श्री जानकीनाथ जी की आरती – Shri Jankinatha Ji Ki Aarti

श्री जानकीनाथ आरती – सार (भावार्थ)

“श्री जानकीनाथ जी की आरती” भगवान श्रीराम को जानकीनाथ (माता सीता के स्वामी) और श्रीरघुनाथ के रूप में नमन करने वाली अत्यंत भावपूर्ण आरती है। इस आरती में भक्त का हृदय पूर्ण शरणागति, विनय और पारिवारिक अपनत्व से भरा हुआ दिखाई देता है। यह आरती श्रीराम को केवल ईश्वर नहीं, बल्कि प्राणों के आधार, माता-पिता और जीवन के मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार करती है।

आरती की शुरुआत में भक्त दोनों हाथ जोड़कर श्री जानकीनाथ और श्रीरघुनाथ से प्रार्थना करता है कि वे उसकी विनती को कृपा पूर्वक सुनें। यह भाव दर्शाता है कि सच्ची भक्ति अहंकार से नहीं, बल्कि नम्रता और समर्पण से प्रारंभ होती है

आगे आरती में भक्त स्वीकार करता है कि श्रीराम ही उसके प्राण हैं, वही उसके माता-पिता हैं और वही उसके सच्चे साथी हैं। वे ही सज्जनों का संग प्रदान करने वाले, भक्ति देने वाले और अंततः मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले दयालु प्रभु हैं। यहाँ श्रीराम को जीवन के हर स्तर पर सहारा देने वाला बताया गया है—सांसारिक भी और आध्यात्मिक भी।

इसके बाद आरती में जन्म-मरण के बंधन का उल्लेख आता है। भक्त प्रभु से प्रार्थना करता है कि वे चौरासी लाख योनियों के चक्र को काटें, यमराज के भय से रक्षा करें और दिन-रात अपनी शरण में बनाए रखें। यह भाव स्पष्ट करता है कि श्रीराम की भक्ति जीवन और मृत्यु दोनों में सुरक्षा प्रदान करती है

आरती में आगे श्रीराम के परिवार सहित दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन है। श्रीराम के साथ भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न विराजमान हैं, जिनकी उपस्थिति से चारों ओर दिव्य प्रकाश और अनुपम शोभा फैल जाती है। यह दृश्य आदर्श परिवार, भाईचारे और मर्यादा का प्रतीक है।

हनुमान जी की सेवा का भी अत्यंत मनोहारी चित्रण है। हनुमान जी आनंदपूर्वक नाद बजा रहे हैं, उनके चरणों के आभूषण झंकार कर रहे हैं और माता कौशल्या स्वर्ण थाल में आरती कर रही हैं। यह भाव बताता है कि श्रीराम की आराधना में सेवक, माता और समस्त परिवार एक साथ आनंदित होते हैं

अंत में श्रीराम के मुकुट, धनुष-बाण और तेजस्वी स्वरूप का स्मरण कराया गया है। भक्त “मनीराम” बार-बार दर्शन कर स्वयं को धन्य मानता है और हर क्षण प्रभु पर बलि-बलि जाता है। यह दर्शाता है कि श्रीराम का दर्शन ही भक्त के जीवन का परम सौभाग्य है

निष्कर्ष

श्री जानकीनाथ आरती हमें सिखाती है कि भगवान श्रीराम केवल राजा या अवतार नहीं, बल्कि जीवन के आधार, भय से मुक्त करने वाले रक्षक और मोक्ष के दाता हैं। जो भक्त श्रद्धा, विनय और प्रेम से इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में शांति, सुरक्षा और रामकृपा का प्रकाश सदैव बना रहता है।

🙏 जय जानकीनाथ | जय श्रीरघुनाथ | जय श्रीराम 🙏

श्री जानकीनाथ जी की आरती – Shri Jankinatha Ji Ki Aarti

जय जानकीनाथा,जय श्रीरघुनाथा।
दोउ कर जोरें बिनवौं,प्रभु! सुनिये बाता॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

तुम रघुनाथ हमारेप्रान, पिता माता।
तुम ही सज्जन-सङ्गीभक्ति मुक्ति दाता॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

लख चौरासी काटोमेटो यम त्रासा।
निसिदिन प्रभु मोहि रखियेअपने ही पासा॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

राम भरत लछिमनसँग शत्रुहन भैया।
जगमग ज्योति विराजै,शोभा अति लहिया॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

हनुमत नाद बजावत,नेवर झमकाता।
स्वर्णथाल कर आरतीकौशल्या माता॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

सुभग मुकुट सिर, धनु सरकर सोभा भारी।
मनीराम दर्शन करिपल-पल बलिहारी॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥

जय जानकीनाथा,जय श्रीरघुनाथा।
दोउ कर जोरें बिनवौं,प्रभु! सुनिये बाता॥

जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥


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🌸 जय जानकीनाथ | सीता-राम 🌸

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