आरती श्री सन्तोषी माँ का – सार (भावार्थ)
सन्तोषी माता आरती भक्तों के जीवन में संतोष, सुख, शांति और समृद्धि का संदेश देने वाली अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। इस आरती में माता सन्तोषी को ऐसे दिव्य स्वरूप में स्मरण किया गया है, जो अपने सेवक भक्तों को सुख-संपत्ति, मानसिक शांति और जीवन की स्थिरता प्रदान करती हैं। आरती का प्रत्येक पद माता की करुणा, सौंदर्य और कृपालु स्वभाव को सरल एवं भावपूर्ण भाषा में प्रस्तुत करता है।
आरती के प्रारंभ में माता सन्तोषी को भक्तों की सच्ची सेवक माना गया है, जो अपने आश्रितों को हर प्रकार का सुख और वैभव प्रदान करती हैं। उनके स्वर्णिम वस्त्र, आभूषणों से सजा हुआ श्रृंगार और हीरा-पन्ना जैसे रत्नों की चमक माता के दिव्य तेज और ऐश्वर्य को दर्शाती है। गेरू लाल छटा से युक्त उनका शरीर कमल के समान सुंदर है, और उनकी मंद मुस्कान करुणा से भरपूर होकर तीनों लोकों का मन मोह लेती है।
आरती में माता को स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान बताया गया है, जहाँ भक्त प्रेमपूर्वक चंवर ढुलाते हैं और धूप-दीप, मधु, मेवा तथा पवित्र भोग अर्पित करते हैं। यह दृश्य माता की राजसी महिमा और भक्तों की निष्ठा को प्रकट करता है। विशेष रूप से गुड़ और चना को माता का परम प्रिय भोग बताया गया है, जो संतोष का प्रतीक है। इसी भाव के कारण माता को “सन्तोषी” कहा गया है, जो अपने भक्तों को संतोष के साथ वैभव भी प्रदान करती हैं।
इस आरती में शुक्रवार को माता का प्रिय दिन बताया गया है, जब भक्तजन कथा, पूजा और भजन में लीन होकर माता की महिमा का श्रवण करते हैं। उस समय मंदिरों में दिव्य ज्योति, मंगल ध्वनि और भक्ति का वातावरण छा जाता है। भक्त स्वयं को माता का बालक मानकर उनके चरणों में शीश नवाते हैं और विनम्र भाव से कृपा की याचना करते हैं।
आरती आगे बताती है कि सच्चे भक्ति भाव से की गई पूजा को माता सहर्ष स्वीकार करती हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। माता सन्तोषी दुख, दरिद्रता, रोग और संकटों का नाश कर अपने भक्तों के घरों को धन-धान्य, सुख और सौभाग्य से भर देती हैं। जो भी श्रद्धा से उनका ध्यान करता है और कथा-पूजा का श्रवण करता है, उसके जीवन में आनंद और सकारात्मकता का प्रवेश हो जाता है।
अंत में माता से यह प्रार्थना की गई है कि जो भक्त उनकी शरण में आता है, उसकी लाज वे सदा रखें और प्रत्येक संकट से उसकी रक्षा करें। यह आरती विश्वास दिलाती है कि दयामयी सन्तोषी माँ अपने शरणागत भक्तों को कभी निराश नहीं करतीं। जो कोई श्रद्धा और विश्वास से सन्तोषी माता की आरती गाता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि, सुख-समृद्धि और जीवन की पूर्णता प्राप्त होती है।
समग्र संदेश
यह आरती हमें सिखाती है कि जीवन में सच्चा सुख केवल भौतिक वैभव में नहीं, बल्कि संतोष, श्रद्धा और विश्वास में निहित है। जो भक्त धैर्य, नियम और भक्ति के साथ माता सन्तोषी का स्मरण करता है, उसके जीवन में स्थायी शांति, समाधान और मंगल का वास अवश्य होता है। 🙏
सन्तोषी माता आरती – Santoshi Mata Aarti
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन को, सुख सम्पत्ति दाता॥
जय सन्तोषी माता॥
सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हों।
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार कीन्हों॥
जय सन्तोषी माता॥
गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे।
मन्द हंसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे॥
जय सन्तोषी माता॥
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरें प्यारे।
धूप दीप मधुमेवा, भोग धरें न्यारे॥
जय सन्तोषी माता॥
गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो।
सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥
जय सन्तोषी माता॥
शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही।
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही॥
जय सन्तोषी माता॥
मन्दिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई॥
जय सन्तोषी माता॥
भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै।
जो मन बसै हमारे, इच्छा फल दीजै॥
जय सन्तोषी माता॥
दुखी दरिद्री, रोग, संकट मुक्त किये।
बहु धन-धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिये॥
जय सन्तोषी माता॥
ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो।
पूजा कथा श्रवण कर, घर आनन्द आयो॥
जय सन्तोषी माता॥
शरण गहे की लज्जा, राखियो जगदम्बे।
संकट तू ही निवारे, दयामयी अम्बे॥
जय सन्तोषी माता॥
सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे।
ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति, जी भरकर पावे॥
जय सन्तोषी माता॥
यदि सन्तोषी माता की आरती ने आपके मन में भक्ति, शांति और संतोष का भाव जगाया हो, तो इसे लाइक व शेयर अवश्य करें, ताकि माता की कृपा और महिमा अधिक लोगों तक पहुँचे। नीचे कमेंट में “जय सन्तोषी माता” लिखकर अपनी श्रद्धा प्रकट करें। ऐसी ही आरती, कथा और भक्ति सामग्री के लिए हमें फॉलो/सब्सक्राइब करना न भूलें। सन्तोषी माता आप सभी के जीवन में सुख, शांति और संतोष प्रदान करें।
जय सन्तोषी माता 🙏🌺