आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की – Shri Krishna Kanhaiya Aarti – मथुरा कारागृह अवतारी

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की – सार (भावार्थ)

“आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की” भगवान श्रीकृष्ण के अवतार, बाललीलाओं, रूप-सौंदर्य, पराक्रम, करुणा और दिव्य ज्ञान को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण आरती है। यह आरती श्रीकृष्ण को बाल कन्हैया से लेकर जगतगुरु और धर्मरक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है और उनके संपूर्ण जीवन चरित्र का सार भक्तों के हृदय तक पहुँचाती है।

आरती की शुरुआत श्रीकृष्ण के अवतार रहस्य से होती है। वे मथुरा की कारागृह में जन्म लेकर गोकुल में माता यशोदा की गोद में पले, जहाँ उन्होंने बाललीलाओं से समस्त ब्रजवासियों का मन मोहा। नन्दलाल, नटवर और गिरधर के रूप में वे केवल बालक नहीं, बल्कि ईश्वर की साक्षात लीला हैं। इस आरती में बलराम (हलधर) को उनके भ्राता के रूप में स्मरण किया गया है, जो उनके साथ शक्ति और धर्म का संतुलन दर्शाते हैं।

आगे श्रीकृष्ण के अलौकिक रूप-सौंदर्य का वर्णन मिलता है। उनके सिर पर मोर मुकुट शोभायमान है, शरीर पर पीताम्बर विराजमान है और कमर में काछनी सुशोभित है। हाथों में मधुर मुरली उनकी पहचान है। उनका मुख पूर्णिमा के चंद्रमा जैसा उज्ज्वल है, जिसे देखकर कामदेव भी लज्जित हो जाता है। यह बताता है कि श्रीकृष्ण की छवि संसार के हर आकर्षण से परे है।

आरती में श्रीकृष्ण को रासलीला के रसिक और अधर्म के नाशक के रूप में स्मरण किया गया है। वे गोपियों के प्रेम में रमने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर कालिय नाग, कंस और कौरवों जैसे अधर्मियों का संहार करने वाले भी हैं। चंद्रमा, सूर्य और अग्नि की भाँति वे प्रकाश देने वाले हैं और सभी प्राणियों के हृदय में वास करते हैं

श्रीकृष्ण के बहुरूपिया स्वभाव का भी सुंदर चित्रण किया गया है। कहीं वे रणभूमि में योद्धा बनकर शत्रुओं से युद्ध करते हैं, तो कहीं साधारण ग्वाले बनकर गायें चराते हैं। कहीं वे राजा के रूप में पूजित होते हैं, तो कहीं ब्रज में बालक बनकर सबको नचाते हैं। वे स्वयं वेदों का ज्ञान रखने वाले हैं और वेद भी उनकी महिमा का गान करते हैं। यह दर्शाता है कि संपूर्ण जगत उनके इशारों पर चलता है

अंतिम भाग में श्रीकृष्ण के सगुण और निर्गुण स्वरूप की महिमा बताई गई है। वे लीला के लिए साकार रूप धारण करते हैं और मानव को मार्ग दिखाने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं। दामोदर रूप में वे भक्तों के बंधन में बंधने वाले हैं, और ब्राह्मणों, गौओं तथा देवताओं की रक्षा करने वाले करुणामय धर्मरक्षक हैं।

निष्कर्ष

यह आरती श्रीकृष्ण को बाल कन्हैया, प्रेमस्वरूप, महायोद्धा, जगतगुरु और भक्तवत्सल भगवान के रूप में एक साथ प्रस्तुत करती है। जो भक्त श्रद्धा और प्रेम से “आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की” का गायन करता है, उसके जीवन में भक्ति, ज्ञान, शांति और धर्म का प्रकाश स्वतः फैलने लगता है।

🙏 जय श्रीकृष्ण | राधे राधे 🙏

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की – Shri Krishna Kanhaiya Aarti

मथुरा कारागृह अवतारी,गोकुल जसुदा गोद विहारी।
नन्दलाल नटवर गिरधारी,वासुदेव हलधर भैया की॥

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की।

मोर मुकुट पीताम्बर छाजै,कटि काछनि, कर मुरलि विराजै।
पूर्ण सरक ससि मुख लखि लाजै,काम कोटि छवि जितवैया की॥

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की।

गोपीजन रस रास विलासी,कौरव कालिय, कन्स बिनासी।
हिमकर भानु, कृसानु प्रकासी,सर्वभूत हिय बसवैया की॥

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की।

कहुँ रन चढ़ै भागि कहुँ जावै,कहुँ नृप कर, कहुँ गाय चरावै।
कहुँ जागेस, बेद जस गावै,जग नचाय ब्रज नचवैया की॥

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की।

अगुन सगुन लीला बपु धारी,अनुपम गीता ज्ञान प्रचारी।
दामोदर सब विधि बलिहारी,विप्र धेनु सुर रखवैया की॥

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की।


यदि आपको आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की का यह सार और भावार्थ प्रिय लगा हो, तो कृपया नीचे कमेंट में “जय श्रीकृष्ण” या “राधे राधे” अवश्य लिखें और अपनी भक्ति-अनुभूति हमारे साथ साझा करें।

इस पावन आरती को अपने परिवार, मित्रों और श्रीकृष्ण भक्तों के साथ शेयर करें, ताकि अधिक से अधिक लोग बाल कन्हैया की कृपा, प्रेम और दिव्य ज्ञान से जुड़ सकें। ऐसी ही आरती, भजन, कथा और श्रीकृष्ण लीला से जुड़ी आध्यात्मिक सामग्री के लिए हमारे ब्लॉग से जुड़े रहें।

🌸 राधे राधे | जय श्रीकृष्ण 🌸

Leave a Comment