हिंदू धर्म में नदियों को सिर्फ जल का स्रोत नहीं, बल्कि माँ का दर्जा दिया गया है। गंगा के समान ही माँ यमुना का स्थान भी अत्यंत पूजनीय है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व यमुना छठ (Yamuna Chhath 2026) इन्हीं आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। यह पर्व न केवल माँ यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की अटूट प्रेम-लीला से जुड़ा एक पवित्र दिवस भी है। आइए, इस विशेष अवसर से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बात को विस्तार से जानते हैं।
1. यमुना छठ क्या है?
यमुना छठ का परिचय
यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती के नाम से भी जाना जाता है, माँ यमुना के पृथ्वी पर अवतरण की वर्षगांठ है। यह वह पावन दिन है जब देवी यमुना धरती पर एक पवित्र नदी के रूप में प्रकट हुई थीं। यह पर्व मुख्य रूप से मथुरा और वृंदावन में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि रहा है और माँ यमुना का इस भूमि से अटूट संबंध है ।
हिंदू धर्म में इस पर्व का महत्व
हिंदू धर्म में नदियों को देवी का स्वरूप माना गया है। यमुना छठ का दिन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए अत्यधिक महत्व रखता है जो भगवान श्रीकृष्ण के उपासक हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन माँ यमुना की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है ।
इसे यमुना जयंती या यमुना छठ क्यों कहा जाता है
इसे ‘यमुना जयंती’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दिन माँ यमुना के प्राकट्य (जन्म) का प्रतीक है। वहीं, ‘यमुना छठ’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की छठ (षष्ठी) तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि चैत्र नवरात्रि के दौरान आती है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है ।
2. यमुना छठ 2026 कब है?
यमुना छठ की तिथि
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में यमुना छठ का पवित्र पर्व 24 मार्च, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा ।
चैत्र शुक्ल षष्ठी का महत्व
चैत्र मास हिंदू नव वर्ष का पहला महीना होता है और इसकी शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बेहद शुभ मानी जाती है। इस दिन माँ यमुना की उपासना का विशेष विधान है। यह तिथि नवरात्रि के छठे दिन भी पड़ती है, इसलिए इसे ‘चैत्री छठ’ भी कहा जाता है ।
पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त
किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए सही मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। यमुना छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का मुहूर्त इस प्रकार है:
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षष्ठी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च 2026, शाम 06:38 बजे से
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षष्ठी तिथि समाप्त: 24 मार्च 2026, शाम 04:08 बजे तक
उदया तिथि (सूर्योदय के समय तिथि) के आधार पर यमुना छठ 24 मार्च 2026 को मनाया जाएगा ।
3. देवी यमुना का परिचय
यमुना देवी कौन हैं
माँ यमुना को हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। वे न केवल एक नदी हैं, बल्कि साक्षात देवी का स्वरूप हैं, जो अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।
सूर्यदेव की पुत्री और यमराज की बहन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ यमुना सूर्य देव की पुत्री और यमराज (धर्मराज) की बहन हैं। यमराज मृत्यु के देवता हैं, लेकिन ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति माँ यमुना की शरण में जाता है और उनकी पूजा करता है, उसे यमराज का भय नहीं सताता। शनि देव भी इनके भाई माने जाते हैं, जिससे यमुना का कुटुंब अत्यंत प्रभावशाली है ।
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा संबंध
माँ यमुना का सबसे घनिष्ठ संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है। उन्हें भगवान कृष्ण की प्रिय पत्नी और उनकी दिव्य सखी माना गया है। ब्रज की हर लीला में माँ यमुना का साथ अभिन्न है। श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं से लेकर रासलीला तक, हर क्षण यमुना के तट पर बिताया। यही कारण है कि ब्रजवासी माँ यमुना को अपनी सबसे करीबी मानते हैं और उन्हें ‘यमुना मैया’ कहकर पुकारते हैं ।
4. यमुना छठ की पौराणिक कथा
- यमुना देवी के जन्म की कथा – पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र को गर्व हो गया कि वे सबसे शक्तिशाली हैं। उनके इस अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और तीन पग में सारा ब्रह्मांड नाप लिया। इस दौरान भगवान वामन के चरण का अंगूठा ब्रह्मांड को भेदते हुए सतलोक पहुंचा। सतलोक में भगवान के चरणों का स्पर्श होने से वहां से एक दिव्य जल धारा प्रवाहित हुई, जो आगे चलकर गंगा और यमुना के रूप में प्रकट हुई ।
- यमराज और यमुना का संबंध – एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, माँ यमुना ने अपने भाई यमराज से वरदान मांगा कि जो भी बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन व्रत रखेंगी और यमुना में स्नान करेंगी, उनकी मनोकामना पूरी होगी और उनके भाइयों को यमलोक की यातना नहीं भोगनी पड़ेगी। यही कारण है कि यमुना छठ को भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।
- कथा से मिलने वाला धार्मिक संदेश – इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि माँ यमुना अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। वे न केवंल जीवन में शुद्धि लाती हैं, बल्कि मृत्यु के भय से भी मुक्त कराती हैं। यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से हम सभी बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।
5. यमुना नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
- हिंदू धर्म में पवित्र नदियों का महत्व – हिंदू धर्म में नदियों को मोक्षदायिनी माना गया है। गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी जैसी नदियाँ भारतीय संस्कृति की आधार स्तंभ हैं। इनके जल में पाप धोने और मोक्ष प्राप्ति की मान्यता है ।
- यमुना स्नान का आध्यात्मिक महत्व – शास्त्रों में यमुना स्नान को गंगा स्नान से भी अधिक फलदायी बताया गया है। गर्ग संहिता में उल्लेख है कि यमुना का जल भगवान श्रीकृष्ण के चरणामृत के समान पवित्र है। ऐसा माना जाता है कि यमुना में डुबकी लगाने मात्र से आत्मा शुद्ध हो जाती है और अनंत प्रेम व आनंद की प्राप्ति होती है ।
- ब्रज क्षेत्र और मथुरा-वृंदावन से संबंध – यमुना नदी के बिना ब्रज की कल्पना अधूरी है। मथुरा और वृंदावन की हर गली, हर घाट माँ यमुना के नाम से विभूषित है। विश्राम घाट हो या केशी घाट, हर स्थान पर यमुना मैया की छाप है। ऐसा कहा जाता है कि जब राधारानी पृथ्वी पर आईं, तो उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा था कि वे उस स्थान पर ही रहेंगी जहाँ यमुना, वृंदावन और गोवर्धन हों, यह दर्शाता है कि माँ यमुना इस क्षेत्र की जीवनदायिनी हैं ।
6. यमुना छठ की पूजा विधि
पूजा की तैयारी कैसे करें
यमुना छठ के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो यमुना नदी के तट पर जाएं, अन्यथा घर में ही स्वच्छ जल से स्नान करके पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल को गंगा-यमुना मिट्टी से लीपना शुभ माना जाता है।
पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री एकत्र करें:
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एक कलश या घड़ा
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लाल या पीला वस्त्र
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रोली, मौली, चंदन, अक्षत (चावल)
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फूल, माला, विशेषकर गेंदा और गुलाब
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फल (विशेषकर केला, नारियल) और मिठाई
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दीपक, कपूर और अगरबत्ती
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जल अर्पित करने के लिए लोटा
पूजा करने की पूरी विधि (Step by step)
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संकल्प: सबसे पहले स्वच्छ होकर माँ यमुना का ध्यान करें और व्रत व पूजा करने का संकल्प लें।
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घाट या स्थान की सफाई: यदि नदी तट पर हैं तो घाट को साफ करें, अन्यथा पूजा स्थल को स्वच्छ करके गंगा-यमुना की मिट्टी से लीपें।
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कलश स्थापना: कलश में जल भरकर उसके ऊपर लाल कपड़ा रखें और उसमें नारियल स्थापित करें। कलश के चारों ओर फूल रखें।
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माँ यमुना का आवाहन: कलश या नदी में रोली, चंदन, अक्षत और फूल डालकर माँ यमुना का आवाहन करें और उन्हें पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) अर्पित करें।
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अर्घ्य देना: इसके बाद सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें, क्योंकि माँ यमुना सूर्यपुत्री हैं।
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दीपदान: शाम के समय यमुना के तट पर या घर के आंगन में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सरसों के तेल का दीपक जलाकर उसे प्रवाहित करें।
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कथा श्रवण: यमुना जी की पौराणिक कथा का श्रवण करें या पढ़ें।
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आरती: अंत में माँ यमुना की आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें ।
7. यमुना छठ के व्रत के नियम
व्रत कैसे रखा जाता है
यमुना छठ के दिन भक्त कठोर व्रत रखते हैं। यह व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक होता है। कुछ भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, यानि बिना जल पिए, तो कुछ फलाहार करते हैं। व्रत का मुख्य उद्देश्य माँ यमुना को प्रसन्न करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है ।
व्रत में क्या करें और क्या न करें
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क्या करें: दिनभर भगवान श्रीकृष्ण और माँ यमुना के नाम का जाप करें, भजन-कीर्तन करें, और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
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क्या न करें: व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और किसी भी प्रकार के व्यसन से दूर रहें। तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज) का सेवन वर्जित है।
व्रत का पारण कब और कैसे करें
व्रत का पारण अगले दिन सुबह पूजा-अर्चना के बाद किया जाता है। सबसे पहले माँ यमुना को भोग लगाएं, फिर उसी प्रसाद को ग्रहण करके व्रत खोलें। पारण करने से पहले पूजा करना अनिवार्य होता है ।
8. यमुना छठ पर स्नान और दान का महत्व
यमुना नदी में स्नान का महत्व
इस दिन यमुना में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा विश्वास है कि चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन यमुना नदी में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह स्नान कुष्ठ रोग जैसे असाध्य रोगों से भी मुक्ति दिलाता है ।
इस दिन किए जाने वाले दान
यमुना छठ के दिन दान का भी बड़ा महत्व है। इस दिन निम्नलिखित चीजों का दान करना शुभ माना गया है:
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अन्न और वस्त्र का दान
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फल और मिठाई का दान
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गुड़, चना और हरे वस्त्र का दान
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यमुना तट पर ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना
धार्मिक मान्यताएं
मान्यता है कि इस दिन यमुना जी को प्रसन्न करने से यमराज का भय समाप्त हो जाता है। साथ ही, यह व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
9. यमुना देवी के मंत्र और आरती
यमुना देवी का प्रमुख मंत्र
माँ यमुना की उपासना के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जाता है:
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मूल मंत्र:
ॐ यमुनायै नमः। -
प्रार्थना मंत्र:
यमुने च यमुनाचैव यमुनाच यमुनिके। यमुने यमुनानन्दे यमुने ते नमो नमः।। -
ध्यान मंत्र:
कालिन्दी कलुषं हन्ति ध्येया नित्यमुमापतिः।
यमुना देवी की आरती
ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।
जो नहावे फल पावे, सुख दुःख की दाता॥
ॐ जय यमुना माता…॥
पावन श्रीयमुना जलशीतल, अगम बहै धारा।
जो जन शरण में आया, कर दिया निस्तारा॥
ॐ जय यमुना माता…॥
(संपूर्ण यमुना देवी की आरती पढ़े)
मंत्र जप का महत्व
मंत्रों का जप करने से मन एकाग्र होता है और ईश्वर से जुड़ाव महसूस होता है। माँ यमुना के मंत्रों का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है। विशेषकर ‘ॐ यमुनायै नमः’ का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
10. यमुना छठ के दिन किए जाने वाले विशेष कार्य
यमुना पूजन
इस दिन का मुख्य कार्य माँ यमुना का विधिवत पूजन है। चाहे नदी तट पर हों या घर पर, माँ को फूल, अक्षत, चंदन अर्पित करें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं।
दीपदान
शाम के समय जब सूर्यास्त होने लगे, तो यमुना के तट पर या घर के पास किसी पवित्र स्थान पर दीपदान करें। आटे या पत्तल के दीपक बनाकर उनमें सरसों का तेल भरें और उसे प्रज्वलित करके जल में प्रवाहित करें। यह दृश्य अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक होता है।

भजन और कीर्तन
पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण और माँ यमुना के भजन-कीर्तन करने का विशेष महत्व है। ब्रज क्षेत्र में तो यह दिन भक्ति के रंग में डूबा होता है, जहाँ हर घाट पर यमुना मैया के भजन गूंजते हैं।
11. यमुना छठ का आध्यात्मिक महत्व
पापों से मुक्ति की मान्यता
यमुना छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का मार्ग है। माँ यमुना के स्पर्श से जहां बाहरी तन शुद्ध होता है, वहीं मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है। यह माना जाता है कि माँ यमुना की कृपा से जन्म-जन्मांतर के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
जीवन में शुद्धता और सकारात्मकता का संदेश
यह पर्व हमें जीवन में नैतिक मूल्यों और शुद्धता को अपनाने का संदेश देता है। जिस प्रकार यमुना का जल निर्मल है, उसी प्रकार हमारा हृदय और हमारे विचार भी निर्मल होने चाहिए। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखना कितना आवश्यक है।
12. निष्कर्ष
यमुना छठ 2026 का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और हमें प्रकृति की पूजा का महत्व सिखाता है। आज के इस भागदौड़ भरे आधुनिक समय में, यह पर्व हमें रुकने, ठहरने और उस दिव्य शक्ति (माँ यमुना) का स्मरण करने का अवसर देता है, जो सदियों से हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान कर रही है। इस पवित्र दिन पर हम सब माँ यमुना से प्रार्थना करें कि वे हमारे जीवन को पवित्रता, प्रेम और समृद्धि से भर दें। माँ यमुना की जय!
13. (FAQ) यमुना छठ 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यमुना छठ क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: यमुना छठ माँ यमुना के पृथ्वी पर अवतरण की वर्षगांठ है, जिसे उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य माँ यमुना की कृपा प्राप्त करना और जीवन से पापों का नाश करना है।
प्रश्न 2: यमुना छठ 2026 कब मनाया जाएगा?
उत्तर: यमुना छठ 2026 24 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है।
प्रश्न 3: यमुना छठ का व्रत कैसे रखा जाता है?
उत्तर: इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक व्रत रखा जाता है। कुछ भक्त निर्जला व्रत रखते हैं तो कुछ फलाहार करते हैं।
प्रश्न 4: यमुना छठ पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 24 मार्च को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। षष्ठी तिथि 23 मार्च शाम 06:38 बजे शुरू होकर 24 मार्च शाम 04:08 बजे तक है।
प्रश्न 5: यमुना जी का भगवान श्रीकृष्ण से क्या संबंध है?
उत्तर: माँ यमुना को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय पत्नी और उनकी दिव्य सखी माना जाता है। श्रीकृष्ण ने अपनी अधिकांश लीलाएँ यमुना के तट पर ही बिताईं।
प्रश्न 6: क्या यमुना छठ का व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों रख सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों रख सकते हैं। विशेषकर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए यह व्रत करती हैं।
प्रश्न 7: यमुना छठ पर किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है?
उत्तर: इस दिन अन्न, वस्त्र, फल, मिठाई, गुड़ और चने का दान करना विशेष शुभ माना जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना भी पुण्यदायी है।
प्रश्न 8: क्या घर बैठे यमुना छठ की पूजा कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि यमुना तट पर जाना संभव न हो तो घर में ही जल का कलश स्थापित करके विधिवत पूजा कर सकते हैं।
प्रश्न 9: यमुना छठ पर दीपदान का क्या महत्व है?
उत्तर: शाम के समय यमुना में दीपदान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और यमराज की कृपा बनी रहती है।
प्रश्न 10: यमुना जी का प्रमुख मंत्र कौन सा है?
उत्तर: यमुना जी का प्रमुख मंत्र “ॐ यमुनायै नमः” है। इसका 108 बार जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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माँ यमुना की कृपा से जीवन धन्य होगा। अपने परिवार समय यमुना छठ का व्रत और पूजा अवश्य करें।
जय यमुने मैया! जय श्री कृष्णा!🙏
इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि सभी माँ यमुना के आशीर्वाद के पात्र बन सकें।