विन्ध्येश्वरी माता की आरती – Vindheshwari Mata Ki Aarti

विन्ध्येश्वरी माता की आरती – सार (भावार्थ)

विन्ध्येश्वरी माता की आरती देवी शक्ति के उस परम स्वरूप की स्तुति है, जो विन्ध्य पर्वतों पर विराजमान होकर अपने भक्तों की रक्षा और कल्याण करती हैं। यह आरती माता की अपार महिमा, उनके ऐतिहासिक, पौराणिक और भक्तवत्सल स्वरूप को सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रकट करती है।

आरती के प्रारंभ में भक्त विन्ध्य पर्वतवासिनी माता से विनम्र प्रार्थना करता है कि उनकी महिमा का कोई पार नहीं पा सकता। माता अनंत शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं, जिनकी कृपा और प्रभाव का पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा के प्रतीक रूप में पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल अर्पित करता है, जो पूर्ण समर्पण और भक्ति का संकेत है।

आगे माता के श्रृंगार और सौंदर्य का वर्णन आता है। लाल-सुवा चोली माता के दिव्य अंगों पर शोभायमान है और केसर का तिलक उनकी तेजस्वी शक्ति को और प्रखर बनाता है। यह श्रृंगार माता के सौम्य और शक्तिशाली—दोनों स्वरूपों का सुंदर संतुलन दर्शाता है।

आरती में एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख है, जहाँ अकबर नंगे पांव माता के दर्शन के लिए गया और सोने का छत्र अर्पित किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि विन्ध्येश्वरी माता की महिमा केवल भक्तों तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी शक्ति और प्रभाव से राजा-महाराजा भी नतमस्तक हो जाते हैं।

इसके बाद माता के धाम की भव्यता का वर्णन किया गया है। ऊँचे-ऊँचे पर्वतों पर उनका देवालय स्थित है और नीचे बसा नगर माता की कृपा से समृद्ध है। सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग—हर युग में माता की सत्ता और प्रभाव बढ़ता ही गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे कालातीत और युगों-युगों तक पूजनीय हैं।

आरती के अंत में धूप, दीप, नैवेद्य और विशेष भोग अर्पित करने का उल्लेख है। भक्त प्रेमपूर्वक आरती करता है और ध्यानू भगत जैसे परम भक्तों का स्मरण करता है, जिन्होंने माता के गुण गाकर मनवांछित फल प्राप्त किया। यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति और निष्कपट श्रद्धा से माता अपने भक्तों की सभी कामनाएँ पूर्ण करती हैं।

सार रूप में

विन्ध्येश्वरी माता की यह आरती श्रद्धा, इतिहास, शक्ति और भक्तिवात्सल्य का दिव्य संगम है। यह भक्त को यह विश्वास दिलाती है कि माता हर युग में अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। इस आरती का नियमित पाठ जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।
जय विन्ध्येश्वरी माता! 🙏🌺

विन्ध्येश्वरी माता की आरती – Vindheshwari Mata Ki Aarti

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, तेरा पार न पाया। 
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेंट चढ़ाया॥

जय विन्ध्येश्वरी माता॥

सुवा चोली तेरे अंग विराजै, केशर तिलक लगाया।
नंगे पांव अकबर जाकर, सोने का छत्र चढ़ाया॥

जय विन्ध्येश्वरी माता॥

ऊँचे ऊँचे पर्वत बना देवालय, नीचे शहर बसाया।
सत्युग त्रेता द्वापर मध्ये, कलयुग राज सवाया॥

जय विन्ध्येश्वरी माता॥

धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया।
ध्यानू भगत मैया (तेरा) गुण गावैं, मन वांछित फल पाया॥

जय विन्ध्येश्वरी माता॥


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जय विन्ध्येश्वरी माता! 🌺🙏

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