श्री यशोदालाल आरती – सार (भावार्थ)
“श्री यशोदा लाल की आरती” माता यशोदा मैया और बाल श्रीकृष्ण के वात्सल्य, आनंद और प्रेमपूर्ण भावों को अत्यंत कोमलता और भक्ति के साथ व्यक्त करने वाली आरती है। इस आरती में भगवान श्रीकृष्ण को यशोदालाल, अर्थात माता यशोदा के प्रिय बालक के रूप में स्मरण किया गया है, जहाँ ईश्वर अपने ऐश्वर्य को त्यागकर मातृ-प्रेम के बंधन में बंधे बालरूप में प्रकट होते हैं।
आरती के आरंभ में वर्णन मिलता है कि माता यशोदा अत्यंत प्रसन्न और भावविभोर होकर अपने लाडले कन्हैया की आरती कर रही हैं। उनका हृदय आनंद से भर गया है, शरीर पुलकित है और वे बार-बार “बल-बल” कहकर बालक श्रीकृष्ण को दुलार रही हैं। यह दृश्य माता और पुत्र के बीच के निर्मल, निश्छल और दिव्य वात्सल्य प्रेम को दर्शाता है।
आरती में यशोदा मैया द्वारा की जाने वाली पूजन सामग्री का सुंदर और सजीव चित्रण है। सोने की थाली में रत्नजटित दीप जल रहे हैं, जिनकी घी की सुगंध वातावरण को पवित्र बना रही है। चंदन, सिंदूर, दूर्वा, दही, अक्षत और तिलक से बालक कृष्ण का विविध प्रकार से पूजन किया जा रहा है। यह बताता है कि माता यशोदा अपने लाडले की सेवा में कोई कमी नहीं रखतीं।
आगे वर्णन है कि चारों प्रकार के अन्न और अनेक स्वादिष्ट भोग अर्पित किए गए हैं। ढोल-नगाड़ों और दुंदुभि के मधुर स्वर गूंज रहे हैं, जिससे पूरा गोकुल उत्सवमय हो गया है। गोपियाँ नाच रही हैं, कुमकुम और अक्षत उछाल रही हैं, और खुले हाथों दान दिया जा रहा है। यह दर्शाता है कि जहाँ बालक कृष्ण हैं, वहाँ आनंद और मंगल स्वयं उपस्थित रहते हैं।
आरती में यह भी बताया गया है कि देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि पुष्पवर्षा कर रहे हैं, और ब्रज की युवतियाँ मुस्कान के साथ इस अलौकिक दृश्य को निहार रही हैं। यह संकेत करता है कि बाल श्रीकृष्ण का यह रूप केवल गोकुल तक सीमित नहीं, बल्कि तीनों लोकों को आनंदित करने वाला है।
अंत में कवि कृष्णदास यह भाव प्रकट करते हैं कि प्रभु गिरधर का मुख इतना सुंदर और तेजस्वी है कि चंद्रमा की कांति भी उसके सामने लज्जित हो जाती है। यह बालक कृष्ण के सौंदर्य, माधुर्य और दिव्यता का सर्वोच्च वर्णन है।
निष्कर्ष
श्री यशोदालाल आरती हमें यह सिखाती है कि भगवान श्रीकृष्ण केवल पूज्य देवता ही नहीं, बल्कि भक्तों के अपने, स्नेह और प्रेम से बंधने वाले प्रभु हैं। माता यशोदा का वात्सल्य भाव यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति प्रेम और अपनत्व से उत्पन्न होती है, न कि केवल विधि-विधान से। इस आरती का श्रद्धापूर्वक गायन मन को शांति, आनंद और बालकृष्ण की मधुर भक्ति से भर देता है।
🙏 जय श्री यशोदालाल | जय बाल गोपाल | राधे राधे 🙏
भगवान यशोदा लाल की आरती – Yashoda Lal Ki Aarti
आरति करत यसोदा प्रमुदित,फूली अंग न मात।
बल-बल कहि दुलरावतआनन्द मगन भई पुलकात॥
सुबरन-थार रत्न-दीपावलिचित्रित घृत-भीनी बात।
कल सिन्दूर दूब दधिअच्छत तिलक करत बहु भाँत॥
अन्न चतुर्विध बिबिधभोग दुन्दुभि बाजत बहु जात।
नाचत गोप कुम्कुमाछिरकत देत अखिल नगदात॥
बरसत कुसुम निकर-सुर-नर-मुनि व्रजजुवती मुसकात।
कृष्णदास-प्रभु गिरधर कोमुख निरख लजत ससि-काँत॥
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🌸 राधे राधे | जय श्रीकृष्ण | जय माता यशोदा🌸