श्री वैष्णो देवी आरती का – सार (भावार्थ)
श्री वैष्णो माता आरती माँ के प्रति पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और विश्वास की सुंदर अभिव्यक्ति है। आरती की शुरुआत में भक्त हाथ जोड़कर माँ वैष्णवी के चरणों में नतमस्तक होता है और अपनी भक्ति अर्पित करता है। यहाँ माँ को करुणामयी, दयालु और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली शक्ति के रूप में स्मरण किया गया है।
आरती में माँ वैष्णो देवी के दिव्य स्वरूप का अत्यंत मनोहारी वर्णन मिलता है। उनके शीश पर विराजमान छत्र, चरणों से प्रवाहित गंगा और अखंड ज्योति उनकी दिव्यता और पवित्रता को दर्शाते हैं। यह संकेत देता है कि माँ का धाम केवल तीर्थ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत केंद्र है, जहाँ पहुँचकर भक्त का मन स्वतः शांत हो जाता है।
इस आरती में यह भी बताया गया है कि स्वयं ब्रह्मा, शिव और नारद जैसे देवगण माँ की सेवा में लीन रहते हैं—कोई वेद पाठ करता है, कोई ध्यान करता है और कोई नृत्य द्वारा माँ की स्तुति करता है। यह दर्शाता है कि वैष्णो देवी केवल मानवों की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देव जगत की भी आराध्या हैं।
माँ की सुंदर गुफा, भवन पर लहराते ध्वज, गूंजती घंटियों की ध्वनि और ऊँचे पर्वत—ये सभी वैष्णो देवी धाम की आध्यात्मिक गरिमा और आकर्षण को प्रकट करते हैं। आरती बताती है कि एक बार दर्शन करने के बाद भक्त का मन बार-बार वहीं लौटने को व्याकुल हो उठता है।
भक्त माँ को पान, सुपारी, नारियल, पुष्प और मेवे अर्पित करता है—जो भौतिक नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक हैं। आरती यह स्पष्ट करती है कि जो श्रद्धालु निश्चय और विश्वास के साथ माँ के द्वार आता है, उसकी हर सच्ची इच्छा माँ अवश्य पूर्ण करती हैं।
आरती के अंत में यह संदेश दिया गया है कि जो व्यक्ति नित्य भावपूर्वक माँ वैष्णो देवी की आरती गाता है, उसे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। माँ अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करतीं और हर संकट में उनकी रक्षा करती हैं।
वैष्णो माता आरती – Vaishno Mata Aarti
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥
जय वैष्णवी माता..॥
शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी।
गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥
जय वैष्णवी माता..॥
ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे।
सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥
जय वैष्णवी माता..॥
सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।
बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥
जय वैष्णवी माता..॥
भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे।
ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥
जय वैष्णवी माता..॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा।
दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥
जय वैष्णवी माता..॥
जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे।
उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥
जय वैष्णवी माता..॥
इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे।
कहते सेवक ध्यानू,सुख सम्पत्ति पावे॥
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥
यदि श्री वैष्णो देवी आरती का यह भावपूर्ण पाठ और उसका सार आपको माँ वैष्णवी की करुणा, शक्ति और संरक्षण का अनुभव करा सका हो, तो कृपया इसे अपने परिवार, मित्रों और सभी श्रद्धालुओं के साथ शेयर अवश्य करें, ताकि माँ का आशीर्वाद अधिक से अधिक भक्तों तक पहुँच सके।
आपके विचार, श्रद्धा-भाव और अनुभव हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—नीचे कमेंट करके अवश्य बताएँ कि माँ वैष्णो देवी की आराधना से आपके जीवन में क्या सकारात्मक परिवर्तन या मनोकामना पूर्ण हुई। ऐसी ही आरती, भजन, कथा और आध्यात्मिक लेख पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और भक्ति के इस पावन मार्ग में सहभागी बनें।
🙏 जय माता दी! माँ वैष्णो देवी आप सभी पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें—सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।