ki Aarti

श्री कामाख्या देवी की आरती का – सार (भावार्थ)

यह आरती महाशक्ति स्वरूपा श्री कामाख्या देवी की करुणा, रहस्यमय शक्ति और लोक-कल्याणकारी स्वरूप का भावपूर्ण गुणगान है। आरती का मूल संदेश यह है कि देवी कामाख्या जगत का उद्धार करने वाली, देवताओं द्वारा सेवित और समस्त सृष्टि को सुख प्रदान करने वाली आदिशक्ति हैं। उनके दर्शन मात्र से भक्त के जीवन में शांति, संतोष और मंगल का संचार होता है।

आरती के आरंभ में वेदों और पुराणों में वर्णित देवी की महिमा का उल्लेख है। उन्हें “योनि-रूप महारानी” कहा गया है—जो सृष्टि की मूल उत्पत्ति, सृजन-शक्ति और नारीत्व की दिव्यता का प्रतीक है। ब्रह्मा आदि देवगण उनकी स्तुति करते हैं, और जो भी भक्त श्रद्धा से उनके दर्शन करता है, वह सुख, शांति और आध्यात्मिक तृप्ति का अनुभव करता है। यह दर्शाता है कि कामाख्या देवी केवल उपासना की देवी नहीं, बल्कि सृजन और जीवन-ऊर्जा की अधिष्ठात्री हैं।

अगले पद में देवी को दक्षसुता जगदम्बा भवानी कहा गया है और यह बताया गया है कि वे सदा भगवान शिव की अर्धांगिनी होकर विराजमान रहती हैं। यह शिव-शक्ति के अद्वैत भाव को दर्शाता है—जहाँ चेतना (शिव) और ऊर्जा (शक्ति) मिलकर सृष्टि का संचालन करते हैं। देवी को समस्त जगत का उद्धार करने वाली कहा गया है, जो भक्तों को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती हैं। इसलिए उन्हें सिद्धिदात्री के रूप में नमन किया गया है।

आरती में देवी के दिव्य स्वरूप का सजीव चित्रण मिलता है—उनके तीन नेत्र, हाथों में डमरु, और मस्तक पर गोरोचन तिलक। यह रूप दर्शाता है कि देवी समय (भूत-वर्तमान-भविष्य), सृजन-संरक्षण-संहार और ज्ञान-शक्ति-कर्म—तीनों को एक साथ धारण करती हैं। उनका तेज ऐसा बताया गया है कि तीनों लोक उनके रूप के सामने लज्जित प्रतीत होते हैं, क्योंकि वे लोक-सेविका, करुणामयी और सर्वकल्याणकारी हैं।

अगले पद में उनके वीर और रक्षक स्वरूप का वर्णन है—रक्त पुष्पों की माला, सिंह (केहरि) वाहन, और विशाल खड्ग। यह बताता है कि देवी भक्तों की प्रतिपालक हैं, अन्याय और असुर प्रवृत्तियों का विनाश करती हैं, तथा धर्म की रक्षा करती हैं। उनका यह रूप करुणा के साथ-साथ शक्ति और न्याय का संतुलन दर्शाता है—जहाँ वे भक्तों की रक्षा करती हैं और अधर्म का अंत करती हैं।

समापन में कवि (गोपाल) देवी के चरणों में नतमस्तक होकर स्वीकार करता है कि त्रिपुरारी (शिव) भी उनकी महिमा को पूर्णतः नहीं जान पाते। जो कुछ कहा गया है, वह भी विचार करने पर सत्य सिद्ध होता है, और समस्त लोक उनकी जय-जयकार करते हैं। यह दर्शाता है कि कामाख्या देवी की महिमा शब्दों से परे है—वे असीम, अनिर्वचनीय और सर्वव्यापी शक्ति हैं।

श्री कामाख्या देवी की यह आरती सृजन, करुणा, शक्ति और मोक्ष का दिव्य संदेश देती है। यह सिखाती है कि देवी जीवन-ऊर्जा की मूल अधिष्ठात्री, शिव-शक्ति की एकात्म अभिव्यक्ति और समस्त जगत का उद्धार करने वाली हैं। उनके दर्शन और भक्ति से सुख, सिद्धि, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। जो भक्त श्रद्धा और समर्पण से इस आरती का पाठ करता है, वह सांसारिक भय से मुक्त होकर शक्ति, विवेक और शांति के पथ पर अग्रसर होता है।

कामाख्या देवी की आरती – Kamakhya Devi Ki Aarti

आरती कामाख्या देवी की ।
जगत् उधारक सुर सेवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…

गावत वेद पुरान कहानी ।
योनिरुप तुम हो महारानी ॥
सुर ब्रह्मादिक आदि बखानी ।
लहे दरस सब सुख लेवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…

दक्ष सुता जगदम्ब भवानी ।
सदा शंभु अर्धंग विराजिनी ॥
सकल जगत् को तारन करनी ।
जै हो मातु सिद्धि देवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…

तीन नयन कर डमरु विराजे ।
टीको गोरोचन को साजे ॥
तीनों लोक रुप से लाजे ।
जै हो मातु ! लोक सेवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…

रक्त पुष्प कंठन वनमाला ।
केहरि वाहन खंग विशाला ॥
मातु करे भक्तन प्रतिपाला ।
सकल असुर जीवन लेवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…

कहैं गोपाल मातु बलिहारी ।
जाने नहिं महिमा त्रिपुरारी ॥
सब सत होय जो कह्यो विचारी ।
जै जै सबहिं करत देवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की…


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