शारदा माता की आरती – सार (भावार्थ)
शारदा माता की आरती माँ शारदा के उस दिव्य स्वरूप का गुणगान है, जो सम्पूर्ण भुवनों में विराजमान होकर ज्ञान, बुद्धि, श्रद्धा और भक्ति का प्रकाश फैलाती हैं। उनकी महिमा अपरम्पार है और भक्तों के कल्याण के लिए ही वे माता रूप में अवतरित होकर संसार का मार्गदर्शन करती हैं। यह आरती माँ के दरबार में नित्य भक्ति अर्पित करने और उनके दर्शन की अभिलाषा से ओत-प्रोत है।
आरती की शुरुआत में माँ शारदा को भक्तों के हित के लिए अवतरित बताया गया है। भक्त संकल्प करता है कि वह माँ के दरबार में नित्य आरती गाएगा, क्योंकि सतत स्मरण से ही जीवन में शुभता और स्थिरता आती है। यहाँ “नित गाऊँ” की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि भक्ति कोई क्षणिक भाव नहीं, बल्कि निरंतर साधना है।
आगे आरती में श्रद्धा को दीपक और प्रीत की बाती बनाकर अर्पित करने की भावना व्यक्त की गई है। आँखों के आँसू तेल के समान हैं—अर्थात सच्ची भक्ति बाहरी वस्तुओं से नहीं, बल्कि अंतर की पवित्र भावना से पूर्ण होती है। इसी समर्पण से भक्त माँ शारदा के दर्शन की कामना करता है।
फिर मन की माला, आँखों के मोती और भाव के फूल चढ़ाने का भाव आता है। यह संकेत है कि माँ शारदा को भौतिक पुष्पों से अधिक निर्मल विचार, शुद्ध मन और सच्चा भाव प्रिय है। जब भक्त भीतर से शुद्ध होता है, तब ही उसे माँ के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।
आरती में जीवन की शक्ति और श्वास को ही भोग बनाकर अर्पित करने की भावना दिखाई गई है। दिन-रात की श्वासें माँ के चरणों में समर्पित कर भक्त अपनी विनय और कृतज्ञता प्रकट करता है। यह बताता है कि सम्पूर्ण जीवन ही माँ की आराधना बन सकता है।
इसके बाद तप को हार, कर्णों को टीका और ध्यान की ध्वजा चढ़ाने का वर्णन है। इसका तात्पर्य है कि साधना, एकाग्रता और तपस्या से ही माँ शारदा की कृपा प्राप्त होती है। ध्यान और तप भक्त के जीवन को उच्च उद्देश्य की ओर ले जाते हैं।
आरती में यह भी कहा गया है कि माँ के भजन और आरती साधु-संतों को सुनाना पुण्यदायी है। माँ का यश गाते हुए भक्त बार-बार उनके चरणों में शीश नवाता है, जिससे अहंकार का क्षय और विनम्रता का विकास होता है।
सार रूप में
शारदा माता की यह आरती ज्ञान, श्रद्धा, भक्ति और आत्मसमर्पण का पावन संदेश देती है। यह सिखाती है कि माँ शारदा की आराधना बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि शुद्ध मन, सच्चे भाव और निरंतर साधना से पूर्ण होती है। नित्य श्रद्धा से की गई यह आरती भक्त को माँ के दर्शन, आशीर्वाद और जीवन में विवेक व शांति प्रदान करती है।
जय माँ शारदा! 📿🙏
शारदा माता की आरती – Sharda Maiya Aarti
भुवन विराजी शारदामहिमा अपरम्पार।
भक्तों के कल्याण को, धरो मात अवतार॥
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
नित गाऊँ मैयानित गाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ।
श्रद्धा को दीया प्रीत की बाती, असुअन तेल चढ़ाऊँ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
मन की माला आँख के , मोतीभाव के फूल चढ़ाऊँ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
बल को भोग स्वांस दिन रातीकंधे से विनय सुनाऊँ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
तप को हार कर्ण को, टीकाध्यान की ध्वजा चढ़ाऊँ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
माँ के भजन साधु सन्तन को, आरती रोज सुनाऊ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
सुमर-सुमर माँ के जस, गावेचरनन शीश नवाऊँ।
दर्श तोरे पाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ।
मैया शारदा तोरे दरबार
आरती नित गाऊँ।
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