नैना देवी जी की आरती – Naina Devi Ji Ki Aarti

नैना देवी जी की आरती का – सार (भावार्थ)

नैना देवी जी की आरती, माँ के अद्भुत, अलौकिक और करुणामय स्वरूप का हृदयस्पर्शी गुणगान है। आरती की शुरुआत में भक्त माँ से विनयपूर्वक निवेदन करता है कि वे अपने दिव्य रूप में प्रकट हों, क्योंकि भक्त अपना तन, मन और धन सब कुछ माँ पर अर्पित करने को तत्पर है। यह भाव पूर्ण समर्पण और श्रद्धा को दर्शाता है।

आरती में माँ के सुंदर और भव्य भवन का मनोहारी वर्णन मिलता है। नक्काशीदार खंभे, रंग-बिरंगे द्वार और अद्भुत चित्रकारी माँ के धाम की दिव्यता को प्रकट करते हैं। यह संकेत करता है कि माँ का निवास केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और सौंदर्य का पवित्र केंद्र है, जहाँ पहुँचकर भक्त का मन स्वतः शांति से भर जाता है।

माँ के दरबार में झांझ, मृदंग, शहनाई, नगाड़ा, ढोलक और तबले की मधुर ध्वनियाँ गूँजती हैं। नौबत का बजना यह दर्शाता है कि माँ के द्वार पर सदा उत्सव, आनंद और मंगल वातावरण बना रहता है। संगीत और नाद के माध्यम से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब जाता है।

आरती में माँ के पीले चोले, लाल किनारी, लाल ध्वजा और लाल मुकुट का वर्णन उनके शक्तिस्वरूप और राजसी वैभव को प्रकट करता है। उनका रूप इतना मनमोहक है कि भक्त की दृष्टि वहीं ठहर जाती है—अर्थात् माँ का दर्शन आत्मा को तृप्त कर देता है।

भक्त पान, सुपारी, नारियल और ध्वजा जैसी पारंपरिक पूजन सामग्री लेकर माँ के चरणों में उपस्थित होते हैं। बालक, वृद्ध, स्त्री और पुरुष—सभी वर्गों की भीड़ यह बताती है कि माँ नैना देवी सबकी माता हैं और सभी पर समान कृपा बरसाती हैं। हर ओर जय-जयकार से वातावरण गूंज उठता है।

आरती में भक्ति के विविध रूप दिखाई देते हैं—कोई गाता है, कोई वाद्य बजाता है, कोई ध्यान करता है, तो कोई माँ के आंगन में बैठकर नाम-स्मरण करता है और कोई नृत्य के माध्यम से भक्ति प्रकट करता है। यह दर्शाता है कि माँ की आराधना के अनेक मार्ग हैं, पर सभी का लक्ष्य माँ की कृपा पाना है।

अंत में भक्त अपनी-अपनी कामनाएँ माँ के समक्ष रखते हैं—कोई संतान की इच्छा करता है, कोई धन-सम्पत्ति, कोई जीवनसाथी या उत्तम स्वास्थ्य। आरती यह विश्वास दिलाती है कि माँ नैना देवी दयालु, करुणामयी और मनोकामना पूर्ण करने वाली हैं; वे अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनती हैं।

“नैना देवी जी की आरती” हमें यह सिखाती है कि माँ नैना देवी शक्ति, सौंदर्य, करुणा और आनंद का सजीव स्वरूप हैं। उनकी आराधना से भक्ति, उल्लास और विश्वास का संचार होता है। जो भक्त श्रद्धा, प्रेम और समर्पण के साथ इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में माँ की कृपा से सुख, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

नैना देवी जी की आरती – Naina Devi Ji Ki Aarti

तेरा अद्भुत रूप निराला, आजा मेरी नैना माई।
तुझ पै तन-मन-धन सब वारूँ आजा मेरी माई॥

सुन्दर भवन बनाया तेरा, तेरी शोभा न्यारी,
नीके-नीके खम्बे लागे, अद्भुत चित्तर कारी।
तेरे रंग बिरंगा द्वारा॥ आजा..

झांझा और मिरदंगा बाजे और बाजे शहनाई,
तुरई नगाड़ा ढोलक बाजे, तबला शब्द सुनाई।
तेरा द्वार पै नौबत बाजे। आजा..

पीला चोला जरद किनारी लाल ध्वजा फहराये,
सिर लालो दा मुकुट विराजे निगाह नहिं ठहराये।
तेरा रूप न वरना जाये। आजा..

पान सुपारी ध्वजा, नारियल भेंट तिहारी लागे,
बालक बूढ़े नर नारी की भीड़ खड़ी तेरे आगे।
तेरी जय जयकार मनावे। आजा..

कोई गाये कोई बजाये कोई ध्यान लगाये,
कोई बैठा तेरे आंगन नाम की टेर सुनाये।
कोई नृत्य करे तेरे आगे। आजा..

कोई मांगे बेटा बेटी किसी को कंचन माया,
कोई मांगे जीवन साथी, कोई सुन्दर काया।
भक्तों किरपा तेरी मांगे। आजा..


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