श्री पार्वती माता की आरती का सार (भावार्थ)
पार्वती माता की आरती देवी के मातृत्व, शक्ति, करुणा और कल्याणकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। आरती के प्रारंभ में माता पार्वती को सनातन ब्रह्मस्वरूपिणी देवी बताया गया है, जो अपने भक्तों को शुभ फल प्रदान करने वाली और जीवन में सुख-समृद्धि देने वाली हैं। वे सृष्टि की आधारशिला हैं और समस्त संसार की जननी मानी जाती हैं।
आरती में माता को असुरों का विनाश करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में स्मरण किया गया है। उन्हें जगदम्बा कहा गया है, जो हरि (विष्णु) और हर (शिव) दोनों के गुणों से युक्त हैं और समस्त जगत के जीवन का आधार हैं। माता पार्वती का यह स्वरूप बताता है कि वे सौम्यता और शक्ति का अद्भुत संतुलन हैं।
माता के सिंह वाहन, दिव्य कुण्डल, और नृत्यरत स्वरूप का उल्लेख उनके तेज, साहस और सौंदर्य को दर्शाता है। देवियाँ और देवता उनके गुणगान में मग्न होकर नृत्य करते हैं, जिससे उनका आनंदमयी और उल्लासपूर्ण रूप प्रकट होता है।
आरती में माता के सती स्वरूप का भी स्मरण किया गया है। सतयुग में वे सती के नाम से प्रसिद्ध थीं और हिमालय (हेमांचल) के घर जन्म लेकर सखियों के साथ आनंदमय जीवन व्यतीत करती थीं। यह उनके त्याग, तप और पवित्रता का प्रतीक है।
आगे माता पार्वती को शुम्भ-निशुम्भ जैसे दानवों का संहार करने वाली महाशक्ति बताया गया है, जो आवश्यकता पड़ने पर सहस्र भुजाओं वाला उग्र रूप धारण कर अधर्म का नाश करती हैं। यह दर्शाता है कि माता केवल कोमल नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए प्रचंड शक्ति भी हैं।
आरती में माता को सृष्टि की जननी और भगवान शिव की अर्धांगिनी बताया गया है। नंदी और भृंगी जैसे शिवगण भी उनकी महिमा से मोहित होकर आनंद में लीन रहते हैं। पूरा संसार माता के दिव्य सौंदर्य और करुणा में मग्न हो जाता है।
अंत में आरती यह संदेश देती है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री पार्वती माता की आरती का गायन करता है, वह जीवन में सदा सुखी रहता है और उसे धन, वैभव, शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। माता पार्वती अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और उन्हें कष्टों से मुक्त करती हैं।
पार्वती माता की आरती – Parvati Mata Ki Aarti
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता॥
अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥
जय पार्वती माता॥
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥
जय पार्वती माता॥
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥
जय पार्वती माता॥
शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥
जय पार्वती माता॥
सृष्टि रूप तुही हैजननी, शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता॥
जय पार्वती माता॥
देवन अरज करत हम, चित को लाता।
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥
जय पार्वती माता॥
श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहता, सुख सम्पत्ति पाता॥
जय पार्वती माता॥
यदि श्री पार्वती माता की यह पावन आरती आपके हृदय को स्पर्श कर गई हो, तो कृपया इसे Like करें, अपने परिवार व मित्रों के साथ Share करें, और Comment में “जय पार्वती माता” लिखकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करें। माँ पार्वती आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें 🙏🌸
जय पार्वती माता 🌼