नर्मदा जी की आरती – Narmada Mata Ki Aarti

नर्मदा माता की आरती – सार (भावार्थ)

नर्मदा जी की आरती माँ नर्मदा को जगत की आनंददायिनी, पावन और कल्याणकारी शक्ति के रूप में नमन करती है। इस आरती में माँ नर्मदा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात् देवी, शिव-शक्ति और विष्णु-तत्व का संगम माना गया है, जो समस्त सृष्टि का पालन-पोषण करती हैं और भक्तों को भवबंधन से मुक्त करती हैं।

आरती का आरंभ “ॐ जय जगदानन्दी” से होता है, जहाँ माँ नर्मदा को आनंद का मूल स्रोत और जगत को सुख देने वाली देवी कहा गया है। उन्हें रेवा नाम से भी स्मरण किया गया है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों की शक्ति से संयुक्त हैं। इस प्रकार माँ नर्मदा को सृष्टि, पालन और संहार की एकीकृत शक्ति माना गया है।

आगे आरती में माँ को वरदायिनी देवी बताया गया है, जिनकी सेवा देवता, ऋषि, मुनि और मनुष्य समान श्रद्धा से करते हैं। नारद, शारदा जैसे दिव्य तत्वों का उल्लेख यह दर्शाता है कि माँ नर्मदा ज्ञान, संगीत और भक्ति की भी अधिष्ठात्री हैं। उनकी कृपा से भक्तों को सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

आरती के मध्य भाग में माँ नर्मदा के दिव्य स्वरूप और लीला का सुंदर चित्रण है। उनके वाहन, वीणा-वादन, ताल-मृदंग और मधुर नाद का वर्णन यह बताता है कि माँ नर्मदा का प्रवाह केवल जल का नहीं, बल्कि आनंद, संगीत और चेतना का प्रवाह है। उनके चरणों में संपूर्ण सृष्टि झूमती और रमण करती है।

इसके बाद माँ को सकल भुवनों पर विराजमान बताया गया है, जो दिन-रात भक्तों को आनंद प्रदान करती हैं। गंगा और शंकर के साथ उनका संबंध यह संकेत देता है कि नर्मदा माता शिव-भक्ति और वैराग्य की प्रतीक हैं। उनकी सेवा से भवसागर के कष्ट समाप्त हो जाते हैं।

आरती में माँ की पूजा-विधि का भी उल्लेख है—कंचन थाल, अगरबत्ती, कपूर की बाती और रत्न-ज्योति से उनका पूजन किया जाता है। अमरकंठ (अमरकंटक) और नर्मदा के घाटों का स्मरण माँ की पवित्रता और तीर्थ महिमा को दर्शाता है, जहाँ असंख्य दीपों की तरह उनकी कृपा निरंतर प्रकाशित होती रहती है।

अंत में कहा गया है कि जो भक्त नित्य नर्मदा माता की आरती पढ़ते और गाते हैं, वे युगों-युगों तक माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। शिवानंद स्वामी और हरि-नाम के स्मरण के साथ की गई भक्ति से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक शांति, पुण्य और फल की प्राप्ति होती है।

सार रूप में

नर्मदा माता की यह आरती माँ को आनंद, भक्ति, संगीत, ज्ञान और मोक्ष की देवी के रूप में प्रतिष्ठित करती है। यह आरती सिखाती है कि माँ नर्मदा का स्मरण और पूजन जीवन के दुखों को हरकर मन को पवित्र, शांत और भक्तिमय बना देता है।
ॐ जय जगदानन्दी, जय माँ नर्मदा! 🙏

नर्मदा जी की आरती – Narmada Mata Ki Aarti

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा, शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत, झननन झननन रमती राजन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी बाजत ताल मृदंगा, सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी, जपत हरि मन वांछित फल पावें॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥


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