वैभव लक्ष्मी की आरती का – सार (भावार्थ)
वैभव लक्ष्मी माता आरती माँ वैभव लक्ष्मी के उस करुणामय स्वरूप का गुणगान करती है, जो अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, वैभव और संतोष प्रदान करती हैं। आरती की शुरुआत में माँ को भक्तों की हितकारिणी और सुख-वैभव की दात्री बताया गया है—अर्थात् वे न केवल धन देती हैं, बल्कि जीवन में स्थिरता, आनंद और आत्मिक संतुलन भी प्रदान करती हैं।
आगे यह भाव प्रकट होता है कि जो भी श्रद्धा से वैभव लक्ष्मी माँ का नाम स्मरण करता है, उसके जीवन से दुख और दारिद्र्य दूर हो जाते हैं। माँ की कृपा से अन्न-धन की प्राप्ति, आर्थिक बाधाओं का निवारण और मनवांछित फल मिलते हैं। यहाँ “वैभव” का अर्थ केवल भौतिक धन नहीं, बल्कि सुख-शांति से युक्त समृद्ध जीवन है।
आरती में माँ को भक्तवत्सला कहा गया है—जो सच्चे मन से ध्यान करने वाले को सद्गुणों से भर देती हैं। यह संकेत करता है कि माँ वैभव लक्ष्मी की उपासना से केवल बाहरी समृद्धि नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच और धर्मपरायणता भी विकसित होती है।
माँ को जगत की माता और जगपालक रानी के रूप में स्वीकार किया गया है। समस्त प्राणी उनके गुणों का गान करते हैं और हाथ जोड़कर नमन करते हैं, क्योंकि वही सृष्टि की पालनहार और कल्याणकारिणी शक्ति हैं। यह भाव दर्शाता है कि माँ की कृपा सर्वव्यापी है—वे किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि सबकी माता हैं।
आरती का अंतिम भाव अत्यंत प्रेरक है—जो भक्त माँ की शरण में आता है, उसे सच्ची भक्ति, ममता और संरक्षण प्राप्त होता है। माँ की करुणा पाकर भक्त का जीवन पवित्र बनता है और अंततः उसे उच्च आध्यात्मिक गति प्राप्त होती है। यहाँ “स्वर्ग” का संकेत केवल परलोक नहीं, बल्कि इस जीवन में भी सुख-शांति से भरा मार्ग है।
“वैभव लक्ष्मी की आरती” हमें सिखाती है कि माँ वैभव लक्ष्मी धन, अन्न, सुख और सद्गुण—चारों की दात्री हैं। उनकी उपासना से आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं, मन में संतोष आता है और जीवन में स्थायी समृद्धि का संचार होता है। जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में सुख-वैभव, शांति और मंगल निरंतर बने रहते हैं।
वैभव लक्ष्मी माता आरती – Vaibhav Laxmi Aarti
ओम जय वैभव लक्ष्मी माता, मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों के हितकारिनी सुख वैभव दाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
वैभव लक्ष्मी मां का नाम जो लेता, सब सुख संपत्ति पाता।
मैया अन्न धन सब पाता, दुख दारिद्र मिट जाता, मनवांछित फल पाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों की हितकारिनी, सुख आनंद करनी।
जो भी तुमको ध्याता, सब सदगुण पाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता ।
तू है जग की माता, जग पालक रानी।
हाथ जोड़ गुण गाते, जग के सब प्राणी।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
तेरी शरण जो आता, मैया भक्ति तेरी पाता।
मां तेरी ममता पा के, अंत स्वर्ग जाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता
ओम जय वैभव लक्ष्मी माता, मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों के हितकारिनी सुख वैभव दाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
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