श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं – Shri Banke Bihari Teri Aarti Gaun

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं – सार (भावार्थ)

“श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं” भगवान श्रीकृष्ण के बांके बिहारी स्वरूप की अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और प्रेम से भरी आरती है। यह आरती भक्त के हृदय में बसे उस निश्छल प्रेम को प्रकट करती है, जिसके माध्यम से वह अपने प्रिय श्याम सुंदर को रिझाने और प्रसन्न करने का प्रयास करता है। पूरी आरती में भक्ति, समर्पण और आत्मीयता का सुंदर संगम दिखाई देता है।

आरती की शुरुआत में भक्त यह भाव व्यक्त करता है कि वह पूरे प्रेम और श्रद्धा से बांके बिहारी और गिरिधर श्रीकृष्ण की आरती गाकर उन्हें प्रसन्न करना चाहता है। श्याम सुंदर को पुकारते हुए यह बताया गया है कि आरती केवल एक पूजा विधि नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच हृदय का संवाद है।

आगे आरती में श्रीकृष्ण के अलौकिक श्रृंगार का मनोहारी वर्णन किया गया है। उनके शीश पर सजा मोर मुकुट, और हाथों में बजती मधुर बंसी, भक्त के मन को मोहित कर लेती है। उनकी सुंदर छवि को देखकर भक्त स्वयं को धन्य मानता है और बार-बार उस दिव्य रूप पर न्योछावर होने की भावना प्रकट करता है। यह दृश्य श्रीकृष्ण की माधुर्य लीला और आकर्षण को दर्शाता है।

इसके बाद भगवान के चरणों की महिमा का वर्णन आता है। कहा गया है कि श्रीकृष्ण के चरणों से ही पावन गंगा का प्राकट्य हुआ, जिसने संपूर्ण संसार को पवित्र और उद्धार किया। भक्त यह इच्छा प्रकट करता है कि उसे उन चरणों के दर्शन प्राप्त हों, क्योंकि भगवान के चरणों का स्मरण ही मोक्ष और शांति का मार्ग है

आरती में श्रीकृष्ण को दासों और अनाथों का नाथ कहा गया है। वे जीवन के हर सुख-दुःख में भक्त के साथ रहने वाले हैं। यह भाव स्पष्ट करता है कि श्रीकृष्ण केवल पूज्य देवता ही नहीं, बल्कि संकट में सहारा और जीवन के सच्चे साथी हैं। भक्त उनके चरणों में अपना शीश झुकाकर पूर्ण समर्पण करता है।

आगे श्री हरिदास जी का उल्लेख किया गया है, जिनके श्री बांके बिहारी प्रिय आराध्य हैं। भक्त श्रीकृष्ण को अपना मोहन और जीवन का सच्चा धन मानता है। राधा-कृष्ण की युगल छवि को देखकर वह बार-बार उस प्रेमस्वरूप पर बलि-बलि जाने की भावना व्यक्त करता है। यह भाग भक्ति के प्रेम मार्ग (माधुर्य भक्ति) को दर्शाता है।

आरती का समापन पुनः उसी भाव से होता है कि भक्त पूरे मन, वाणी और भाव से श्याम सुंदर की आरती गाकर उन्हें रिझाना चाहता है। यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति में कोई मांग नहीं होती—केवल प्रेम, श्रद्धा और समर्पण होता है।

निष्कर्ष

यह आरती हमें सिखाती है कि श्री बांके बिहारी जी भक्ति से प्रसन्न होने वाले, करुणामय और प्रेमस्वरूप भगवान हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आरती गाता है, उसका जीवन प्रेम, शांति और आध्यात्मिक आनंद से भर जाता है। यह आरती भक्त को संसारिक मोह से हटाकर श्रीकृष्ण भक्ति के रस में डुबो देती है

🙏 राधे राधे | जय श्री बांके बिहारी 🙏

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं – Shri Banke Bihari Teri Aarti Gaun

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं…..॥

मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,
प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।
देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं…..॥

चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी ।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं…..॥

दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो ।
हरी चरणों में शीश झुकाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं…..॥

श्री हरीदास के प्यारे तुम हो ।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देख युगल छवि बलि बलि जाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं…..॥

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।

प्रसिद्ध “ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं ” – वीडियो :


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